UN Humanitarian Affairs Coordinationz Office OCHA: प्रवक्ता हाफिज मोहम्मद यूसुफ़ हम्माद ने कहा कि कपिसा, परवान, दयकुंडी, उरुज़गान, कंधार, हेलमंद, बदघीस, फरयाब, बदख्शां, हेरात और फराह प्रांत इस बाढ़ की वजह से प्रभावित हुए हैं. बाढ़ के चलेत बड़े पैमाने पर संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है. सरकार के मुताबिक लगभग 1859 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए है, तो वहीं करीब 209 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें भी बाढ़ की वजह से बह गईं हैं. इसके अलावा लगभग 1200 पशुओं की मौत हो गई और 13941 एकड़ कृषि भूमि बाढ़ की चपटे में आने से नष्ट हो गई.
ओचा ने शुरू की योजना
प्रवक्ता के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों को भेज दिया गया है, जिससे पीड़ितों को आपात सहायता दी जा रही है और नुकसान का सटीक आंकलन भी किया जा रहा है. वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय की तरफ से मंगलवार को अफगानिस्तान के लिए वर्ष 2026 की 1.71 अरब अमेरिकी डॉलर की योजना शुरू की गई, जिसमें मानवीय जरूरतों और प्रतिक्रिया भी शामिल है. ओचा की तरफ से शुरू की गई ये योजना 2026 में करीब 2.19 करोड़ लोगों की मानवीय सहायता के लिए शुरू की गई है. हालांकि, ये 2025 की तुलना में चार प्रतिशत कम है. लेकिन फिर भी 1.74 करोड़ लोगों के गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने का अनुमान है, जिनमें 47 लाख लोग आपात स्थिति में होंगे.
खाने की आपूर्ति
ओचा के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के मानवीय साझेदार 2026 में जरूरतमंदों में से लगभग सिर्फ 80 प्रतिशत को सहायता प्रदान करेंगे, यानी कि लगभग 1.75 करोड़ लोगों को इसमें प्राथमिकता मिलेगी. ओचा की तरफ से जारी इस राहत सहायता में भोजन, आश्रय से लेकर स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण के अलावा स्वच्छ पानी, स्वच्छता और नकद सहायता भी शामिल होंगी. ओचा का मानना है कि अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है. इसके कुछ अहम कारण जलवायु परिवर्तन से जुड़ा सूखा और बार-बार आने वाली बाढ़ और भूकंप हैं, जिसकी वजह से बीमारियों का प्रकोप, महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षा जोखिम है. साथ ही शरणार्थियों की वजह से हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं.
इनपुट--आईएएनएस
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1 hour ago
