Last Updated:January 05, 2026, 12:39 IST
Army Story, IMA Success Story: यह कहानी मणिपुर के छोटे से गांव की एक बेटी की है. उसने 8वीं क्लास में जो सपना देखा था, उसे 22 साल की उम्र में साकार कर इतिहास रच दिया. सिक्योरिटी गार्ड की बेटी के लिए सेना में अफसर बनना आसान नहीं रहा होगा, लेकिन उसने किसी भी पड़ाव पर हार नहीं मानी.
IMA Success Story: भारतीय सेना में अफसर बनने की यह कहानी बहुत मोटिवेशनल हैनई दिल्ली (Army Story, IMA Success Story). सितारों को छूने का ख्वाब हर कोई देखता है, लेकिन उन तक पहुंचने का रास्ता अक्सर कांटों भरा होता है. रात के अंधेरे में एटीएम या किसी इमारत के बाहर लाठी लेकर पहरा देने वाले सुरक्षा गार्ड की बेटी जब सरहद पर देश की रक्षा के लिए कंधे पर सितारे लगाकर वर्दी पहनती है तो वह पल केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि क्रांति बन जाता है. मणिपुर के एक छोटे से गांव की बेटी ने अपनी आंखों में पल रहे इसी सपने को सच कर दिखाया.
सी. एनोनी की सक्सेस स्टोरी केवल निजी सफलता नहीं है, बल्कि संघर्ष और अडिग विश्वास की ऐसी दास्तां है, जो मणिपुर के सेनापति जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर देहरादून की प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) तक पहुंचती है. सुरक्षा गार्ड के मामूली वेतन से 8 सदस्यों वाले घर की जरूरतों और 6 बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना किसी जंग से कम नहीं रहा होगा. लेकिन जब पासिंग आउट परेड के दौरान पिता ने अपनी बेटी को देखा तो उनके चेहरे की मुस्कान ने बरसों की थकान और गरीबी का हर घाव भर दिया.
संघर्ष से सरहद तक: सुरक्षा गार्ड की बेटी बनी सेना में अफसर
मणिपुर के सेनापति जिले के रालूनामेई गांव की रहने वाली सी. एनोनी ने महज 22 साल की उम्र में वह मुकाम हासिल किया है, जो लाखों युवाओं का सपना होता है.
22 की उम्र में रचा इतिहास
सी एनोनी माओ नागा समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. यह उत्तर-पूर्वी भारत के मणिपुर और नागालैंग राज्यों में बसी एक नागा जनजाति है. यह समुदाय मुख्य रूप से मणिपुर के सेनापति जिले के उत्तरी हिस्से में बसा हुआ है. वह इलाका, जो दरअसल नागालैंड से सटा हुआ है. इनकी खास पहचान बांस, मिट्टी और फूस से बने घर और सुंदर पारंपरिक पोशाकों से जोड़ी जाती है. इस समुदाय की आबादी 1 लाख से ऊपर है. इनमें से एनोनी भारतीय सेना की वर्दी पहनने वाली पहली लड़की हैं.
पिता की लाठी और बेटी की तलवार
Ch Enoni के पिता निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं. उनकी सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों को इस काबिल बनाना किसी हिमालयी चुनौती से कम नहीं था. एनोनी बताती हैं कि उनके पिता ने कभी अपनी आर्थिक तंगी को उनके सपनों के आगे नहीं आने दिया. रात-रात भर जागकर पहरा देने वाले पिता का एकमात्र उद्देश्य अपनी बेटी को अधिकारी की वर्दी में देखना था. एकेडमी की ट्रेनिंग के दौरान जब भी थकान होती, एनोनी को अपने पिता के संघर्ष याद आते और वे दुगनी ऊर्जा से भर जातीं.
चुनौतियां और आईएमए की कठिन ट्रेनिंग
सेना में ऑफिसर बनना आसान नहीं है. एनोनी 6 बच्चों में सबसे छोटी हैं. उनका बचपन मुश्किलों से भरा हुआ था. फिर भी उन्होंने अपना सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की. जब वह 8वीं क्लास में थीं, तब इंडियन आर्म्ड फोर्सेज की यूथ विंग, नेशनल कैडेट कॉर्प्स ने महिलाओं को कॉर्प्स का हिस्सा बनने की इजाजत दी. उसी समय एनोनी ने सेना में शामिल होने का सपना देखा. एनोनी स्कूल में NCC में शामिल हुईं और फिर NCC सीनियर विंग का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली आ गईं.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें
First Published :
January 05, 2026, 12:39 IST

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