क्या फाइल के चलते ममता बनर्जी होंगी अरेस्ट या ED पर एक्शन? बंगाल में रेड पर क्यों बवाल, I-PAC HC क्यों पहुंचा?

16 hours ago

Last Updated:January 09, 2026, 08:26 IST

ED I-PAC Raid Live: पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसको लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. पहले SIR को लेकर प्रदेश में बवाल मचा था. अब पॉलिटिकल कंसल्‍टेंसी फर्म I-PAC पर ईडी की ओर से की गई छापेमारी को लेकर सियासी पारा हाई हो गया है. मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कमान संभाल ली है.

 क्या फाइल के चलते ममता बनर्जी होंगी अरेस्ट या ED पर एक्शन?ED I-PAC Raid Live: ED की ओर से I-PAC के चीफ प्रतीक जैन के आवास और उनके कार्यालय पर की गई छापेमारी का मसला कलकत्‍ता हाईकोर्ट पहुंच गया है.

ED I-PAC Raid Live: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर गुरुवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया. कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मौके पर पहुंचने से मामला हाईवोल्टेज ड्रामे और गंभीर कानूनी टकराव में बदल गया. अब यह पूरा प्रकरण राज्य बनाम केंद्र की लड़ाई के साथ-साथ अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है. ED ने कलकत्ता हाकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि साल 2020 के कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान उसके अधिकारियों को बाधा का सामना करना पड़ा. जांच एजेंसी का दावा है कि जब I-PAC के सॉल्ट लेक स्थित ऑफिस और लाउडन स्ट्रीट पर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी शांतिपूर्वक और पेशेवर तरीके से चल रही थी, तभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ वहां पहुंचीं. ED के अनुसार, मुख्यमंत्री ने न सिर्फ तलाशी प्रक्रिया में दखल दिया, बल्कि अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी वहां से हटा लीं. अब सवाल उठता है कि क्‍या सरकारी एजेंसियों के काम में बाधा डालने के आरोप में ममता बनर्जी गिरफ्तार हो सकती हैं?

ED ने अपनी हाईकोर्ट में दी गई अर्जी में कहा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत और सबूतों के आधार पर की जा रही थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, जांच का दायरा 2020 में हुए कथित हवाला़ लेन-देन से जुड़ा है, जिसका संबंध कोयला तस्करी और उससे अर्जित धन से बताया जा रहा है. ED का यह भी कहना है कि जांच के दौरान जो सामग्री जब्त की जा रही थी, वह मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों के लिहाज से अहम थी. वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि यह छापेमारी केंद्र सरकार के इशारे पर की गई राजनीतिक कार्रवाई है, जिसका मकसद चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज हासिल करना था. ममता बनर्जी ने दावा किया कि ED उनकी पार्टी के आईटी सेल और चुनावी रणनीति से जुड़े कागजात और हार्ड डिस्क जब्त कर रही थी, जिनका किसी भी वित्तीय जांच से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि वे ऐसे दस्तावेजों को बचाने के लिए ही वहां गई थीं. गुरुवार 8 जनवरी 2025 को घटनाक्रम उस वक्त और तेज हो गया जब मुख्यमंत्री दोपहर करीब 12 बजे प्रतीक जैन के घर पहुंचीं. उनके साथ बाद में कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा भी मौके पर पहुंचे. ममता बनर्जी करीब 20-25 मिनट तक अंदर रहीं और बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक हरे रंग का फोल्डर था. उन्होंने मीडिया के सामने ED अधिकारियों पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि वे अपनी पार्टी के चुनावी दस्तावेज वापस ले आई हैं.

ED अफसरों पर भी FIR

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला और उलझ गया, जब बिधाननगर पुलिस ने छापेमारी टीम में शामिल ED अधिकारियों के खिलाफ कथित आपराधिक धमकी और अवैध प्रवेश के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली. इसे राज्य और केंद्रीय एजेंसी के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है. खास बात यह है कि यह टकराव ऐसे समय पर हुआ है, जब पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बाकी हैं. ED के हाई कोर्ट पहुंचने के जवाब में I-PAC ने भी कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. I-PAC की ओर से ED की कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं और इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया गया है. I-PAC का कहना है कि वह इस मामले में आरोपी नहीं है और छापेमारी के दौरान एजेंसी ने तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया. हाई कोर्ट में इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं.

मामले में ED की क्‍या स्थिति?

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मामले में ED की स्थिति फिलहाल मजबूत मानी जा रही है. जानकारों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय को PMLA की धारा 67 के तहत व्यापक अधिकार मिले हुए हैं, जिसके तहत जांच के दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जा सकते हैं. जब तक राज्य पुलिस यह साबित नहीं कर देती कि ED अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए कार्रवाई की या जानबूझकर कानून का उल्लंघन किया, तब तक उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई टिक पाना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रणव सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री होने के नाते ममता बनर्जी को जांच से कोई संवैधानिक छूट या इम्युनिटी नहीं मिलती. संविधान मंत्रियों को सदन के भीतर विशेषाधिकार देता है, लेकिन कानून के सामने सभी समान हैं. उन्होंने कहा कि यदि ED यह साबित कर दे कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डालते हुए अहम सबूत हटाए हैं, तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मामलों को इसके उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है.

About the Author

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

Location :

Kolkata,West Bengal

First Published :

January 09, 2026, 08:24 IST

homenation

I-PAC Raid: क्या फाइल के चलते ममता बनर्जी होंगी अरेस्ट या ED पर एक्शन?

Read Full Article at Source