Last Updated:January 20, 2026, 00:42 IST
अगर आप अक्सर नए शहर या देश में ट्रेवल के लिए जाते रहते हैं, और स्टे के लिए होटल लेते हैं, तो आपको चेक इन के नियम तो जरूर पता होंगे. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि होटल दोपहर 12 से 2 बजे तक ही क्यों होता है? यदि नहीं तो चलिए आपको बताते हैं इसके पीछे की कुछ दिलचस्प वजहें-

होटल में चेक इन टाइम के फिक्स होने के पीछे का सबसे पहला कारण हाउसकीपिंग से जुड़ा होता है. इसमें कमरे की साफ-सफाई से लेकर इसे अरेंज करने तक के सभी टास्क शामिल होते हैं. जिससे की गेस्ट आते ही आराम कर सकें.

हाउसकीपिंग- अधिकतर मेहमान सुबह 10 या 11 बजे तक चेक-आउट कर लेते हैं. उनके जाने के बाद सफाई कर्मचारी कमरों की अच्छी तरह सफाई शुरू करते हैं. इसमें सिर्फ झाड़ू-पोंछा ही नहीं होता, बल्कि कमरों को सैनिटाइज करना, चादरें बदलना, बाथरूम साफ करना और जरूरी सामान भरना भी शामिल होता है.

काम को बेहतर तरीके से संभालना- जब सभी होटलों में चेक-इन का समय तय होता है, तो रिसेप्शन स्टाफ, हाउसकीपिंग और मैनेजर अपने काम को आसानी से प्लान कर पाते हैं. जिससे गेस्ट का एक्सपीरियंस अच्छा हो सके.
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मेंटेनेंस- कई बार कमरों में छोटी-मोटी खराबियां तुरंत दिखाई नहीं देतीं. चेक-आउट और चेक-इन के बीच का समय मेंटेनेंस टीम को लाइट, नल, ढीले फिटिंग या खराब उपकरण ठीक करने का मौका देता है. साथ ही सुपरवाइजर कमरे की जांच भी करते हैं.

काम में जल्दबादी से बचने के लिए होटल जल्दी चेक-इन नहीं एक्सेप्ट करते हैं. अगर बहुत ज्यादा जल्दी चेक-इन की इजाजत दी जाए, तो होटल का रोज का काम बिगड़ सकता है. जिससे गेस्ट परेशान हो सकते हैं. इसके साथ ही कमरे में रह रहे गेस्ट को भी रूम खाली करने का पर्याप्त समय मिल जाता है.

इसके अलावा होटल ये भी सुनिश्चित करते हैं, कि एक ही समय पर ज्यादा कमरे खाली और चेक-इन के लिए रेडी हो सके. इससे पूरा सिस्टम मेनेज और कंट्रोल करना मैनेजर के लिए आसान होता है.

तो अगली बार जब भी आप किसी होटल के मैनेजर से जल्दी चेक-इन के लिए रिक्वेस्ट करें और वो आपको वेटिंग रूम में कुछ देर इंतजार करने कहे या सीधे मना करें तो उसकी कंडीशन को समझने की कोशिश करें. ये रूल सिर्फ गेस्ट के बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए फॉलो किए जाते हैं.

1 hour ago
