ये हैं दिल्ली की 5 कातिल सड़कें, जहां टहलते रहते हैं यमराज, करते हैं आपकी एक गलती का इंतजार

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ये हैं दिल्ली की 5 कातिल सड़कें, जहां टहलते रहते हैं यमराज!

Last Updated:February 17, 2026, 11:47 IST

Delhi Dangerous Roads: दिल्ली में पांच ऐसी सड़कें हैं जो कातिल हैं और यहां ज्यादातर लोगों की जान चली जाती है. सिर्फ एक गलती और व्यक्ति हादसे का शिकार हो जाता है. हाल ही में द‍िल्‍ली में ऐसे कई हादसे सामने आए हैं, द‍िल्‍ली के द्वारका में साह‍िल धनैशरा की मौत भी तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से हो गई. दिल्ली की रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, जीटी करनाल रोड, रोहतक रोड और मथुरा रोड राजधानी की सबसे खतरनाक रोड हैं जिन पर 2025 में सबसे ज्यादा जानलेवा हादसे हुए. खास बात है कि यहां पैदल लोगों की मौतें चिंता की बात हैं.

राजधानी दिल्ली की सड़कें लगभग 1,400 किलोमीटर लंबी हैं, लेकिन इस शहर की पांच सड़कें ऐसी हैं जो खूनी सड़कों के नाम से कुख्यात हैं. यहां यमराज टहलते रहते हैं और पलभर में सड़क पर चलता व्यक्ति लाश में तब्दील हो जाता है.हालांकि ये हादसे सभी सड़कों पर नहीं हो रहे बल्कि दिल्ली की पांच ऐसी कातिल सड़कें हैं जहां सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं.

आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में दिल्ली में कुल 1,578 जानलेवा सड़क हादसे हुए. जिनमें से ज्यादातर मौतें इन्हीं 5 सड़कों पर हुईं. इनमें से एक प्रमुख सड़क है दिल्ली का रिंग रोड. 55 किमी लंबी इस सड़क पर पिछले साल में कुल 130 सबसे ज्यादा जानें गई हैं. यहां गाड़ियां तेज रफ्तार में दौड़ती हैं और छोटे से लेकर बड़े तक सभी वाहन चलते हैं. वहीं कई बार लोग पैदल भी इस सड़क को पार करने लगते हैं.

इसके बाद दूसरी सबसे खतरनाक सड़क है आउटर रिंग रोड, यहां एक साल में 113 हादसों में लोगों की मौत हुई. ये सड़क दिल्ली की मुख्य लाइफलाइन मानी जाती है और लगभग 47 किलोमीटर लंबी हैं. ये रिहायशी इलाकों, बाजारों, फैक्ट्रियों और हाईवे को जोड़ती हैं लेकिन चौड़ी सड़कें, लंबे सीधे हिस्से और कई फ्लाईओवर होने की वजह से यहां गाड़ियां तेज चलती हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है.

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तीसरी सबसे खूनी रोड है जीटी करनाल रोड. यहां एक साल में 95 लोगों को यमराज ने उठा लिया. बता दें कि ये सड़कें शहर में एंट्री और एग्जिट का रास्ता हैं. यहां भारी ट्रक, बसें, दोपहिया वाहन और पैदल लोग एक साथ चलते हैं, लेकिन सुरक्षित अलग लेन या इंतजाम यहां नहीं हैं, जिसके चलते लोग वाहनों की चपेट में आ जाते हैं.

चौथी कातिल सड़क रोहतक रोड और पिछले साल में यहां 64 लोगों ने सड़क हादसे जान गंवाई है.सबसे चिंता की बात है कि इन सड़कों पर सबसे ज्यादा पैदल चलने वालों की मौतें हुई हैं. 2025 में रिंग रोड पर 50 पैदल लोगों की जान गई.आउटर रिंग रोड पर 38, जीटी करनाल रोड पर 37, रोहतक रोड पर 25 और विकास मार्ग पर 13 पैदल लोगों की मौत हुई.

पांचवी खूनी सड़क है मथुरा रोड. यहां एक साल में 31 जानलेवा हादसे हुए हैं.विशेषज्ञों का कहना है कि ये सड़कें पहले तेज रफ्तार गाड़ियों के लिए बनाई गई थीं, लेकिन अब इनके किनारे बाजार, बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन और बस्तियां बन चुकी हैं. सुरक्षित जेब्रा क्रॉसिंग या फुटओवर ब्रिज कम होने या लोगों द्वारा उनका इस्तेमाल न करने के कारण लोग सीधे सड़क पार करते हैं, जिससे हादसे होते हैं.

विशेषज्ञों की मानें तो 6 या 8 लेन वाली सड़कों पर लोग खासकर कम ट्रैफिक के समय तेज गाड़ी चलाते हैं. जबकि पैदल वाले लोग भी इन सड़कों को पार करते हैं और सही संकेतों की कमी, पूरे सुरक्षा इंतजाम न होने के कारण हादसों का खतरा बढ़ जाता है. देखा जाता है कि दोपहिया वाहन भी किनारे-किनारे निकलने की कोशिश में अक्सर बड़ी गाड़ियों से टकरा जाते हैं. ये पांच सड़कें दिल्ली की करीब एक तिहाई मौतों की जिम्मेदार हैं.

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First Published :

February 17, 2026, 11:47 IST

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