Last Updated:January 05, 2026, 13:30 IST
Pralay Quasi-Ballistic Missile: दुश्मन की एक छोटी गलती और भारतीय सेना के ये 'प्रलय' कहर बनकर टूटेगा. दरअसल, सेना के जखीरे में एक ऐसा हथियार आ गया है, जो ना केवल दुश्मनों के रडार और डिफेंस सिस्ट को चकमा देगा बल्कि इलाके में कहर बरपाएगा. सेना के प्रलय एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल (Quasi-Ballistic Missile) है.
प्रलय क्वासी मिसाइल की खासियत क्या है? (DRDO)India Pralay Quasi-Ballistic Missile: रक्षा क्षेत्र भारत के लिए हमेशा प्राथमिकता रही है. दुश्मनों के खतरे को देखते हुए भारत अपने हथियार को लगातार आधुनिक बनाने के लिए युद्ध स्तर पर लगा हुआ है. भारतीय सेना की सेना की ताकत बढ़ाने में मदद करती है- रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO). बीते साल के अंत DRDO ने भारतीय सेना के लिए एक ऐसे मिसाइल को डेवलप किया है, जो दुश्मनों के इलाके में चुपके से घुसकर ना केवल प्रलय मचाएगी, बल्कि बंकरों, कमांड सेंटरों और एयरबेसों में तबाही मचा सकती है. ये एक ऐसा हथियार है, जो ‘पृथ्वी’ मिसाइल (बैलिस्टिक) और ‘ब्रह्मोस’ (क्रूज) मिसाइल के बीच की खाई पाटने का काम करती थी. इसका मैन्यूवर सिस्टम इतना मजबूत है कि ये एस-400 और पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस सिस्टम भी इसे ट्रैक नहीं कर पाते हैं.
दरअसल, डीआरडीओ 31 दिसंबर 2025 को अपनी सबसे घातक सामरिक मिसाइलों में से एक ‘प्रलय’ (Pralay) का सफल परीक्षण किया. ओडिशा के तट पर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से सुबह करीब 10:30 बजे इस मिसाइल का ‘साल्वो लॉन्च’ (Salvo Launch) किया गया. डीआरडीओ ने एक ही मोबाइल लॉन्चर से एक के बाद एक, दो मिसाइलें बहुत कम अंतराल में दागी गईं. दोनों मिसाइलों ने अपनी सटीक सटीकता (Precision) और मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए सभी लक्ष्यों को भेद दिया.
क्या है ‘प्रलय’ और क्यों कांप रहे हैं दुश्मन?
संस्कृत शब्द ‘प्रलय’ का अर्थ है ‘कयामत’ या ‘महाविनाश’ होता है. यह मिसाइल अपने नाम के अनुरूप ही काम करती है. यह सतह से सतह (Surface-to-Surface) पर मार करने वाली एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) है. इसे विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है. इसकी सफलता का सबसे बड़ा पहलू इसका ‘क्वासी-बैलिस्टिक’ (Quasi-Ballistic) होना है. यही वह तकनीक है जो इसे दुनिया की अन्य मिसाइलों से अलग और बेहद खतरनाक बनाती है. इसे रूस की खतरनाक ‘इस्कंदर’ (Iskander) मिसाइल और चीन की ‘डोंगफेंग-12’ (DF-12) के समकक्ष माना जाता है.
‘क्वासी-बैलिस्टिक’ की खासियत
आम तौर पर, एक बैलिस्टिक मिसाइल का रास्ता (Trajectory) तय होता है. जैसे जब आप पत्थर फेंकते हैं, तो वह एक निश्चित ऊंचाई पर जाकर परवलयाकार (Arc) बनाते हुए नीचे गिरता है. दुश्मन के रडार इस रास्ते को ट्रैक करके यह अंदाजा लगा लेते हैं कि मिसाइल कहां गिरेगी और उसे हवा में ही नष्ट कर देते हैं. लेकिन ‘प्रलय’ एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है. ये लॉन्च होने के बाद हवा में ही अपना रास्ता बदलने में सक्षम है. इसकी नीची ऊंचाई (Low Trajectory) की वजह और अंतिम चरण में चकमा देने (Maneuver) की क्षमता से दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400 या पैट्रियट) आसानी से इंटरसेप्ट नहीं कर पाते.
