Explained: Cryptocurrencies पर लगाम कसने के पक्ष में भारतीय जांच एजेंसियां, जानें क्या है कारण

1 week ago

क्रिप्टोकरेंसी एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 को संसद के आगामी सत्र के लिए सूचीबद्ध किया गया है

क्रिप्टोकरेंसी एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 को संसद के आगामी सत्र के लिए सूचीबद्ध किया गया है

Cryptocurrency in India: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय, आयकर और अन्य जांच एजेंसियों के अधिकारियों ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी में पहचान का जाहिर न होना सबसे बड़ा मुद्दा है जिनसे अपराधियों, ड्रग तस्करों और आतंकी संगठनों को मदद मिल सकती है. ये समस्या केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि विश्व स्तर पर भी, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को क्रिप्टोकरेंसी के आपराधिक उपयोग के बारे में चिंतित हैं.

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News18HindiLast Updated : November 25, 2021, 18:23 IST

(अंकुर शर्मा)

नई दिल्ली. सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी (Private Cryptocurrency) पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के प्रस्तावित कदम पर बहस छिड़ने के बाद भारत की शीर्ष जांच और खुफिया एजेंसियां ​​​​डिजिटल मुद्राओं को लेकर नियम बनाने पर विचार कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन की गुमनाम प्रकृति के कारण बड़े पैमाने पर इसके गलत इस्तेमाल और इस पर रोक लगाने में कठिनाइयां सामने आ सकती हैं.

क्रिप्टोकरेंसी एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 (Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021) को संसद के आगामी शीत सत्र के लिए सूचीबद्ध किया गया है और आरबीआई द्वारा आधिकारिक डिजिटल मुद्रा की अनुमति देते हुए अंतर्निहित टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए कुछ निजी क्रिप्टोकरेंसी को छोड़कर सभी पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया है.

न्यूज18 से बात करते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय, आयकर और अन्य जांच एजेंसियों के अधिकारियों ने कहा कि इसमें पहचान का जाहिर न होना सबसे बड़ा मुद्दा है जिनसे अपराधियों, ड्रग तस्करों और आतंकी संगठनों को मदद मिल सकती है.

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लेन-देन करने वालों की जानकारियां जुटाना मुश्किल
एनसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा “किसी भी संदिग्ध लेनदेन के मामले में लेनदेन की पूरी श्रृंखला और इसमें शामिल व्यक्तियों को जानना लगभग असंभव है. कोई एकीकृत क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज नहीं है और कोई नहीं जानता कि कौन इसे नियंत्रित करता है और सभी डेटा इकट्ठा करता है. क्रिप्टोकरेंसी से निपटने वाली कंपनियों की भी सीमित पहुंच होती है और वे केवाईसी के माध्यम से उपयोगकर्ताओं और लेनदेन के बारे में सीमित जानकारी रख पाती हैं.”

ये समस्या केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि विश्व स्तर पर भी, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को क्रिप्टोकरेंसी के आपराधिक उपयोग के बारे में चिंतित हैं. क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित मामलों की जांच के लिए आवश्यक जटिलता और विशेषज्ञता की गंभीरता को समझने के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले महीने एक राष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी प्रवर्तन टीम (एनसीईटी) की घोषणा की. अमेरिकी सरकार ने कहा, “यह टीम क्रिप्टोकरेंसी के आपराधिक दुरुपयोग, विशेष रूप से इस वर्चुअल मुद्रा के आदान-प्रदान, मिश्रण और टम्बलिंग सेवाओं, और मनी लॉन्ड्रिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में किए गए अपराधों की जटिल जांच और मुकदमे से निपटेगी.”

ट्रांजैक्शन तेज होने के चलते ट्रेस करना मुश्किल
ड्रग्स विरोधी कार्रवाई में सक्रिय रूप से शामिल पंजाब के पूर्व डीजीपी शशि कांत ने न्यूज 18 को बताया: “वे (क्रिप्टोकरेंसी) आम तौर पर कई नेटवर्क के माध्यम से रूट की जाती हैं. इनका लेनदेन बहुत तेज होता है और अक्सर इसे ट्रेस करना मुश्किल होता है. यह निजी क्रिप्टोकरेंसी के बारे में ज्यादा सच है. क्रिप्टोग्राफी लेनदेन को सुरक्षित रखती है. उन्हें डार्क वेब पर सभी ई-कॉमर्स स्टोरफ्रंट पर स्वीकार किया जाता है. इसलिए, वे हवाला लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के लिए काम में आती हैं.”

