H-1B से शुरू हुई बहस, ‘Indian Hate’ तक पहुंची, अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ 115% बढ़ी नफरत

1 hour ago

America News: H-1B वीजा प्रोग्राम को लेकर बीते कई महीनों से बहस छिड़ी हुई है. इसकी वजह से अमेरिका में रह रहे भारतीयों और दूसरे साउथ एशियन लोगों को टारगेट करने वाली हेट स्पीच और दुश्मनी भरी बातें तेजी से बढ़ी है क्योंकि इमिग्रेशन और वीजा पॉलिसी नेशनल पॉलिटिकल बहस में फ्लैशपॉइंट बन गईं है. इस लेकर कई बार टारगेट करके गालियां दी गई. साथ ही भारतीयों के खिलाफ नफरत भी तेजी के साथ बढ़ रही है. जानिए क्या है पूरा मामला. 

भारतीयों को किया गया टारगेट
द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से स्टॉप AAPI के अनुसार जनवरी 2023 और दिसंबर 2025 के बीच ऑनलाइन जगहों पर दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ गालियों का इस्तेमाल टारगेटेड हिंसा से जुड़ी हैं. यह 115 प्रतिशत बढ़ गया, संगठन ने कहा कि यह बढ़ोतरी खास तौर पर भारतीयों को टारगेट करने वाले कंटेंट की वजह से हुई, जो इमिग्रेशन बहस और डेमोग्राफिक चिंता से जुड़ी बड़ी दुश्मनी को दिखाता है.

सोशल मीडिया पर फैल रही बातें
सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट ने भी इसी तरह का ट्रेंड पहचाना, जो ऑनलाइन एक्सट्रीमिज्म को ट्रैक करता है. ग्रुप ने पाया कि X पर भारत विरोधी गालियों, स्टीरियोटाइप या “भारतीयों को डिपोर्ट करने” या “भारतीयों के कब्जे” के दावों जैसी बातों वाले पोस्ट को 2025 के बीच में लगभग दो महीनों में लगभग 280 मिलियन व्यू मिले. रिसर्चर्स ने आगे ये भी कहा कि एंगेजमेंट के लेवल से पता चलता है कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम द्वारा बढ़ाए जाने पर ऐसी बातें कितनी तेजी से फैल सकती हैं.

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बन जाते हैं सेंट्रल टारगेट
एनालिस्ट्स ने ऑनलाइन दुश्मनी में बढ़ोतरी को H-1B वीजा प्रोग्राम पर नए सिरे से फोकस से जोड़ा है, जो US एम्प्लॉयर्स को स्किल्ड विदेशी वर्कर्स को हायर करने की इजाजत देता है. अप्रूव्ड H-1B एप्लीकेशन्स में से लगभग तीन-चौथाई भारतीय हैं, जिससे वे जॉब्स, सैलरी और आउटसोर्सिंग पर बहस में एक सेंट्रल टारगेट बन जाते हैं. क्रिटिक्स का कहना है कि यह प्रोग्राम US में जन्मे वर्कर्स को नुकसान पहुंचाता है, जबकि सपोर्टर्स का कहना है कि यह स्पेशल फील्ड्स में लेबर की कमी को दूर करता है.

बढ़ गई है चिंता
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक कम्युनिटी लीडर्स ने कहा कि ऑनलाइन नफरत बढ़ने से भारतीय और इंडियन अमेरिकन निवासियों में चिंता बढ़ गई है, भले ही यह ग्रुप US में सबसे तेजी से बढ़ने वाले, सबसे पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से सफल इमिग्रेंट कम्युनिटीज में से एक बना हुआ है. रिसर्चर्स ने चेतावनी दी कि अगर पॉलिटिकल और पॉलिसी डिबेट्स को सबूतों पर आधारित चर्चा के बजाय रेशियल टर्म्स में देखना जारी रखा गया, जो ऑनलाइन दुश्मनी ऑफलाइन डिस्क्रिमिनेशन में बदल सकती है. 

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