Last Updated:February 27, 2026, 07:33 IST
Army-Air Force Hypersonic Missile: भारत लगातार ऐसी मिसाइलें डेवलप कर रहा है, ताकि अपनी जमीन से महज एक बटन दबात ही दुश्मन खेमा में हाहाकार मच जाए. चीन और पाकिस्तान की सैकड़ों किलोमीटर लंबी सीमाएं लगती हैं. इन दोनों देशों की नीयत से पूरी दुनिया वाकिफ है, ऐसे में नेवी, आर्मी और एयरफोर्स को सशक्त बनाना जरूरी है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO इस दिशा में महत्वपूर्ण काम कर रहा है.

Army-Air Force Hypersonic Missile: 21वीं सदी में युद्ध का स्वरूप काफी बदल चुका है. पैदल सेना यानी आर्मी की भूमिका पहले के मुकाबले काफी सीमित हो चुकी है. एयरफोर्स और नेवी की भूमिका काफी बढ़ चुकी है. यही वजह है कि भारत युद्धपोत के साथ ही फाइटर जेट डेवलप करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. इसके अलावा कई ऐसी मिसाइल्स बनाई जा रही हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर तक मार करने में सक्षम है. अग्नि सीरीज से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल तक आज के दिन भारत की ताकत बन चुकी हैं. प्रलय से लेकर अस्त्र सीरीज की मिसाइलें इसका उदाहरण हैं. डीआरडीओ अब इस कड़ी में एक और ऐसा महाअस्त्र डेवलप करने में जुटा है, जो पहले ही नेवी की ताकत बन चुकी है. भारतीय वैज्ञानिक लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LRAShM) का नया वेरिएंट डेवलप करने की योजना बना रहे हैं. इसे खासतौर पर आर्मी और एयरफोर्स के लिए तैयार किया जाएगा. LRAShM एक हाइपरसोनिक मिसाइल है. इसकी रफ्तार इतनी तेज है कि पलक झपकते ही दुश्मनों का सफाया कर दे. सामान्य रडार और एयर डिफेंस सिस्टम इस मिसाइल को नहीं पकड़ सकती हैं, लिहाजा इसे काफी खतरनाक माना जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस की मार से पाकिस्तान बिलबिला उठा था. अब LRAShM के सर्फेस-टू-सर्फेस और एयर-टू-सर्फेस वेरिएंट से मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे आतंकी सरगनाओं को उनके बिल में ही ढेर किया जाना संभव हो सकेगा.
भारत के हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम को बड़ी मजबूती देते हुए Defence Research and Development Organisation (डीआरडीओ) ने अपने लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LRAShM) प्रोजेक्ट के विस्तार की पुष्टि की है. अब तक मुख्य रूप से नौसेना की समुद्री जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही यह मिसाइल प्रणाली अब थलसेना और वायुसेना के लिए भी स्पेशल ग्राउंड-स्ट्राइक एवं एयर-लॉन्च वेरिएंट के रूप में तैयार की जाएगी. इस कदम को भारत की सैन्य मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. LRAShM एक अत्याधुनिक बूस्ट-ग्लाइड हाइपरसोनिक वेपन सिस्टम है, जिसे भारत के समुद्री हितों और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया था. यह मिसाइल डबल फेज्ड सॉलिड रॉकेट मोटर से लैस है, जो इसे ऊपरी वायुमंडल तक ले जाती है. निर्धारित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) को छोड़ती है, जो लक्ष्य की ओर तेज गति से उतरता है. LRAShM वेरिएंट की मिसाइल इतनी रफ्तार से अटैक करने में सक्षम है कि दुश्मन के अनुमान लगाने से पहले ही टार्गेट तबाह हो जाएगा.
12000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार
कन्वेंशनल बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत LRAShM एक क्वैसी-बैलिस्टिक ट्रेजेक्टरी अपनाती है. बताया जाता है कि यह मैक 10 (12 हजार KMPH) तक की अधिकतम गति हासिल कर सकती है और उड़ान के दौरान अप्रत्याशित मोड़ व एटमॉस्फेरिक स्किप करती है. इसकी यही विशेषता इसे मौजूदा रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन बना देती है. कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता इसे और अधिक घातक बनाती है. अभी तक इस परियोजना का प्राइमरी फोकस नेवी के लिए कोस्टल बैटरियों से बड़े युद्धपोतों खासकर एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे टार्गेट को निष्क्रिय करने पर था, लेकिन अन्य सेनाओं की बढ़ती रुचि के बाद कार्यक्रम का दायरा विस्तारित किया गया है. इंडियन आर्मी इस व्यापक विकास प्रयास का नेतृत्व कर रही है और वह सतह से सतह पर मार करने वाला ऐसा संस्करण चाहती है, जो दुश्मन के हाई-वैल्यू और सुदृढ़ संरक्षित ठिकानों को निशाना बना सके. यह क्षमता सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक बढ़त प्रदान कर सकती है. Indian Air Force के लिए प्रस्तावित संस्करण जमीन आधारित मॉडल की प्रदर्शन क्षमता से मेल खाएगा. इसे एयर-लॉन्च्ड कर गहरे लक्ष्यों पर अत्यंत तेज और सटीक प्रहार करने की क्षमता विकसित की जा रही है. इससे वायुसेना को हाई-स्पीड डीप-स्ट्राइक विकल्प मिलेगा.
लॉन्ग रेंज एंटी शिप मिसाइल यानी LRAShM के नए वर्जन से राफेल और तेजस जैसे फाइटर जेट को नई ताकत मिलेगी. साथ ही पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठनों के ठिकानों को एक ही झटके में तबाह किया जा सकता है. (फाइल फोटो/Reuters)
प्रलय से कहीं ज्यादा ताकतवर
करीब 12 टन वजनी LRAShM भारत की मिसाइल में एक महत्वपूर्ण खाली स्थान को भरती है. यह Pralay सामरिक मिसाइल की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक ऑपरेशनल रेंज प्रदान करती है. इससे भारत को पारंपरिक (कन्वेंशनल) हथियारों के जरिए भारी सुरक्षा वाले लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता मिलेगी, बिना लंबी दूरी की रणनीतिक (न्यूक्लियर) प्रणालियों का सहारा लिए. समुद्री परिदृश्य में यह मिसाइल मल्टी-लेयर्ड रक्षा कवच से लैस बड़े युद्धपोतों को भेदने के लिए तैयार की जा रही है. इसकी तीव्र गति और अनिश्चित उड़ान मार्ग दुश्मन की इंटरसेप्टर सिस्टम्स को निष्प्रभावी कर सकते हैं. जमीनी अभियानों में इसकी हाइपरसोनिक पैठ और हाई-प्रिसिजन कमांड सेंटर, बंकर और अन्य सुदृढ़ सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को गहराई तक निशाना बनाने में सक्षम होगी. यह क्षमता विशेष रूप से एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) मिशनों के लिए अहम मानी जा रही है.
साझा तकनीक, साझा प्लेटफॉर्म
LRAShM का विस्तार फैमिली ऑफ मिसाइल्स दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है, जिसमें एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म से नेवी, आर्मी और एयरफोर्स तीनों को लाभ मिलेगा. इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास लागत में भी संतुलन आएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पूर्ण रूप से परिचालन में आने के बाद भारत की प्रतिरोधक क्षमता हिंद-प्रशांत क्षेत्र और महाद्वीपीय सीमाओं पर उल्लेखनीय रूप से मजबूत होगी. हाइपरसोनिक तकनीक में यह प्रगति भारत को वैश्विक रक्षा परिदृश्य में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
February 27, 2026, 07:33 IST

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