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इंटरपोल ने भी, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में हो रही बढ़ोतरी को चिह्नित किया है जो इस तरह के संचालन के लिए गुमनामी उधार देते हैं, जिससे उन्हें आपराधिक संगठनों द्वारा दुरुपयोग के लिए उत्तरदायी बना दिया जाता है.

डार्कनेट भी एक बड़ा सिरदर्द
इंटरपोल ने कहा, “उन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में वृद्धि हुई है जो अपने उपयोगकर्ताओं को की पहचान छिपाते हैं. डार्कनेट – इंटरनेट का एक बड़ा हिस्सा जिसे केवल विशेष सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके एक्सेस किया जा सकता है – और वर्चुअल क्रिप्टोकरेंसी के कई सकारात्मक लाभ हैं, लेकिन पहचान उजागर न होने से अपराधियों के गलत इस्तेमाल के लिए यह आसान हो जाता है. ड्रग्स, फायर आर्म्स और विस्फोटकों की अवैध बिक्री; तस्करी; काले धन को वैध बनाना; आतंकवादी गतिविधियां; और साइबर अपराध को इन टेक्नोलॉजीज़ की मदद से आसान बनाया जा सकता है.”

एनआईए द्वारा आयोजित आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट के गलत इस्तेमाल पर पर ब्रिक्स सेमिनार के दौरान इस साल अप्रैल में डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई थी. सूत्रों ने कहा कि इस सेमिनार के दौरान, पांच सदस्यीय देशों के 40 विशेषज्ञों ने भाग लिया, सभी प्रतिभागियों ने क्रिप्टोकरेंसी पर सख्त प्रतिबंध की जरूरत जाहिर की और अज्ञात लोगों के जरिए से क्रिप्टो के उपयोग पर चिंता जताई.

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क्रिप्टो लेनदेन ट्रैक करना असंभव
साइबर एक्सपर्ट जितेन जैन ने न्यूज18 से कहा, “तकनीकी रूप से, किसी विशेष यूजर के लिए क्रिप्टो लेनदेन को ट्रैक करना संभव नहीं है. आप एक खुले बहीखाते का इस्तेमाल करके लेनदेन को ट्रैक कर सकते हैं जहां रकम प्राप्त करने या ट्रांसफर करने वाले व्यक्ति की इकाई द्वारा धन स्थानांतरित किया गया है. जैन ने बताया, “जब तक आपके पास एक्सचेंज का कुछ गहरा डेटाबेस नहीं है, या वैध एक्सचेंज का केवाईसी-सत्यापित यूजर नहीं है, तब तक यह पता लगाना बहुत मुश्किल है.” हालांकि, उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाना कोई विकल्प नहीं है.

क्रिप्टोकरेंसी के प्रमुख और बड़े पैमाने पर दुरुपयोग में से एक ड्रग्स की तस्करी है. एनसीबी ने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सांठगांठ के बारे में विवरण देते हुए कहा था, “ड्रग की सोर्सिंग मुख्य रूप से डार्कनेट के जरिए थी, जो खरीदारों और विक्रेताओं की पहचान को उजागर नहीं होने देता है. इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी में आर्थिक लेनदेन क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर आधारित होती है.”

अनसुलझे ही रह गए कई मामले
कई राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के सामने भी, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के मामले सामने आए हैं. इसमें कबूलनामे को छोड़कर, जांचकर्ताओं को ऐसे मामलों को सुलझाने में कोई मदद नहीं मिलती है.

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 स्थानीय कर्नाटक सीआईडी ​​द्वारा श्रीकी नाम के एक हैकर को गिरफ्तार करने के बाद ईडी वर्तमान में ड्रग्स के बदले बिटकॉइन घोटाले की जांच कर रहा है. हैकर पर आरोप है कि उसने क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन करने वाले खातों को हैक करके 9 करोड़ रुपये मूल्य के बिटकॉइन इकट्ठा किए. आरोपी पर डार्कनेट के माध्यम से ड्रग्स लेने का आरोप है, जांच के दौरान कुछ शीर्ष राजनीतिक नेताओं के रिश्तेदारों के नाम सामने आए.

इसी तरह, एनआईए ने पिछले साल एक चार्जशीट दायर की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि जहांजैब सामी नाम के आईएसआईएस के एक ऑपरेटिव ने भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने के लिए बिटकॉइन के माध्यम से धन प्राप्त किया था. आरोपी और उसकी पत्नी हिना बशीर को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था और वह कथित तौर पर भारत में आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे.

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Tags: Crypto, Crypto currency, Cryptocurrency

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