देश के अधिकतर किसान नए कृषि कानूनों के समर्थन में, सरकार चर्चा के लिए हमेशा तैयार: केंद्रीय मंत्री

1 month ago

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर. (फाइल फोटो)

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर. (फाइल फोटो)

Narendra Tomar Farm Laws: नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, "तीनों कृषि कानून, किसानों के भले के लिए लाये गये हैं और देश भर के अधिकांश किसान इन कृषि कानूनों के समर्थन में खड़े हैं."

भाषाLast Updated : October 24, 2021, 20:56 IST

भोपाल. केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने रविवार को कहा कि देश भर के अधिकांश किसान एवं किसान यूनियन केन्द्र के तीन नये कृषि कानूनों के समर्थन में खड़े हैं और कुछ ही लोगों को इस मामले में मतभेद है. मंत्री ने कहा कि वे जो भी प्रस्ताव लेकर आएंगे, उस पर केंद्र सरकार चर्चा जरूर करेगी.

तोमर ने खंडवा लोकसभा के ग्राम गुड़ीखेड़ा और पंधाना में चुनावी सभा में भाग लेने जाते वक्त एक सवाल के जवाब में मीडिया से कहा, ‘‘तीनों कृषि कानून, किसानों के भले के लिए लाये गये हैं और देश भर के अधिकांश किसान इन कृषि कानूनों के समर्थन में खड़े हैं. अधिकतर यूनियन भी इन कानूनों के समर्थन में खड़े हैं.’’

किसानों के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सरकार हमेशा तैयार’
उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोगों को इस मामले में मतभेद है. उनसे भी हमने संवेदनशीलता के साथ चर्चा की है और आने वाले कल में जब भी वे चाहेंगे और प्रस्ताव लेकर आएंगे तो सरकार उनके प्रस्तावों पर चर्चा जरूर करेगी.”

‘डीएपी उर्वरक की थोड़ी कमी’
डीएपी खाद की कमी की चर्चा पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में तोमर ने कहा, “सामान्य तौर पर डीएपी उर्वरक की थोड़ी कमी है, क्योंकि हम डीएपी को आयात करते हैं और उसके भाव भी बढ़े हैं.” उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में जब डीएपी के भाव बढ़े थे तो एक बैग पर 1200 रुपये सब्सिडी देने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निर्णय लिया था, जिससे किसानों पर भार न पड़े.

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तोमर ने बताया कि अभी फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीएपी खाद की कीमतों में वृद्धि हुई है और 1650 रुपये प्रति बैग डीएपी पर सब्सिडी देने का निर्णय हुआ है. उन्होंने कहा, ‘‘डीएपी को मंगाया जा रहा है और कोशिश की जा रही है कि इसकी आपूर्ति ठीक से की जाये.’’

तोमर ने कहा, ‘‘मैं आपके माध्यम से किसानों से आग्रह करना चाहता हूं कि डीएपी आ रहा है और डीएपी मिलेगा, लेकिन हम सब लोगों को जो अन्य विकल्प हैं, उन विकल्पों का भी उपयोग करते रहना चाहिए.’’

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