भारत में नहीं बल्कि यहां हुआ पतंग का आविष्कार, कैसे इसकी मदद से बना फिर हवाई जहाज

1 hour ago

आसमान में इन दिनों रंगबिरंगी पतंगें खूब उड़ती हैं. मकर संक्रांति के दिन तो यूं भी अपने देश में पतंगबाजी का रिवाज रहा है. हालांकि अब छतों पर पतंगें उड़ती हुई कम दिखती हैं. भारत में राजस्थान के रजवाड़ों में पतंगबाजी का बहुत चाव था. मुगल जब आए तो वो भी पतंगों का आनंद लेते थे. अकबर के बारे में तो कहा भी जाता है कि वो बड़ा पतंगबाज सम्राट था. ये सब देखकर लगता है कि पतंग का आविष्कार तो भारत में ही हुआ होगा लेकिन ऐसा है नहीं. इसे हजारों साल पहले एक पड़ोसी देश में बनाया और उड़ाया गया. इसका वैज्ञानिक महत्व है और तो धार्मिक भी.  ठंड के मौसम में खिली हुई धूप में पतंग उड़ाई जाए तो हेल्थ पर भी इसका पाजिटीव असर होता है. हां बस खतरनाक मांझे से बचकर रहिए.

पतंग का आविष्कार चीन में हुआ था. इसका इतिहास लगभग 2000 साल पुराना है. माना जाता है कि पतंग का पहला निर्माण ईसा पूर्व तीसरी सदी में हुआ. जब एक चीनी दार्शनिक, हुआंग थेग, ने इसे बनाया था. पतंग का जन्म शानडोंग क्षेत्र में हुआ, जिसे “पतंग का घर” भी कहा जाता है.सबसे पहले ज्ञात पतंगें चपटी और आयताकार होती थीं तथा इन्हें रेशम, बांस और अन्य सामग्रियों से बनाया जाता था.

हालांकि ये भी कहा जाता है कि पतंगों का इस्तेमाल मलेशिया, इंडोनेशिया और दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में पत्तियों और नरकट जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बने मछली पकड़ने के उपकरण के रूप में किया जाता था.

पतंग का आविष्कार चीन में ईसा से दो सदी पूर्व हुआ था. (फाइल फोटो)

पतंग का पहला लिखित रिकॉर्ड

पतंग उड़ाने का सबसे पहला लिखित विवरण चीन में 200 ईसा पूर्व में मिलता है, जो पतंग की उत्पत्ति के चीन के दावे का समर्थन करता है. हान राजवंश के चीनी जनरल हान ह्सिन ने एक शहर की दीवारों के ऊपर पतंग उड़ाई, जिस पर वह हमला कर रहा था, ताकि पता लगाया जा सके कि उसकी सेना को सुरक्षा को पार करने के लिए कितनी दूर तक सुरंग बनानी होगी.

13 वीं शताब्दी तक पतंग उड़ाने का प्रचलन चीन से कोरिया और एशिया से होते हुए भारत और मध्य पूर्व तक व्यापारियों के माध्यम से फैल चुका था. प्रत्येक क्षेत्र ने पतंग उड़ाने की एक विशिष्ट शैली विकसित की.

भारत कौन लेकर आया पतंग

भारतीय उपमहाद्वीप में पतंग लाने का श्रेय चीनी यात्रियों फा हेन और ह्यून सांग को दिया जाता है. ये यात्री पतंगों को टिशू पेपर और बांस के ढांचे से बनाकर भारत लाए थे.

पंतग उड़ाने के काम से ही राइट ब्रदर्स को हवाई जहाज बनाने की प्रेरणा मिली. वैसे राइट ब्रदर्स पतंग खूब उड़ाया करते थे. (फाइल फोटो)

क्या प्राचीन भारत में थी पतंग 

हालांकि भारत में पतंग उड़ाना बहुत प्राचीन माना जाता है. तुलसीदास ने राम चरित मानस में इसका जिक्र इस तरीके से किया है कि भगवान राम ने मकर संक्रांति के दिन अपने भाइयों के साथ मिलकर पतंग उड़ाई थी. कृष्ण से जुड़े किस्सों में भी पतंग का जिक्र आया है.

मुगल और पतंगबाजी

अकबरनामा में लिखा है कि सम्राट अकबर खुद पतंग उड़ाते थे. दरबारियों के साथ प्रतियोगिताएं करते थे. उनके महल फतेहपुर सीकरी की छतों को पतंगबाजी के लिए डिजाइन किया गया था. एक मशहूर किस्सा है कि अकबर ने एक बार सोने के धागे वाली पतंग उड़ाई थी. मुगल दरबार में पतंगों का इस्तेमाल गुप्त संदेश भेजने के लिए भी होता था. पतंगों पर संदेश लिखकर या रंगों के कोड से सूचना प्रसारित की जाती थी.

यूरोप तक कैसे पहुंची

13वीं सदी के आसपास यूरोपीय खोजकर्ता मार्को पोलो जब चीन से लौटा तो उसने यूरोप को चीनी पतंगों के बारे में बताया. 14 वीं और 15 वीं शताब्दी के बीच पतंग उड़ाना पूरे यूरोप में फैल गया, जिसका उल्लेख वास्को दा गामा, जियोवानी डेला पोर्टा और विलियम शेक्सपियर ने किया. 16वीं और 17वीं सदी में नाविक जापान और मलेशिया से भी पतंगें लेकर आए. पतंगों को पहले एक अनोखी चीज़ माना जाता था. यूरोपीय संस्कृति पर इसका बहुत कम प्रभाव था.

