Last Updated:August 30, 2025, 13:20 IST
Tina Dabi IAS Story: बाड़मेर जिला कलेक्टर आईएएस टीना डाबी फिर से चर्चा में हैं. लेकिन इस बार वह अपने काम के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नोटिस के चक्कर में सुर्खियों में छाई हुई हैं.

नई दिल्ली (Tina Dabi IAS Story). टीना डाबी देश की सबसे चर्चित आईएएस अफसरों में से एक हैं. इन दिनों वह राजस्थान के बाड़मेर जिले की कलेक्टर हैं. आईएएस टीना डाबी सुर्खियों में हैं. दरअसल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा है और उन्हें दो हफ्तों के अंदर इस पर जवाब भी देना होगा. राजस्थान के बाड़मेर जिले से हाल ही में सामने आई एक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. गुरुकुल में पढ़ने वाले महज 11 साल के मासूम बच्चे को गर्म लोहे की छड़ से दागा गया.
बच्चे से जुड़ा मामला सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों तक खलबली मच गई. मामला केवल एक बच्चे की यातना का नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि आखिर क्यों हमारी शिक्षा संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतनी लापरवाही होती है. इसी गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना को संज्ञान में लिया और बाड़मेर जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई. फिर आईएएस टीना डाबी को नोटिस भी भेज दिया.
बाड़मेर में क्या हुआ?
आयोग ने इस मामले में बाड़मेर कलेक्टर टीना डाबी और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी किया है. दोनों अधिकारियों से 14 दिनों के अंदर डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी गई है कि यह घटना कैसे हुई, प्रशासनिक स्तर पर कौन-सी खामियां रहीं और अब तक दोषियों पर क्या कार्रवाई की गई. जिला कलेक्टर के तौर पर टीना डाबी पूरे प्रशासनिक ढांचे की मुखिया हैं. इसलिए उनसे सीधी जवाबदेही तय की गई है. आयोग का रुख स्पष्ट है- मानवाधिकार हनन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
NHRC का संज्ञान और नोटिस
NHRC ने इस मामले को बच्चों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन माना. इसीलिए इसे तुरंत संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर और SP से जवाब मांगा. नोटिस में कहा गया कि इस तरह की घटना को रोकने और संस्थानों पर निगरानी रखने में प्रशासन विफल रहा है. टीना डाबी बाड़मेर की जिला कलेक्टर हैं. उनसे पूछा गया है कि प्रशासनिक स्तर पर कौन-सी सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू थीं और घटना के बाद क्या कार्रवाई हुई. उनका सीधा अपराध नहीं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी में कमी को लेकर उनकी जिम्मेदारी तय की गई है.
अब आगे क्या होगा?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. साथ ही पीड़ित बच्चे का समुचित इलाज और पुनर्वास (Rehabilitation) कराने की डिमांड भी रखी है. आयोग ने जिला प्रशासन से जिले के सभी संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात भी की है. अगर जिला कलेक्टर और एसपी से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो है आयोग सीधे भी हस्तक्षेप कर सकता है. बाड़मेर की यह घटना केवल एक गुरुकुल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है.
Having an experience of 9 years, she loves to write on anything and everything related to lifestyle, entertainment and career. Currently, she is covering wide topics related to Education & Career but she also h...और पढ़ें
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First Published :
August 30, 2025, 13:20 IST