नई दिल्ली (CTET 2026). सीबीएसई सीटीईटी 2026 परीक्षा ने पिछले साल आए आवेदन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सत्र के लिए 25.30 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है, जो पिछली परीक्षा (दिसंबर 2024) की तुलना में लगभग 9 लाख अधिक है. आवेदकों की इस वृद्धि ने न केवल बोर्ड को सीटीईटी परीक्षा शेड्यूल बदलने पर मजबूर किया, बल्कि शिक्षा जगत में नई बहस भी छेड़ दी. इस साल सिर्फ नए अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि अनुभवी शिक्षक भी सीटीईटी देंगे.
आवेदकों की संख्या में भारी उछाल का सबसे बड़ा कारण सुप्रीम कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला है, जिसने शिक्षक पात्रता परीक्षा को सभी के लिए अनिवार्य बना दिया. कोर्ट के आदेश के बाद, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बिना टीईटी के पढ़ा रहे लाखों शिक्षकों के पास अब अपनी नौकरी बचाने के लिए सीटीईटी पास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. जानिए, आखिर किन परिस्थितियों ने सीटीईटी को इस साल देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक बना दिया है.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: नौकरी बचाने की चुनौती
आवेदकों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सितंबर 2025 में आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले हर शिक्षक के पास टीईटी योग्यता होनी अनिवार्य है. कोर्ट ने उन शिक्षकों को भी रियायत नहीं दी, जिनकी नियुक्ति 2010 (आरटीई लागू होने) से पहले हुई थी. सेवारत शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए 2 साल का समय दिया गया है, वरना उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति या नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है.
प्रमोशन के लिए CTET अनिवार्य
अब केवल नई भर्ती ही नहीं, बल्कि प्रमोशन के लिए भी सीटीईटी/टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है. कई राज्यों में प्राइमरी शिक्षकों (PRT) को टीजीटी (TGT) पद पर प्रमोट करने के लिए नेट या राज्य टीईटी की अनिवार्यता लागू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, जिन शिक्षकों की सेवा में 5 साल से अधिक का समय बचा है, उन्हें प्रमोशन पाने के लिए अनिवार्य रूप से यह परीक्षा पास करनी होगी. इसी कारण प्रमोशन की कतार में खड़े हजारों शिक्षकों ने इस बार सीटीईटी के लिए आवेदन किया है.
राज्यों में ‘सीटीईटी’ की बढ़ती स्वीकार्यता
हाल के कुछ सालों में कई राज्यों ने अपनी राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) आयोजित करने में देरी की है. इस स्थिति में, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अभ्यर्थियों ने सीटीईटी को सुरक्षित विकल्प के रूप में चुना है. केंद्र सरकार के साथ-साथ अब कई राज्य सरकारें भी सीटीईटी स्कोरकार्ड को स्थानीय भर्तियों में मान्यता दे रही हैं. सीबीएसई ने इस बार आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है. साथ ही, शिक्षकों के बीच सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी भी तेजी से फैली.
आंकड़ों का विश्लेषण: क्यों घटती-बढ़ती रही संख्या?
| परीक्षा वर्ष/सत्र | कुल पंजीकृत अभ्यर्थी | पिछले सत्र से तुलना |
| फरवरी 2026 | 25,30,436 | 9 लाख की भारी वृद्धि |
| दिसंबर 2024 | 16,72,748 | गिरावट देखी गई |
| जुलाई 2024 | 20,25,554 | – |
| जनवरी 2024 | 26,93,526 | शिक्षा सत्र की शुरुआत के कारण अधिक उम्मीदवार |
| अगस्त 2023 | 29,03,496 | बीएड/डीएलएड विवाद के समय का पीक |
| दिसंबर 2022 | 32,42,746 | अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा (CBT मोड) |
| दिसंबर 2021 | 35,55,162 | कोविड के बाद की पहली बड़ी परीक्षा |
2021-2022 का पीक: इस दौरान ऑनलाइन परीक्षा (CBT) की शुरुआत हुई थी और कोविड के बाद नौकरियों की उम्मीद में आवेदकों की संख्या 35 लाख के पार पहुंच गई थी.
2024 की गिरावट: बीएड (B.Ed) बनाम बीटीसी (BTC) विवाद और प्राइमरी स्तर से बीएड को बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केवल पेपर-1 भरने वाले आवेदकों की संख्या में कमी आई, जिससे कुल आंकड़ा 16-20 लाख के आसपास सिमट गया.
2026 का उछाल: फरवरी 2026 में आवेदकों की संख्या अचानक बढ़कर 25.30 लाख पार कर गई. इसका मुख्य कारण सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता और प्रमोशन के नए नियम हैं.
2026 की परीक्षा में 2024 की तुलना में लगभग 40% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो दर्शाता है कि अब यह परीक्षा न केवल नई नौकरी के लिए, बल्कि मौजूदा नौकरी बचाने के लिए भी अनिवार्य हो गई है.

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