Last Updated:February 20, 2026, 08:24 IST
Kanpur News : हटिया बाजार 100 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है और यहां रंगों का बड़ा थोक कारोबार होता है. होली के सीजन में यहां से तैयार होने वाला गुलाल और अबीर उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और आंध्र प्रदेश तक भेजा जाता है. कई अन्य राज्यों से भी व्यापारी यहां आकर माल खरीदते हैं.

कानपुर: होली का त्योहार नजदीक आते ही शहर का हटिया बाजार पूरी तरह रंगों से भर उठता है. यह बाजार 100 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है और यहां रंगों का बड़ा थोक कारोबार होता है. होली के सीजन में यहां से तैयार होने वाला गुलाल और अबीर उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और आंध्र प्रदेश तक भेजा जाता है. कई अन्य राज्यों से भी व्यापारी यहां आकर माल खरीदते हैं.
पीढ़ियों से चल रहा रंगों का व्यापार
रंग बाजार के व्यापारी अनंत राम गुप्ता ने बताया कि यह बाजार उनके बाप-दादाओं के समय से चला आ रहा है. उनके अनुसार हटिया में उनकी दुकान 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और यहां लंबे समय से रंगों का बड़ा कारोबार होता रहा है. उन्होंने बताया कि पहले हाथ से रंग तैयार होते थे, अब मशीनों और आधुनिक पैकिंग का सहारा लिया जाता है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाता. व्यापारियों के मुताबिक यहां तैयार होने वाला गुलाल और अबीर, अरारोट और खाने वाले रंगों से बनाया जाता है. इससे रंग मुलायम रहते हैं और त्वचा को कम नुकसान पहुंचाते हैं. यही वजह है कि हटिया के रंगों की मांग दूर-दराज के राज्यों तक बनी रहती है.
होली से पहले तेज हो जाती है सप्लाई
होली से करीब दो से तीन सप्ताह पहले ही बाहर से व्यापारी हटिया पहुंचने लगते हैं. कई दुकानों पर सुबह से देर रात तक पैकिंग और लोडिंग का काम चलता है. मजदूर बोरी और पैकेट में गुलाल भरते हैं और ट्रांसपोर्ट के जरिए अलग-अलग प्रदेशों में भेजा जाता है.हटिया रंग बाजार से हर साल बड़ी मात्रा में रंगों की सप्लाई उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में की जाती है. इसके अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और आंध्र प्रदेश के व्यापारी भी यहां से थोक में माल खरीदते हैं. कुछ कारोबारी राजस्थान और दिल्ली तक भी रंग भेज रहे हैं.
होली के साथ जुड़ी परंपरा
होली के करीब आते ही हटिया बाजार में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है. दुकानों के बाहर लाल, गुलाबी, पीले, हरे और नीले रंगों के बड़े ढेर सज जाते हैं. थोक के साथ-साथ खुदरा ग्राहक भी यहां से खरीदारी करते हैं. बाजार की गलियों में दिनभर चहल-पहल बनी रहती है.व्यापारी अनंत राम गुप्ता का कहना है कि होली का सीजन उनके साल भर के कारोबार का अहम हिस्सा होता है. अच्छी बिक्री से ही कई परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है. उनका कहना है कि हटिया का रंग बाजार सिर्फ व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि शहर की पुरानी परंपरा का हिस्सा है.करीब एक सदी से अधिक समय से यह बाजार होली के त्योहार को रंगीन बना रहा है. बदलते समय के साथ कारोबार का तरीका जरूर बदला है, लेकिन हटिया की पहचान आज भी देश के बड़े रंग बाजारों में बनी हुई है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 ...और पढ़ें
Location :
Kanpur,Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
February 20, 2026, 08:24 IST

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