कुछ खासियत इस प्रकार है-
रास्ता बदलना: यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद अपना रास्ता बदल सकती है. यह हवा में उड़ते हुए ‘फ्लैट ट्रेजेक्टरी’ (सीधा रास्ता) अपनाती है और वायुमंडल से बाहर नहीं जाती. चकमा देना: अपने अंतिम चरण में, जब यह लक्ष्य के करीब होती है, तो यह हवा में ही कलाबाजियां (Maneuver) खा सकती है. रडार को धोखा: चूंकि यह अपना रास्ता बदल सकती है, दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम अनुमान नहीं लगा पाते कि यह कहां गिरेगी. जैसा कि पूर्व स्क्वाड्रन लीडर विजेंदर के. ठाकुर कहते हैं, ‘अगर आप लंबी दूरी पर किसी मिसाइल का रास्ता नहीं जान सकते, तो आप उसे मार नहीं सकते.’ रूस की ‘इस्कंदर-M’ जैसी ताकतएक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रलय’ मिसाइल रूस की प्रसिद्ध ‘इस्कंदर-एम’ (Iskander-M) मिसाइल का भारतीय जवाब है. इस्कंदर मिसाइल ने यूक्रेन युद्ध में अपनी सटीकता और विध्वंसक क्षमता से पूरी दुनिया में खौफ पैदा किया है. उसी तर्ज पर, भारत की प्रलय भी 10 मीटर के दायरे (CEP) में सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. यह रेडियो-फ्रीक्वेंसी इमेजिंग का उपयोग करके अपने लक्ष्य को ढूंढती है और उसे तबाह कर देती है.
पाकिस्तान के लिए सीधा मैसेज
सामरिक दृष्टि से, प्रलय मिसाइल पाकिस्तान की ‘नस्त्र’ (Nasr/Hatf-9) मिसाइल का करारा जवाब है. जहाँ पाकिस्तान की नस्त्र परमाणु क्षमता वाली मिसाइल है, वहीं प्रलय एक पारंपरिक (Conventional) मिसाइल है जो बिना परमाणु युद्ध छेड़ें दुश्मन के अहम ठिकानों को तबाह कर सकती है. ग्लोबलडेटा के डिफेंस एक्सपर्ट हर्षवर्धन डब्बीरू के अनुसार, ‘पश्चिमी सीमा पर तैनात होने के बाद, यह मिसाइल भारत की डीप-स्ट्राइक क्षमता को बढ़ा देगी. पाकिस्तान के पंजाब, सिंध और बलूचिस्तान में स्थित सैन्य अड्डे, कमांड सेंटर और एयरबेस अब भारत की जद में होंगे.
भारतीय सेना का ‘ब्रह्मास्त्र’
इसकी रेंड 150 से 500 किलोमीटर है, जो पृथ्वी बैलेस्टिक मिसाइल (350 किलोमीटर) और पिनाका रॉकेट सिस्टम (90 किलोमीटर) के बीच की खाई को भरती है. इसकी पेलोड क्षमता 350 से 1,000 किलोग्राम तक के हथियार (Warheads) ले जा सकने में सक्षम है. इसमें सब-म्यूनिशन और पेनिट्रेशन (बंकर तोड़ने वाले) वारहेड्स शामिल हैं. ये महज 10 मिनट के भीतर इसे फायर करने के लिए तैयार किया जा सकता है. साथ ही इसे एक 12×12 ट्रक पर दो प्रलय मिसाइलें ले जाई जा सकती हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकती हैं.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
January 05, 2026, 13:30 IST

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