Opinion: छत्तीसगढ़ के बाद अब ओडिशा में भी लाल आतंक का होगा सफाया, बस थोड़ा इंतजार और

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छत्तीसगढ़ के बाद अब ओडिशा में भी लाल आतंक का होगा सफाया, बस थोड़ा इंतजार और

Last Updated:February 18, 2026, 14:17 IST

Odisha Naxalism News: छत्तीसगढ़ के बाद अब ओडिशा में भी नक्सलवाद के अंत की तस्वीर साफ नजर आ रही है. लगातार आत्मसमर्पण, घटती हिंसा और सिकुड़ता प्रभाव क्षेत्र इस बात के संकेत हैं कि राज्य जल्द नक्सल-मुक्त हो सकता है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है. इसे हासिल करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के बाद अब ओडिशा में भी लाल आतंक का होगा सफाया, बस थोड़ा इंतजार औरZoom

ओडिशा में नक्सलवाद का प्रभाव तेजी से घट रहा है. (फाइल फोटो PTI)

Odisha Naxalism News: देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रही लंबी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही यह घोषणा कर चुके हैं कि देश को मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है. धीरे-धीरे देश के अलग-अलग राज्यों से नक्सलवाद का प्रभाव कम होता जा रहा है और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सफलता मिल रही है. जहां आमतौर पर नक्सलवाद की चर्चा में छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश पर ज्यादा ध्यान रहता है, वहीं वर्षों से प्रभावित रहा ओडिशा भी अब नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.

हाल के महीनों में ओडिशा से आ रही खबरें एक बड़े बदलाव का संकेत देती हैं. लगातार आत्मसमर्पण, घटती हिंसा और सिकुड़ता प्रभाव क्षेत्र यह बताता है कि राज्य में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच सकता है. राज्य में सुरक्षा बलों को लगातार सफलता मिल रही है. 6 फरवरी 2026 को कम से कम 15 कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (Maoist) के कैडरों ने आत्मसमर्पण किया. इनमें सबसे वांटेंड माओवादी दंपति निरंजन राउत उर्फ निखिल और उनकी पत्नी अंकिता उर्फ रश्मिता लेंका उर्फ इंदु शामिल थे, जो राज्य समिति सदस्य थे. दोनों पर कुल 1.1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था. यह आत्मसमर्पण रायगढ़ जिले में हुआ.

माओवादियों का घटना प्रभाव

इस समूह ने 14 हथियार भी जमा किए, जिनमें AK-47, SLR, स्टेन गन और INSAS राइफल शामिल हैं. निखिल पिछले दो दशकों से रायगढ़ा, गजपति और कंधमाल के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था. पिछले एक साल में कम से कम 15 केंद्रीय समिति सदस्य मारे गए और छह ने आत्मसमर्पण किया. जानकारी के मुताबिक अब केवल कुछ शीर्ष नेता ही छत्तीसगढ़ और झारखंड में सक्रिय हैं.

(सांकेतिक तस्वीर)

इसी क्रम में 5 फरवरी को कोरापुट में वरिष्ठ महिला कैडर ममता पोडियामी ने आत्मसमर्पण किया, 4 फरवरी को मलकानगिरी में एक एरिया कमेटी कमांडर ने हथियार डाले और 3 फरवरी को सुंदरगढ़ में एक स्थानीय गुरिल्ला स्क्वॉड सदस्य ने सरेंडर किया. सिर्फ 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही 22 नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने सुरक्षा दबाव और पुनर्वास नीति की सफलता को साबित किया है.

आंकड़े बताते हैं कमजोर पड़ता नेटवर्क

साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के अनुसार साल 2000 से अब तक 7,365 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. पिछले साल सुरक्षा बलों ने आठ माओवादियों को मार गिराया और हिंसा में लगातार गिरावट दर्ज की गई. पिछले दो सालों में बड़े हमले नहीं हुए और 2025 में कुल घटनाएं घटकर 39 रह गईं. नागरिक मौतों की संख्या भी ऐतिहासिक रूप से कम रही है.

राज्य के कई जिलों को माओवादी-मुक्त घोषित किया जा चुका है और अब केवल कंधमाल ही मध्यम रूप से प्रभावित माना जाता है. 6 फरवरी को बौध को पूरी तरह माओवादी-मुक्त घोषित किया गया, जबकि कोरापुट और मलकानगिरी को भी नक्सल-मुक्त बताया गया.

फिर भी चुनौतियां बाकी

इंस्टिट्यूट फॉर कन्फलीक्ट मैनेजमेंट के दीपक कुमार नायक के मुताबिक हालांकि तस्वीर सकारात्मक है, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी मौजूद हैं. विकास परियोजनाओं में देरी और सीमावर्ती जंगल क्षेत्रों में आवाजाही सुरक्षा जोखिम बनी हुई है. रिपोर्टों के मुताबिक राज्य में फिलहाल सक्रिय माओवादियों की संख्या 50 से भी कम रह गई है, लेकिन पूरी तरह खतरा खत्म नहीं माना जा सकता.

लक्ष्य अब करीब

लगभग सभी मानकों पर माओवादी प्रभाव लगातार घट रहा है, हिंसा कम हुई है, क्षेत्र सिकुड़ा है और आत्मसमर्पण बढ़े हैं. ऐसे में ओडिशा को मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त घोषित करने का लक्ष्य अब काफी हद तक संभव दिखता है. सुरक्षा अभियान, वित्तीय कार्रवाई और पुनर्वास योजनाओं के दम पर उग्रवाद का अंत अब करीब नजर आता है. छत्तीसगढ़ के बाद ओडिशा में भी खत्म होगा नक्सलवाद?

मार्च 2026 लक्ष्य पर बढ़ती सफलता

ओडिशा में नक्सलवाद का प्रभाव तेजी से घट रहा है. आत्मसमर्पण, कम होती हिंसा और सुरक्षा अभियानों की सफलता से मार्च 2026 तक राज्य को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य संभव नजर आ रहा है.

About the Author

अनूप कुमारएसोसिएट एडिटर

15 साल से सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े हैं. पीएमओ और बीजेपी की खबरों पर खास पकड़ है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले समाचार एजेंसी एएनआई, इंडिया न्यूज, सीएनइबी जैसे संस्थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

First Published :

February 18, 2026, 14:17 IST

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