60 मिनट में बच सकता है आपका पैसा! जानें साइबर फ्रॉड का 'गोल्डन ऑवर' और 1930 हेल्पलाइन का पूरा सच

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Last Updated:January 17, 2026, 13:01 IST

cyber Fraud: साइबर फ्रॉड के बाद पहले 60 मिनट बेहद अहम होते हैं. इसे 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है. अगर इस दौरान 1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर या Cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज की जाए, तो बैंक अकाउंट फ्रीज हो सकता है और ठगा गया पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है. सावधानी और समय पर शिकायत ही सबसे बड़ा बचाव है.

60 मिनट में बच सकता है पैसा! साइबर फ्रॉड का गोल्डन ऑवर और 1930 का सचगोल्डन ऑवर वह शुरुआती 60 मिनट होते हैं, जब ठगी की सूचना मिलने पर बैंक और एजेंसियां तेजी से एक्शन ले सकती हैं. (फोटो AI)

नई दिल्ली: देश में साइबर फ्रॉड अब किसी एक वर्ग या उम्र तक सीमित नहीं रहा. मोबाइल फोन, इंटरनेट बैंकिंग और UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ठगों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं. कभी OTP और KYC अपडेट के नाम पर, कभी डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर तो कभी फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों की जमा पूंजी मिनटों में साफ की जा रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ठगी हो जाए तो क्या पैसा वापस मिल सकता है? जवाब है हां, लेकिन एक शर्त पर. वही शर्त है ‘गोल्डन ऑवर’ यानी पहले 60 मिनट.

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि साइबर फ्रॉड के बाद पहला एक घंटा सबसे अहम होता है. इसी दौरान की गई शिकायत बैंकिंग सिस्टम में अलर्ट पैदा कर सकती है, ट्रांजैक्शन रोकी जा सकती है और कई मामलों में ठगा गया पैसा होल्ड या रिवर्स भी हो सकता है. सरकार ने इसके लिए 1930 हेल्पलाइन और Cybercrime.gov.in पोर्टल की सुविधा दी है. लेकिन जानकारी के अभाव में ज्यादातर लोग देर कर देते हैं और नुकसान स्थायी हो जाता है.

साइबर फ्रॉड के तरीके कैसे बदल रहे हैं?

साइबर एक्सपर्ट मोहित यादव बताते हैं कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी एडवांस हो रही है, वैसे-वैसे ठग भी ज्यादा स्मार्ट होते जा रहे हैं. अब ठगी सिर्फ कॉल तक सीमित नहीं है. फर्जी APK फाइल, अनजान लिंक, WhatsApp इनविटेशन कार्ड, बिजली या गैस बिल, ट्रैफिक चालान और बैंक अलर्ट के नाम पर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है. एक क्लिक या एक परमिशन ही अकाउंट खाली कराने के लिए काफी होती है.

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि साइबर फ्रॉड के बाद पहला एक घंटा सबसे अहम होता है. (फोटो AI)

क्या है साइबर फ्रॉड का ‘गोल्डन ऑवर’?

गोल्डन ऑवर वह शुरुआती 60 मिनट होते हैं, जब ठगी की सूचना मिलने पर बैंक और एजेंसियां तेजी से एक्शन ले सकती हैं. इस दौरान ट्रांजैक्शन चैन को ट्रैक किया जा सकता है, रिसीवर अकाउंट फ्रीज किया जा सकता है और पैसा आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सकता है. जितनी जल्दी शिकायत, उतनी ज्यादा रिकवरी की संभावना.

फ्रॉड होते ही क्या करें?

अगर आपके साथ साइबर ठगी हो जाए तो घबराने की बजाय तुरंत ये कदम उठाएं:

1930 हेल्पलाइन पर तुरंत कॉल करें. Cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें. बैंक को तुरंत सूचना दें. ट्रांजैक्शन ID और कॉल/मैसेज के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें.

समय पर की गई शिकायत कई मामलों में चमत्कार साबित होती है.

कैसे बचें साइबर ठगी से?

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है. किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें. OTP, बैंक डिटेल या KYC जानकारी किसी से साझा न करें. मोबाइल में ऐप परमिशन और लोकेशन सोच-समझकर Allow करें. शक होने पर कॉल तुरंत काट दें. APK फाइल डाउनलोड करने से बचें.

त्योहार और शादी के सीजन में ज्यादा खतरा

नया साल, मकर संक्रांति और शादी-ब्याह के सीजन में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ते हैं. इस दौरान इनविटेशन कार्ड, गिफ्ट कूपन और बिल के नाम पर फर्जी फाइल भेजी जाती हैं. थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है.

साइबर फ्रॉड आज की डिजिटल दुनिया की सच्चाई है, लेकिन सही जानकारी और समय पर एक्शन से नुकसान को रोका जा सकता है. याद रखें 60 मिनट का गोल्डन ऑवर आपकी मेहनत की कमाई बचा सकता है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें

First Published :

January 17, 2026, 12:59 IST

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