पूरे देश में बंद होंगे पटाखे... SC में विदेशी फंडिंग का खुलासा, जज बोले- NO

16 hours ago

Last Updated:April 04, 2025, 08:26 IST

Supreme Court Ban on Fire Cracker: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर पटाखों पर लाइफटाइम बैन हटाने से इंकार कर दिया है. पटाखे कंपनी के मालिकों की ओर पेश वकील ने कहा कि लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है. उनके तरफ ...और पढ़ें

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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के प्रतिबंध पर क्या कहा?

Supreme Court Ban on Fire Cracker: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पटाखों को लेकर अपने फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पटाखों पर लगे स्थायी प्रतिबंध को बदलने से इनकार कर दिया. पटाखा निर्माताओं ने कोर्ट का रूख किया था और दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगे प्रतिबंध को सीमित करने की मांग की. बताते चलें कि दिल्ली और हरियाणा ने पहले ही पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान को भी दो हफ्तों के भीतर ऐसा करने का निर्देश दिया है.

हालांकि, याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-NCR में ‘गंभीर’ वायु गुणवत्ता को देखते हुए यह प्रतिबंध “बिल्कुल जरूरी” है. पटाखा निर्माताओं ने कोर्ट 3-4 महीने का ही अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाए या कम से कम ग्रीन पटाखों की अनुमति दी जाए या फिर इस प्रतिबंध को केवल दिल्ली तक सीमित करने की मांग की. हालांकि, उनका कहना था कि इससे जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है.

प्रतिबंध हटाने का सवाल ही नहीं
जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की. उनका कहना था कि ‘प्रतिबंध केवल दिल्ली-NCR में है. कुछ महीनों तक प्रतिबंध सीमित करने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा, क्योंकि प्रतिबंध के बाद भी पटाखों का भंडारण होगा. जब तक पटाखों से प्रदूषण न्यूनतम न हो, प्रतिबंध हटाने का सवाल ही नहीं उठता.’ कोर्ट ने जोर दिया कि स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त हवा में जीने का अधिकार हर नागरिक का है. कोर्ट ने कहा, ‘आम आदमी घर और दफ्तर में एयर प्यूरीफायर नहीं खरीद सकताय बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर रहते हैं. अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य का अधिकार और प्रदूषण-मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार शामिल है.’

2018 के बाद से दिल्ली में बहुत कुछ बदल गया
अदालत की और से दलील दे रहीं वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने बताया कि दीपावली के आसपास हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है. निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ वकील एएनएस नाडकर्णी ने 23 अक्टूबर 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें सामुदायिक ग्रीन पटाखों की अनुमति दी गई थी. लेकिन कोर्ट ने कहा कि 2018 का फैसला पूरे भारत के संदर्भ में था, न कि दिल्ली-NCR की विशेष स्थिति के लिए. कोर्ट ने कहा, ‘2018 के बाद बहुत कुछ बदल गया है. दिल्ली की असाधारण स्थिति को देखते हुए हमने यह प्रतिबंध लगाया.’

पटाखे प्रदूषण के कारण नहीं
हिंदू धर्म रक्षक समूह ने भी प्रतिबंध का विरोध किया था. उनका दावा है कि पटाखे प्रदूषण का कारण नहीं हैं. समूह ने 1985 में वकील-कार्यकर्ता एमसी मेहता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सवाल उठाया. समूह ने आरोप लगाया कि मेहता को “नक्सल गतिविधियों” का समर्थन करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था से फंड मिला था. कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया.

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

April 04, 2025, 08:10 IST

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