अब्दुल्लानगर से 12 बुलडोजर और 400 पुलिस फोर्स के बैरंग वापस लौटने की कहानी

3 weeks ago

पटना के राजीव नगर की तरह ही पूर्णिया का अब्दुल्ला नगर का विवाद लगातार गहराता जा रहा है. पूर्णिया शहर और पूर्णिया पूर्व प्रखंड कार्यालय के बगल में सटा मोहल्ला है अब्दुल्ला नगर. इसी अब्दुल्ला नगर क्षेत्र में वार्ड नंबर 42 का आनंद नगर भी है जहां हाई कोर्ट के आदेश के बाद खाता संख्या 120 के 22 एकड़ जमीन पर बसे करीब 500 घरों पर प्रशासन का बुलडोजर तोड़ने के लिए तैयार है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि अब्दुल्ला नगर का पूरा विवाद है क्या? आइये इसके बारे में पूरा विस्तार से जानते हैं.

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बता दें कि अब तक तीन बार बड़ी संख्या में पुलिस बल, दर्जनों जेसीबी के साथ अब्दुल्ला नगर में अतिक्रमण खाली करने के लिए प्रशासन जा चुकी है, लेकिन स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा है. बीते रविवार (11 फरवरी) को भी कई थाने की पुलिस के साथ 400 पुलिस बल, एसडीएम, एसडीपीओ एक दर्जन जेसीबी के साथ अब्दुल्ला नगर को खाली करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन हजारों लोग विरोध में खड़े हो गए.

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छोटे-छोटे बच्चे महिलाएं बुजुर्ग और युवा अपना-अपना कागज लेकर खड़ा हो गए. लोगों का कहना है कि किसी ने यह जमीन रजिस्ट्री ली है तो करीब 200 लोगों का पर्चा बना हुआ है. अब वे लोग कहां जाएं. स्थानीय लोगों ने कहा कि वे लोग हाई कोर्ट में अपील दायर किए हैं और 22 फरवरी को इस पर सुनवाई होनी है.

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वहीं, महापौर के पति जितेंद्र यादव ने भी कहा कि अब्दुल्ला नगर मोहल्ला में सैकड़ों लोग 30-40 वर्षों से बसे हुए हैं. यहां सभी जाति और समुदाय के लोग हैं. नगर निगम द्वारा कई लोगों को प्रधानमंत्री आवास भी दिया गया है. अचानक हाई कोर्ट का आदेश आया है और प्रशासन बुलडोजर लेकर इस महिला को उजाड़ने पहुंच गई. ऐसे में ये लोग कहां जाएंगे.

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जितेंद्र यादव ने कहा है कि प्रशासन से मोहलत मांगी है कि यहां के लोगों को भी न्यायिक प्रक्रिया करने के लिए समय दिया जाए. लोगों ने कहा कि वे लोग आत्मदाह कर लेंगे, जान दे देंगे, लेकिन घर तोड़ने नहीं देंगे. अगर घर ही टूट गया तो वे लोग कहां रहेंगे.

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वहीं प्रशासन भी तीन बार दलबल के साथ अतिक्रमण खाली करने के लिए गई है, लेकिन हर बार लोगों के भारी विरोध के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा है. पीड़ित पक्ष के वकील ने सदर एसडीएम और एसीडीपीओ को हाई कोर्ट का 6 फरवरी का एक आदेश दिखाया. जिसमें कहा गया कि प्रशासन 5:50 एकड़ जमीन को चिन्हित कर उसके बाद खाली करवाए.

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इसके बाद सदर एसडीएम राकेश रमन ने कहा कि वह हाई कोर्ट के ताजा आदेश के आलोक में पहले चिन्हित करेंगे और उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी. उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वह कोर्ट में अपना पक्ष रखें, क्योंकि उनकी सुनवाई कोर्ट से ही हो सकती है. स्थल पर वे लोग कुछ नहीं कर सकते हैं.

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बहरहाल, देखना है कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है. क्या हाई कोर्ट से लोगों को राहत मिलती है या प्रशासन अतिक्रमण को खाली करवाती है.

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