मैं सांप्रदायिक नहीं, पर… फरक्का हिंसा पर TMC विधायक, कहा-SIR नोटिस पर अल्पसंख्यक में गुस्सा

1 hour ago

Farakka Violence Exclusive: पश्चिम बंगाल के फरक्का में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर भड़की हिंसा अब सियासी और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुकी है. इसी बीच फरक्का से तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक मनीरुल इस्लाम का एक बयान चर्चा के केंद्र में आ गया है. ‘राम को छूट, रहीम को नोटिस’ वाले बयान को लेकर उन पर सांप्रदायिक टिप्पणी का आरोप लगा. लेकिन News18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में विधायक ने साफ कहा कि उनका इरादा किसी भी समुदाय को निशाना बनाने का नहीं था. उनके मुताबिक, उन्होंने सिर्फ लोगों की शिकायत अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की थी.

मनीरुल इस्लाम का कहना है कि SIR के तहत जिस तरह से सुनवाई और नोटिस की प्रक्रिया चलाई गई, उसने हालात बिगाड़ दिए. उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को समन भेजे गए, ससे डर और गुस्सा फैला. यही गुस्सा बाद में प्रदर्शन में बदला और स्थिति हिंसा तक पहुंच गई. विधायक का तर्क है कि बयान को संदर्भ से काटकर देखा गया, जबकि असली मुद्दा लोगों की परेशानी थी.

#WATCH | West Bengal | Office of the Block Development Officer, Goalpokher-II, Chaukulia, North Dinajpur, vandalised and torched by mob; Block Development Officer, Goalpokher has filed First Information Report in Chaukulia Police station pic.twitter.com/AcWSg06pxC

‘पहली बार 5,000 से ज्यादा नाम हटाए गए’

News18 से बातचीत में मनीरुल इस्लाम ने बताया कि SIR के दौरान इस बार असामान्य स्थिति बनी. उन्होंने कहा, पहली बार 5,000 से ज्यादा नाम डिलीट किए गए हैं. सुनवाई की प्रक्रिया सुबह 11 बजे शुरू हुई. उसी समय से मुझे फोन आने लगे कि लोगों को परेशान किया जा रहा है. उनके मुताबिक, जब वह करीब 1:30 बजे मौके पर पहुंचे, तब तक लोग प्रदर्शन कर रहे थे और माहौल तनावपूर्ण हो चुका था.

‘राम नाम वालों को छोड़ा गया, रहीम नाम वालों को बुलाया गया’

विधायक ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि शिकायतें क्यों आ रही हैं. इसी दौरान उन्होंने यह बात कही कि जिनका नाम राम है, यानी हिंदू नाम, उन्हें छोड़ा जा रहा है, जबकि रहीम नाम वाले लोगों को बार-बार बुलाया जा रहा है. यही टिप्पणी विवाद की वजह बनी. मनीरुल इस्लाम का कहना है कि यह बयान किसी को भड़काने के लिए नहीं था, बल्कि लोगों की शिकायतों का उदाहरण था.

सांप्रदायिक बयान के आरोप पर सफाई

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका बयान सांप्रदायिक था, तो उन्होंने साफ इनकार किया. मनीरुल इस्लाम ने कहा, मैं सांप्रदायिक नहीं हूं. हालात को सांप्रदायिक बना दिया गया. जिन्हें समन भेजा गया, उनमें ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे. इसलिए नाराजगी स्वाभाविक थी. उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ स्थिति को समझाने की कोशिश की.

भीड़ भड़काने के आरोप को किया खारिज

News18 से बात करते हुए विधायक ने यह भी खारिज किया कि उनके बयान से हिंसा भड़की. उन्होंने कहा, लोग पहले से शिकायत कर रहे थे. मैं उन्हें समझा रहा था और लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने की बात कह रहा था. उनका दावा है कि उन्होंने किसी को भी हिंसा के लिए उकसाया नहीं.

पड़ोसी देशों का जिक्र और राजनीतिक आरोप

बातचीत के दौरान मनीरुल इस्लाम ने बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सरकारें और सिस्टम समय रहते लोगों की बात न सुनें, तो हालात बिगड़ सकते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति के पीछे BJP, MIM और ISF जैसी पार्टियों की भूमिका हो सकती है, हालांकि उन्होंने निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया.

फरक्का और चाकुलिया हिंसा का पूरा मामला

गौरतलब है कि फरक्का में SIR को लेकर प्रदर्शन के दौरान BDO कार्यालय में तोड़फोड़ की गई थी. इसके बाद SIR की सुनवाई रोक दी गई और FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए. इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हुई. इसके एक दिन बाद उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया में भी हिंसा हुई. वहां प्रदर्शनकारियों ने BDO कार्यालय में घुसकर फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सरकारी रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचाया. एक पुलिस अधिकारी घायल हुआ और 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

SIR बना बंगाल में राजनीतिक टकराव का मुद्दा

मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए शुरू किया गया SIR अब पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक फ्लैशपॉइंट बन गया है. TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ वर्गों को परेशान किया जा रहा है और अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है. वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है और कानून के तहत की जा रही है.

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