पतंग नहीं होती तो कई आविष्कार नहीं होते

ये कहना बिल्कुल सही होगा कि अगर पतंगें नहीं होतीं तो कई अहम वैज्ञानिक आविष्कार नहीं हो पाते, जिनका अब हमारे जीवन में खास महत्व है. राइट ब्रदर्स पतंग उड़ाने में माहिर थे. ये उनके कई सालों वर्षों की पतंग उड़ाने का ही नतीजा था कि सीधे तौर पर उनके हवाई जहाज का आविष्कार हुआ। एक दिन किट्टी हॉक में बॉक्स पतंग उड़ाते समय, भाइयों ने पाया कि पतंगों में इतनी ताकत होती है कि वे एक आदमी को ज़मीन से ऊपर उठा सकती हैं.

पहले विश्व युद्ध में सेनाओं ने पतंग का उपयोग कई तरह के संकेतक देने के लिए खूब किया. (फाइल फोटो)

अगस्त 1899 में, उन्होंने एक द्वि-विमान पतंग बनाई, जिसे वार्पिंग पतंग के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने पाया कि पतंग के छोर के पास लगी चार डोरियों की स्थिति को बदलकर, वे उड़ते हुए पक्षी के पंखों के मुड़ने का अनुकरण कर सकते हैं. इस घुमाव को उन्होंने विंग-वार्पिंग लेटरल कंट्रोल कहा, एक ऐसी विधि जो आने वाले वर्षों में राइट के हवाई जहाज की विशेषता बनी रही.

1901 में, अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने अपनी चतुष्फलकीय पतंग का एक प्रारूप विकसित किया, जो एक त्रि-आयामी दृढ़ पतंग थी, जिसे एक साथ जोड़ने पर, पतंग के बड़े होने पर उसे मोटी और मजबूत छड़ियों की आवश्यकता के बिना किसी भी आकार में बनाया जा सकता था.

समय के साथ पतंगों ने कई तरह के बदलावों और आविष्कारों में प्रमुख भूमिका अदा की.

पतंग के आविष्कार ने जो बदलाव किये

– 1752 में, फ्रैंकलिन ने एक पतंग के साथ एक प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि बिजली बिजली के कारण चमकती है.
– पतंग का उपयोग प्रारंभिक समय में सैन्य संदेश भेजने के लिए किया गया, जिससे युद्ध के दौरान संचार में तेजी आई. यह एक प्रभावी तरीका था जिससे सैनिकों ने दूरियों से संदेश भेजे. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पतंगों का उपयोग दुश्मनों पर नज़र रखने और संकेत देने के लिए किया गया.
– पतंगों का उपयोग हवा की दिशा और गति को समझने के लिए किया जाने लगा, जिससे मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिली. ये वैज्ञानिक प्रयोगों का हिस्सा बन गया, जैसे कि बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा किए गए प्रसिद्ध प्रयोग.
– पतंग निर्माण उद्योग ने भी चीन में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया. रेशम और अन्य सामग्रियों से बनी पतंगों की मांग ने नए व्यवसायों और उद्योगों को जन्म दिया.
– पतंगों के माध्यम से हवा की विशेषताओं का अध्ययन किया जाने लगा, जिससे भौतिकी और वायुमंडलीय विज्ञान में नई खोजें हुईं.

पतंगबाजी का भी विज्ञान है

पतंगबाजी के साथ जुड़े विज्ञान के कई पहलू होते हैं, जो इसे न केवल एक मनोरंजक गतिविधि बनाते हैं, बल्कि इसके पीछे की भौतिकी और जीवविज्ञान को भी उजागर करते हैं.
वायु विज्ञान – पतंग उड़ाने के लिए हवा का प्रवाह महत्वपूर्ण होता है. जब हवा पतंग के पंखों पर लगती है, तो यह उसे ऊपर उठाने का कार्य करती है. यह वायुगतिकी (aerodynamics) का एक उदाहरण है, जिसमें हवा की गति और दिशा को समझना आवश्यक होता है.

भौतिकी – पतंग उड़ाने में उठान एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है. जब हवा पतंग के पंखों के ऊपर से गुजरती है, तो यह कम दबाव बनाती है, जिससे पतंग ऊपर उठती है. यह सिद्धांत न्यूटन के तीसरे नियम पर आधारित है, जिसमें क्रिया और प्रतिक्रिया का संबंध होता है.

घर्षण – पतंग उड़ाते समय हवा में घर्षण भी उत्पन्न होता है, जो पतंग की गति को प्रभावित करता है. सही डिज़ाइन और सामग्री का चयन इस घर्षण को कम करने में मदद करता है.

शारीरिक लाभ – पतंग उड़ाने से शारीरिक गतिविधि होती है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाती है. यह हाथों, गर्दन और आंखों की एक्सरसाइज के रूप में कार्य करती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है.

सूर्य की किरणें – मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर पतंग उड़ाने से लोग सूर्य की किरणों के संपर्क में आते हैं, जिससे विटामिन डी का उत्पादन होता है. यह शरीर के लिए जरूरी होता है.

आधुनिक पतंग कैसी 

फाइबरग्लास, कार्बन ग्रेफाइट और रिपस्टॉप नायलॉन जैसी नई सामग्रियों ने पतंगों को अधिक मजबूत और टिकाऊ बना दिया है.

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