Su-30MKI में लगा ऐसा ब्रह्मास्त्र, राफेल का भी बन जाएगा बाप, S-400 और आयरन डोम भी रह जाएंगे धरे

1 hour ago

भारतीय वायुसेना (IAF) के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान Su-30MKI को लेकर बड़ा फैसला जल्द होने वाला है. इसके साथ ही इस फाइटर जेट की मारक क्षमता में ऐसा इजाफा हुआ है, जिसने इसे दुनिया के सबसे घातक विमानों की कतार में सबसे आगे ला खड़ा किया है. जहां एक ओर ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड प्रोग्राम को अगले एक-दो महीनों में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर इसमें इजरायल की खतरनाक रैमपेज मिसाइल के इंटीग्रेशन ने दुश्मनों की वायु रक्षा प्रणालियों की नींद उड़ा दी है.

न्यूजप्रेस ने HAL से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि, Su-30MKI के बड़े अपग्रेड प्रोग्राम की तकनीकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. एचएएल, वायुसेना और डीआरडीओ के बीच सभी अहम बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और अब सिर्फ औपचारिक मंजूरी बाकी है. इस योजना के तहत 84 SU-30MKI विमानों को आधुनिक बनाया जाएगा.

यह अपग्रेड इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि Su-30MKI अब भी वायुसेना का सबसे ज्यादा संख्या में मौजूद और सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान है. यह एयर डिफेंस, डीप स्ट्राइक और समुद्री अभियानों में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि, बड़ी संख्या में विमान अपनी सेवा के दूसरे दशक में पहुंच चुके हैं, ऐसे में उन्हें 2040 के बाद तक पूरी तरह सक्षम बनाए रखने के लिए यह अपग्रेड बेहद जरूरी माना जा रहा है. खासकर तब तक जब तक भविष्य के फाइटर जेट जैसे AMCA वायुसेना में शामिल नहीं हो जाते.

Su-30MKI में लगेंगे कौन-कौन से हथियार?

सुपर सुखोई अपग्रेड के तहत Su-30MKI को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा. इसमें लंबी रेंज वाला AESA रडार, नया डिजिटल कॉकपिट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले, वॉइस कमांड सिस्टम, नया IRST सिस्टम, उन्नत सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर और बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर व डेटा-लिंक क्षमताएं शामिल होंगी। इसके अलावा स्वदेशी Astra Mk-1 और Astra Mk-2 जैसी आधुनिक मिसाइलों को भी पूरी तरह इंट्रीगेट किया जाएगा. इस अपग्रेड का बड़ा हिस्सा HAL की नासिक इकाई संभालेगी, जिसे Su-30MKI के निर्माण और ओवरहॉल का लंबा अनुभव है.

इसी बीच Su-30MKI की ताकत में एक और बड़ा इजाफा तब हुआ, जब भारतीय वायुसेना ने इसमें इजरायल की घातक रैमपेज एयर-टू-सर्फेस मिसाइल भी लगाया गया है. यह वही मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था और जिसने दुश्मन के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया.

S-400, THAAD और आयरन डोम कैसे हो जाएंगे फेल?

रैमपेज (Rampage) मिसाइल सुपरसोनिक रफ्तार से उड़ान भरती है और इसका भारी वारहेड किसी भी मजबूत लक्ष्य को तबाह करने में सक्षम है. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मिसाइल को मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए पकड़ना बेहद मुश्किल होता है, जिससे यह S-400, THAAD और आयरन डोम जैसी प्रणालियों को भी चकमा देने में सक्षम मानी जाती है.

रैमपेज मिसाइल के शामिल होने से Su-30MKI की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है. यह मिसाइल पहले ही वायुसेना के Jaguar Darin-III और नौसेना के MiG-29K विमानों में शामिल की जा चुकी है, लेकिन Su-30MKI जैसे भारी और लंबी दूरी तक मार करने वाले फाइटर पर इसका असर कहीं ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है. इसे Su-30MKI में फिट करने के लिए एयरफ्रेम और फायर कंट्रोल सिस्टम में जरूरी बदलाव किए गए हैं.

राफेल के मुकाबले कहां ठहरता है Su-30MKI?

वैसे तो राफेल को एक अत्याधुनिक और मल्टी-रोल फाइटर जेट माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी रेंज, ज्यादा हथियार ढोने की क्षमता, दो इंजन की ताकत और अब रैमपेज जैसी मिसाइलों के साथ SU-30MKI डीप स्ट्राइक और स्टैंड-ऑफ अटैक में कहीं ज्यादा घातक साबित हो सकता है. यही वजह है कि इसे राफेल से भी ज्यादा ताकतवर प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा रहा है.

दिलचस्प बात यह है कि जहां Su-30MKI और MiG-29K रूसी मूल के फाइटर जेट हैं, वहीं Rampage मिसाइल इज़रायल में बनाई गई है. भारत ने 2020-21 में चीन के साथ बढ़े तनाव के दौरान इस मिसाइल की पहली खेप खरीदी थी और तब से यह भारतीय वायुसेना की प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता का अहम हिस्सा बन चुकी है.

कुल मिलाकर, सुपर सुखोई अपग्रेड और रैमपेज मिसाइल का संयोजन Su-30MKI को आधुनिक युद्ध का ऐसा हथियार बना रहा है, जो दुश्मन की सबसे मजबूत वायु रक्षा प्रणालियों को भी बेअसर कर सकता है। यही वजह है कि रक्षा हलकों में इसे भारत के लिए एक रणनीतिक ‘ब्रह्मास्त्र’ के तौर पर देखा जा रहा है.

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