Last Updated:February 13, 2026, 11:39 IST
OMG Marriage: भारतीय समाज में शादी-ब्याह को काफी पवित्र माना जाता है. विवाह को सात जन्मों का बंधन माना जाता है, पर कई बार दो इंसान के एकसूत्र में बंधने का ऐसा मामला सामने आया है, जिसके बारे में सुनकर हर कोई दंग है. इस पूरे वाकये में कोर्ट की भूमिका काफी अहम रही.

कोलकाता. पॉक्सो एक्ट के तहत 16 महीनों से जेल में बंद 24 वर्षीय युवक को बुधवार को जमानत मिलने के बाद उसने अपनी प्रेमिका से शादी कर ली, जो अब 18 वर्ष की हो चुकी है. शादी बनगांव सब-डिवीजनल कोर्ट परिसर में अदालत की अनुमति से संपन्न हुई. मामले के अनुसार युवक और युवती के बीच तब से संबंध थे, जब लड़की 16 वर्ष और युवक 22 वर्ष का था. इसका मतलब यह हुआ कि किशोरी नाबालिग थी. 7 अक्टूबर 2024 को युवती के परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए युवक पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया था. इसके बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. तब से वह न्यायिक हिरासत में था.
बुधवार को जब मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कल्लोल कुमार दास की अदालत में सुनवाई के लिए आया, तब तक युवती 18 वर्ष की हो चुकी थी. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत में दोनों पक्षों ने बताया कि वे आपसी सहमति से विवाह करना चाहते हैं और साथ में नया जीवन शुरू करना चाहते हैं. युवती के परिजनों ने भी संबंध को स्वीकार करने की बात कही. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद युवक को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी और विवाह की अनुमति प्रदान की. इसके बाद अदालत परिसर में ही दोनों ने विधिवत शादी कर ली.
यूनिक मामला
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो मामलों में सहमति का प्रश्न जटिल होता है, क्योंकि कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के साथ किसी भी प्रकार का शारीरिक संबंध अपराध की श्रेणी में आता है. हालांकि, इस मामले में बालिग होने के बाद युवती की इच्छा और परिवार की सहमति को अदालत ने महत्वपूर्ण माना. फिलहाल जमानत पर रिहा युवक और उसकी पत्नी ने साथ रहने का निर्णय लिया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी.
POCSO Act क्या है?
Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO) 2012 में लागू किया गया एक विशेष कानून है, जिसका मकसद 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देना है. यह कानून लड़के और लड़कियों दोनों पर समान रूप से लागू होता है.
इस कानून के तहत कौन-कौन से अपराध शामिल हैं?
इसके तहत यौन उत्पीड़न, यौन हमला, गंभीर यौन हमला (Aggravated Assault), पोर्नोग्राफी और बच्चों को यौन शोषण के लिए इस्तेमाल करना जैसे अपराध शामिल हैं.
सजा का क्या प्रावधान है?
अपराध की गंभीरता के आधार पर 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है. गंभीर मामलों में कठोर कारावास और जुर्माना दोनों का प्रावधान है.
पीड़ित की पहचान को लेकर क्या नियम हैं?
कानून के तहत पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है. मीडिया को भी नाम या पहचान प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है.
मामलों की सुनवाई कैसे होती है?
POCSO मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का प्रावधान है, ताकि केस का त्वरित निपटारा हो और बच्चे को कम से कम मानसिक आघात पहुंचे. विशेषज्ञों का मानना है कि POCSO Act बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करता है, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
Kolkata,West Bengal
First Published :
February 13, 2026, 11:39 IST

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