Last Updated:January 08, 2026, 18:37 IST
New Road Safety Rules: अब सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मुफ्त होगा. अस्पताल में सात दिनों तक का खर्चा सरकार वहन करेगी. हिट एंड रन केस में मौत पर मुआवजा 25 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा नई ड्राइविंग ट्रेनिंग पॉलिसी और बसों के लिए सख्त सुरक्षा नियम भी लागू किए गए हैं.
सड़क हादसों के मामले में सरकार देगी 7 दिन के मुफ्त इलाज का खर्च.नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ 7 और 8 जनवरी को बड़ी बैठक की है. इस बैठक में ‘जीरो फैटालिटी डिस्ट्रिक्ट’ के लक्ष्य पर गंभीर चर्चा हुई है. सरकार का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकना है. इसके लिए 12 मुख्य मुद्दों पर योजना तैयार की गई है. अब सड़क पर दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति को तुरंत मुफ्त इलाज मिलेगा. यह स्कीम एम्स की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है. प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद इस योजना का जल्द ही उद्घाटन होगा. यह पूरे देश में एक साथ लागू की जाएगी. सरकार ने मुआवजे की राशि में भी भारी बढ़ोतरी की है. इससे गरीब परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी.
क्या अब अस्पताल में सात दिनों तक का इलाज मुफ्त मिलेगा?
सरकार ने कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम की घोषणा की है. इस स्कीम को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया गया था. अब इसे पूरे देश में बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है. यदि किसी भी सड़क पर एक्सीडेंट होता है तो घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाएगा. उसे सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती कराने पर कोई पैसा नहीं देना होगा. सरकार सात दिनों तक के इलाज का पूरा खर्चा खुद उठाएगी. इसके लिए डेढ़ लाख रुपये तक की सीमा तय की गई है. यह सुविधा पूरी तरह कैशलेस होगी. इससे गोल्डन ऑवर में मरीज की जान बचाना आसान हो जाएगा. अस्पताल अब इलाज के लिए पैसे की मांग नहीं कर पाएंगे. सरकार सीधे अस्पतालों को भुगतान करेगी.हिट एंड रन के पीड़ितों को अब कितना मुआवजा मिलेगा?
सरकार ने हिट एंड रन मामलों में मुआवजे के नियमों को बदल दिया है. पहले इन मामलों में सिर्फ 17 प्रतिशत क्लेम ही मिल पाते थे. अब सरकार ने मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ा दिया है. दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को 25 हजार की जगह 2 लाख रुपये मिलेंगे. गंभीर रूप से घायल होने पर मुआवजा 12 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है. इसके साथ ही देश में 22 लाख ड्राइवरों की कमी को दूर किया जाएगा. इसके लिए नई ड्राइविंग ट्रेनिंग पॉलिसी शुरू की गई है. राज्यों में नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे. इससे स्किल्ड ड्राइवर तैयार होंगे जो विदेशों में भी काम कर सकेंगे. यह योजना 25 जनवरी 2025 से शुरू की गई थी.बसों में आग लगने की घटनाओं को कैसे रोकेगी सरकार?
पिछले तीन महीनों में तीन बड़ी बसों में आग लगने से 145 लोगों की जान गई है. गडकरी ने इसके लिए बस बॉडी बिल्डरों पर सख्त नियम लागू किए हैं. अब कोई भी निजी तौर पर बस की बॉडी और सुविधाएं नहीं बना पाएगा. रिवाइज्ड बस कोड को अब पूरी तरह लागू कर दिया गया है. बस बिल्डरों को पहले टाइप-ए सर्टिफाइड होना अनिवार्य होगा. स्लीपर बसें अब केवल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां ही बना सकेंगी. बसों में इमरजेंसी एग्जिट और अलार्म जैसे फंक्शन अनिवार्य होंगे. बसों में हथौड़ा और अन्य सुरक्षा उपकरण भी रखने होंगे. इसके अलावा बसों को दिव्यांग फ्रेंडली बनाया जाएगा. इनमें व्हीलचेयर और हाइड्रोलिक पायदान की सुविधा दी जाएगी. इससे दिव्यांगों का सफर आसान और सुरक्षित होगा.
कबाड़ और पराली से कैसे बदलेगी देश की सड़कों की सूरत?
सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत कई बड़े सुधार किए हैं. इस साल अब तक 3.64 लाख गाड़ियां स्क्रैप की जा चुकी हैं. स्क्रैपिंग पॉलिसी के जरिए सरकार का लक्ष्य 70 लाख रोजगार पैदा करना है. अब कबाड़ से पैसा कमाने का एक नया जरिया शुरू होगा. पुरानी गाड़ियों को नष्ट करने से प्रदूषण कम होगा और नया निवेश आएगा. इसके साथ ही पराली से सड़क निर्माण का काम भी शुरू किया जा रहा है. इससे किसानों को पराली जलाने से मुक्ति मिलेगी और अतिरिक्त कमाई होगी. वाहनों के बीच तालमेल के लिए वी2वी टेक्नोलॉजी लागू की जाएगी. यह सिस्टम फॉग और खराब मौसम में हादसों को रोकने में मदद करेगा. सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से ट्रैफिक का बेहतर कोआर्डिनेशन हो पाएगा.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 08, 2026, 18:36 IST

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