US Reciprocal tariffs: अमेरिका का टैरिफ बम दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को नए रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की है जिससे कई देशों पर भारी आयात शुल्क लगाया गया. इस फैसले से भारत, यूरोपीय संघ, वियतनाम, जापान और चीन जैसे देशों को बड़ा झटका लगा है. दूसरी तरफ सवाल है कि रूस, कनाडा और उत्तर कोरिया को इस शुल्क से काफी छूट दी गई. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये देश ट्रंप के इस फैसले से कैसे बच निकले.
कनाडा मैक्सिको को क्यों मिली छूट?
असल में कनाडा और मैक्सिको को ट्रंप के नए टैरिफ से छूट जरूर मिली लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे पूरी तरह मुक्त हैं. इन देशों के कुछ उत्पाद पहले से ही 25% शुल्क के दायरे में आते हैं. जो ट्रंप प्रशासन ने फेंटानाइल से जुड़ी चिंताओं के चलते लगाया था. इसके अलावा कनाडा के ऊर्जा और पोटाश उत्पादों पर पहले से ही 10% शुल्क लागू है. इन मौजूदा टैरिफ की वजह से ट्रंप प्रशासन ने नए शुल्क से इन्हें बाहर रखा. हालांकि भविष्य में इन देशों को नई शर्तों के तहत शुल्क का सामना करना पड़ सकता है.
रूस उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों का असर
इसके अलावा रूस और उत्तर कोरिया को ट्रंप के रिसीप्रोकल टैरिफ से छूट मिली है. इसका मुख्य कारण यह है कि ये देश पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में हैं. व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि इन देशों के खिलाफ पहले से मौजूद आर्थिक प्रतिबंध इतने सख्त हैं कि उनके साथ कोई महत्वपूर्ण व्यापारिक लेन देन संभव ही नहीं है. यही कारण है कि इन पर अलग से नया टैरिफ लगाने की जरूरत नहीं पड़ी.
किन देशों पर पड़ी टैरिफ की मार
फिलहाल ट्रंप के नए शुल्क का सबसे ज्यादा असर भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देशों पर पड़ा. भारत पर 26%, यूरोपीय संघ पर 20%, जापान पर 24%, दक्षिण कोरिया पर 25% और वियतनाम पर 46% शुल्क लगाया गया है. चीन को 34% शुल्क का सामना करना पड़ेगा. इस शुल्क को फरवरी में लगाए गए 20% टैरिफ के साथ जोड़ने पर यह कुल 54% तक पहुंच जाता है.
क्या आगे और बढ़ सकते हैं टैरिफ?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि वे चीन पर 60% तक शुल्क लगाएंगे. मौजूदा बढ़ोतरी इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है. हालांकि कई देश इस फैसले से खुश नहीं हैं और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. वहीं मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम गुरुवार को इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने वाली हैं.