तेजस्‍वी के साथ हो गया खेला... वो 3 नेता, ज‍िन्‍होंने छोड़ी लालू की 'लालटेन'

3 weeks ago

नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ जाने के बाद तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि खेला अभी शुरू हुआ है और खत्म वही करेंगे.

नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ जाने के बाद तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि खेला अभी शुरू हुआ है और खत्म वही करेंगे.

नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ जाने के बाद तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि खेला अभी शुरू हुआ है और खत्म वही करेंगे. नीतीश कुमार की सरकार के साथ खेला करने के दावे सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के पहले तक किए गए, लेकिन विधानसभा के भीतर आज तेजस्वी यादव और आरजेडी के साथ ही ऐसा खेला हो गया, जिसकी उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी. पार्टी के तीन विधायक चेतन आनंद, नीलम देवी और प्रह्लाद यादव सत्ता पक्ष के साथ दिखे. ये तीनों विधायक मात्र नहीं हैं, बल्कि अपने अपने इलाके में या तो बड़ा जनाधार रखते हैं या फिर बड़े जनाधार वाले परिवार के सदस्य हैं.

सबसे पहले बात चेतन आनंद की. चेतन आनंद बाहुबली आनंद मोहन के बेटे हैं और शिवहर से विधायक हैं. आनंद मोहन की पहचान बाहुबली के रूप में पूरे बिहार में थी, वो शिवहर से सांसद भी रह चुके हैं और उनकी पत्नी लवली आनंद भी वैशाली से सांसद रह चुकी है. आनंद मोहन राजपूत समाज में बड़ा प्रभाव रखते हैं और 190 में पहली बार जनता दल के टिकट पर विधायक बने थे. उसके बाद 96 में फिर विधायकी जीती और साल 1998 में राजद के टिकट पर शिवहर से सांसद भी चुने गए थे. उनके बेटे चेतन आनंद को भी राजद ने पारिवारिक प्रभाव को देखते हुए दिकट दिया था और वो जीत कर विधायक भी बन गए थे. सोमवार को राजद से बगावत के बाद चेतन आनंद ने फेसबुक पर लिखा कि ठाकुर के कुएं में पानी बहुत है. सब को पिलाना है.

दरअसल इसके पीछे भी कुछ दिनों पहले राज्यसभा में घटी घटना है. राजद के ही सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में ठाकुर का कुआं कविता सुनाई थी. उस समय भी आनंद मोहन ने इस पर सवाल खड़े किए थे. 90 के दशक में बिहार में अगड़ा बनाम पिछड़ा की राजनीति में आनंद मोहन बेहद सक्रिय थे. कुछ समय पहले उनकी जेल से रिहाई के नियम भी बदले जाने का आरोप लगा था. ये भी कहा गया था कि राजपूत बिरादरी में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए सरकार ने ऐसा किया. राजद पर एक समय में आरोप लगता था कि वो अगड़ों का विरोध कर उसने सूबे में अपनी पैठ बनाई थी. उस राजनीतिक परसेपशन से बाहर निकलने के लिए भी चेतन मोहन जैसे युवा नेताओं को अपने साथ रखना तेजस्वी के लिए प्लस पाइंट माना जा सकता था. लेकिन रविवार शाम तक तेजस्वी यादव के साथ उनके घर पर क्रिकेट खेल रहे चेतन आनंद सुबह की आहट के साथ सरकार संग खड़े दिखाई दिए.

नीलम देवी बाहुबली की पत्‍नी

नीलम देवी बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी हैं. वही अनंत सिंह जो अपने इलाके मोकामा में छोटे सरकार या मोकामा के डॉन के नाम से भी जाने जाते थे. अनंत सिंह के खौफ के अनेकों किस्से सुनाई देते रहे हैं. वो चाहे जेल में रहा हो या बाहर, मोकामा की सियासत उनके नाम के इर्द गिर्द ही घूमती रही है. अनंत सिंह 2005 और 2010 में जेडीयू के टिकट पर मोकामा से विधायक बने. साल 2015 में अनंत सिंह का टिकट कटा तो वो निर्दलीय ही मैदान में उतर गए और फतेह हासिल की. साल 2019 में अनंत सिंह के पैतृक घर पर हुई छापेमारी में पुलिस ने एके47 और हैंड ग्रेनेड सहित अन्य हथियार भी बरामद किए गए. 2005 में विधायक बनने वाले अनंत सिंह की विधायकी तभी गई, जब एक आपराधिक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद वो अयोग्य करार दिए गए. हालांकि अनंत सिंह की विधायकी गई तो उनकी पत्नी नीलम देवी वहां से विधायक चुन ली गई. मोकामा भूमिहार बहुल इलाका है, 1967 को छोड़कर वहां भूमिहार ही जीतते रहे हैं. अनंत सिंह का जलवा कितना है, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उपचुनाव में बीजेपी ने सीट जीतने के लिए पूरा जोर लगा दिया था, लेकिन नीलम देवी आसानी से चुनाव जीत गई. राजनीति में आने के बाद अनंत सिंह जेडीयू की ओर से ही दो बार विधायक बने थे. बाद में सुशासन की छवि को देखते हुए नीतीश कुमार ने उनसे दूरी बना ली थी, लेकिन अब मोकामा के इस डॉन की पत्नी ने एक बार नीतीश कुमार के पाले में जाकर अपना रुख साफ कर दिया है. जाहिर है इसका नुकसान राजद को मोकामा और उसके आसपास झेलना होगा, जहां आज भी जेल में होने के बावजूद अनंत सिंह एक बड़ी भूमिका निभाते हैं.

प्रह्लाद यादव लखीसराय से व‍िधायक
प्रह्लाद यादव लखीसराय के सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और राजद के संस्थापक सदस्य कहे जाते हैं. साल 1995 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं, छवि भी दबंग और बाहुबली की है. उनका राजद से अलग लाइन लेना और तेजस्वी के खिलाफ जाकर खड़ा होना पार्टी को भी चौंका रहा है. वो हमेशा लालू परिवार के साथ रहे और लंबे समय से लखीसराय के पार्टी के जिलाध्यक्ष भी हैं. इलाके में काफी प्रभावशाली माने जाने वाले प्रह्लाद यादव की पलटी के बारे में तो शायद लालू परिवार ने भी नहीं सोचा होगा.

एक मजबूत राजपूत विधायक, एक मजबूत भूमिहार विधायक के साथ साथ प्रह्लाद यादव को अपने खेमे में खड़ा कर नीतीश कुमार और सत्ता पक्ष ने संदेश दिया है कि लालू यादव की जाति से जुड़े मजबूत नेता भी उनसे अलग हो रहे हैं. ऐसे समय में जब तेजस्वी यादव अपने बूते पार्टी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, तीन मजबूत नेताओं का अलग होना उनकी परेशानियों को बढ़ा सकता है.

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Tags: Bihar News, Tejashvi Yadav

FIRST PUBLISHED :

February 12, 2024, 19:42 IST

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