US on Chagos deal: हाल में ही ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का फैसला लिया था. हालांकि, ब्रिटेन के इस फैसले को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मूर्खता भरा कदम करार दिया था. ब्रिटेन और मॉरिशस के बीच हुए इस समझौते से दशकों पुराने कानूनी और कूटनीतिक विवाद का अंत हो गया है. इसके अंतर्गत सबसे बड़े द्वीप डिएगो गार्सिया पर स्थित रणनीति अमेरिकी- ब्रिटिश सैन्य अड्डा बना रहेगा, लेकिन अब वह द्वीप मारीशस का हिस्सा होगा. इस डोनाल्ड ट्रंप को एक और डर सताने लगा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाइस को इस बात की चिंता सता रही है कि ब्रिटेन के इस फैसले से अमेरिका चीनी नौकाओं द्वारा जासूसी के खतरे में आ जाएगा. बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों को इस बात का डर सता रहा है कि डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के आसपास के जलक्षेत्र का नियंत्रण जैसे ही चीन के सहयोगी मॉरिशस को सौंपा गया, इसके बाद समुद्र के रास्ते से अमेरिका के खिलाफ जासूसी का रास्ता खुल गया है.
चीन पर जासूसी के आरोप
आम तौर पर बताया जाता है कि चीन की ओर से पड़ोसियों के विशेष आर्थिक क्षेत्रों में जासूसी मिशनों को अंजाम देने के लिए सामान्यतः मछली पकड़ने वाली नावों का इस्तेमाल करता है. आपको जानना चाहिए कि डिएगो गार्सिया की रणनीतिक स्थिति ईरान को हमले की सीमा के भीतर रखती है. इतना ही नहीं यह चौबीसों घंटे लंबी दूरी के बमवर्षक मिशनों के लिए भी यह अनुकूल है. इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि सबसे बड़े द्वीप डिएगो गार्सिया पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नौसैनिक और और बमवर्षक विमान अड्डा है.
किस बात से डर रहा अमेरिका?
द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लुइसियाना के सीनेटर जॉन कैनेडी ने इस पूरे मसले पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर चागोस समूह को सौंपने की योजान आगे बढ़ती है, तो चीन की ओर से किए जा रहे खुफिया अभियानों को रोकना लगभग मुश्किल हो जाएगा. उनका कहना है कि यूनाइटेड किंगडम, डिएगो गार्सिया की चाबियां चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को सौंपे बिना चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को नहीं सौंप सकता.
विश्लेषकों का कहना है कि ब्रिटेन के विपरीत, मॉरीशस विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण चागोस समुद्री संरक्षित क्षेत्र (एमपीए) की रक्षा करने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि देश के पास द्वीपों तक पहुंचने और उनकी निगरानी करने में सक्षम केवल दो जहाज हैं. वहीं, कुछ नेताओं ने यह चेतावनी भी दी है कि चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर जासूसी पोतों को समुद्री क्षेत्र में भेजकर अड्डे के बारे में खुफिया जानकारी जुटा सकता है.

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