बिम्सटेक नेताओं के रात्रिभोज में बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस, भारतीय प्रधानमंत्री मोदी, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली.
थाईलैंड के प्रधानमंत्री द्वारा गुरुवार को BIMSTEC शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित आधिकारिक डिनर की एक तस्वीर ने पूरी दुनिया में सभी का ध्यान खींचा है. थाई प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा द्वारा आयोजित आधिकारिक डिनर में पीएम नरेंद्र मोदी, मोहम्मद यूनुस और नेपाल के पीएम के पी ओली दिख रहे हैं. हसीना सरकार के पतन के बाद यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री मोदी और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री यूनुस अगल-बगल बैठे हुए हैं. नेपाल के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दूसरी बार है जब प्रधानमंत्री मोदी और नेपाली प्रधानमंत्री ओली एक साथ हैं (पहली मुलाकात सितंबर में न्यूयॉर्क में हुई थी).
रणनीतिक तौर पर ये तस्वीर बहुत कुछ कह रही है, क्योंकि नेपाल और बांग्लादेश दोनों की सुर इन दिनों भारत के विरोध में निकल रहे हैं. बहरहाल इस बात पर सस्पेंस है कि पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है. हालांकि भारत सरकार की ओर से द्विपक्षीय वार्ता को लेकर कोई भी औपचारिक बयान नहीं दिया गया है.
थाईलैंड में साथ नजर आए मोदी-यूनुस, बात हुई या नहीं?
बैंकॉक की पीएम पेंटोगोर्टान शिनावात्रा द्वारा आयोजित डिनर समारोह में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस पास-पास बैठे नजर आए. यूनुस के कार्यालय ने कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिसमें चाओ फ्राया नदी के तट पर स्थित होटल ‘शांगरी-ला’ में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख को मोदी के बगल में बैठे देखा जा सकता है. लेकिन जो तस्वारें सामने आई है, उसनें दोनों ही एक दूसरे को नहीं देख रहे हैं. ऐसे में कयास ये लगाए जा रहे हैं कि डिनर के दौरान क्या दोनों के बीच कोई बातचीत हुई या नहीं.
बांग्लादेश की चाहत, पीएम मोदी करे बात
बांग्लादेश ने भारत से गुजारिश की है कि बैंकॉक में पीएम मोदी और यूनुस के बीच द्विपक्षीय बैठक कराई जाए. लेकिन भारत की तरफ से बैठक को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि शुक्रवार को बैठक हो सकती है. पीएम मोदी और यूनुस की मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बांग्लादेश में हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने और वहां अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट आई है. साथ ही पिछले सप्ताह अपने चीन के दौरे पर गए यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर गलत बयानबाजी की है, चीन के सामने खुद को महासागर का ‘संरक्षक’ बताया है. उधर बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक तस्वीर शेयर की गई है जिसमें डिनर टेबल पर दोनों नेता साथ-साथ बैठे दिख रहे हैं. बांग्लादेश में स्थानीय मीडिया ने मुख्य सलाहकार के उप प्रेस सचिव अबुल कलाम आजाद के हवाले से कहा कि दोनों नेताओं ने आधिकारिक डिनर के दौरान एक-दूसरे से मुलाकात की.
पीएम मोदी कर सकते हैं मुलाकात?
बिम्सटेक की अध्यक्षता शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर बांग्लादेश को सौंप दी जाएगी.रोहिंग्या और प्राथमिकता वाले मुद्दों पर मुख्य सलाहकार के उच्च प्रतिनिधि खलीलुर रहमान ने बुधवार को कहा कि बिम्सटेक सदस्य देशों के नेता यूनुस के साथ अपने भविष्य के कार्यों पर चर्चा करेंगे और यूनुस तथा पीएम मोदी के बीच बैठक की गुंजाइश है. थाईलैंड में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से पहले बांग्लादेश में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए रहमान ने कहा, "हमने भारत से यह वार्ता (दोनों देशों के नेताओं के बीच) आयोजित करने का अनुरोध किया है... इस बैठक के आयोजन की पर्याप्त संभावना है."
पिछले सप्ताह पीएम मोदी ने लिखा था लेटर
पिछले सप्ताह, प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर यूनुस को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम को 'साझा इतिहास' बताते हुए आपसी संवेदनशीलता के महत्व पर प्रकाश डाला था.
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा आकांक्षाओं से प्रेरित होकर तथा एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति आपसी संवेदनशीलता के आधार पर इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
दोनों देशों के बीच तनाव
नई दिल्ली मौजूदा अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंतित है. अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से चरमपंथी तत्वों को बरी करने और कई इस्लामवादियों को दोषमुक्त करने के लिए यूनिस शासन की कड़ी आलोचना की गई है. विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कई मौकों पर कहा, "हम एक स्थिर, शांतिपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील बांग्लादेश का समर्थन करते हैं जिसमें सभी मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीकों से और समावेशी और भागीदारीपूर्ण चुनाव आयोजित करके हल किया जाता है. हम बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंतित हैं, जो गंभीर अपराधों के लिए सजा पाए हिंसक चरमपंथियों की रिहाई से और भी बढ़ गई है." बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू और अहमदिया समुदायों के सदस्यों पर हमले लगातार जारी रहने के कारण, विदेश मंत्रालय ने बार-बार इस गंभीर मुद्दे को उजागर किया है और अंतरिम सरकार की जांच को विफल कर दिया है जो अब तक केवल दिखावा है. {इनपुट आईएएनएस से भी}