17000 KMPH की सुपर स्‍पीड, 400 किलोमीटर तक चट्टानी सुरक्षा, THAAD और आयरन डोम का बाप है यह एयर डिफेंस सिस्‍टम

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17000 KMPH की स्‍पीड, THAAD और आयरन डोम का बाप है यह एयर डिफेंस सिस्‍टम

Last Updated:March 07, 2026, 06:34 IST

India Air Defence System: पड़ोस के साथ ही दुनिया में जिस तरह के हालात पैदा हो रहे हैं, उसमें हर देश अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है. खासकर एरियल अटैक से खुद को बचाने की कोशिश में करोड़ों-अरबों रुपये झोंके जा रहे हैं. भारत अपने एयर डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने में जुटा है. यही वजह है कि देश का सुरक्षा अमला रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की पांच और यूनिट खरीदने की प्‍लानिंग कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूसी S-400 ट्रायंफ ने अपनी क्षमताओं से सबको चकित कर दिया था.

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दुनियावी हालात को देखते हुए भारत S-400 की पांच और यूनिट खरीदने पर विचार कर रहा है, ताकि एयरस्‍पेस को अभेद्य किला बनाया जा सके. (फाइल फोटो/Reuters)

India Air Defence System: अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ईरान पर अटैक किया है, उससे कई तरह के गंभीर सवाल उठे हैं. UN की बेबसी और ग्‍लोबल सिस्‍टम का पंगु होना सबसे बड़ी चिंता बन गई है. वहीं, सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने टेंशन को और भी बढ़ा दिया है. ईरान पर अटैक कितना जायज और नाजायज है यह एक बात है, दूसरा सवाल यह है कि क्‍या कोई भी शक्तिशाली देश अपने से कमजोर देश पर आक्रमण करने के लिए स्‍वतंत्र है? क्‍या हर देश के लिए अब सेल्‍फ डिफेंस पहले और दूसरे विश्‍वयुद्ध के समय से भी ज्‍यादा अहम हो गया है? जापान से लेकर यूरोप तक ने डिफेंस सेक्‍टर का बजट बढ़ा दिया है. भारत के पड़ोस में दो ऐसे दुश्‍मन (चीन और पाकिस्‍तान) घात लगाकर बैठे हुए हैं, जिनके साथ पहले भी युद्ध हो चुके हैं. मौजूदा हालात में भारत के लिए जरूरी हो गया है कि सेल्‍फ डिफेंस और अटैक दोनों मोर्चों पर खुद को मजबूत बनाया जाए, ताकि टू-फ्रंट वॉर लाइक सिचुएशन से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके. इस दिशा में लगातार कदम भी उठाए जा रहे हैं. वर्तमान स्थिति को देखते हुए वैसे तो कई मोर्चों पर तैयारियों को धार दिया जा रहा है, पर एयर डिफेंस फोकस में है. इसे देखते हुए भारत ने सुर्दशन चक्र प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसके साथ ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपाने जौहर से पूरी दुनिया को हैरत में डालने वाले रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की अतिरिक्‍त यूनिट खरीदने पर भी विचार चल रहा है. भारत पहले से ही पांच S-400 के लिए रूस से डील कर रखा है, जिनमें से तीन यूनिट मुहैया करा दी गई है. साल के अंत तक बाकी की दो यूनिट भी देने का वादा किया गया है. बता दें कि भारत की यह योजना ऐसे समय सामने आई है, जब ईरानी अटैक में अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्‍टम THAAD की कई यूनिट्स तबाह हो गई हैं. दिलचस्‍प है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 को पाकिस्‍तानी मिसाइल्‍स या ड्रोन छू भी नहीं पाए थे, जबकि रूसी सिस्‍टम ने पड़ोसी देश को गहरा जख्‍म दिया था.

भारत अपनी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. भारतीय वायुसेना के प्रस्ताव पर रक्षा खरीद बोर्ड ने रूस निर्मित अत्याधुनिक S-400 Triumf Air Defence System की 5 अतिरिक्त यूनिट खरीदने को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है. यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है तो भारत के पास कुल 10 S-400 स्क्वाड्रन हो जाएंगे, जिससे देश का एयर डिफेंस कई गुना मजबूत हो जाएगी. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई. अब यह प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के पास एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी के लिए जाएगा. इसके बाद लागत पर बातचीत होगी और अंत में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही सौदा औपचारिक रूप से पूरा होगा. भारत पहले ही रूस के साथ 2018 में 5.43 अरब डॉलर का बड़ा समझौता कर चुका है, जिसके तहत पांच एस-400 सिस्टम खरीदने का निर्णय लिया गया था. इस सौदे के तहत अब तक तीन स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि शेष दो की आपूर्ति इसी वर्ष तक पूरी होने की उम्मीद है. हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण डिलीवरी में कुछ देरी हुई, लेकिन रूस ने धीरे-धीरे इनकी आपूर्ति जारी रखी है.

S-400 vs THAAD: कौन कितना ताकतवर?

S-400THAAD
600 किमी तक की लंबी रडार डिटेक्शन क्षमता: रूस का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम S-400 ट्रायम्फ बेहद शक्तिशाली रडार तकनीक से लैस है. यह सिस्टम लगभग 600 किलोमीटर तक के दायरे में दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को पहचान सकता है. इतनी लंबी दूरी पर निगरानी की क्षमता इसे आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों में बेहद प्रभावी बनाती है.‘हिट-टू-किल’ तकनीक से इंटरसेप्शन: टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) प्रणाली बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में नष्ट करने के लिए हिट-टू-किल तकनीक का उपयोग करती है. इसमें पारंपरिक विस्फोटक वारहेड नहीं होता, बल्कि मिसाइल सीधे लक्ष्य से टकराकर उसे नष्ट कर देती है, जिससे इंटरसेप्शन अधिक सटीक और प्रभावी माना जाता है.
400 किमी तक दुश्मन के टारगेट को मार गिराने की क्षमता: S-400 की इंटरसेप्शन या एंगेजमेंट रेंज करीब 400 किलोमीटर तक है. इसका मतलब है कि यह लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल या ड्रोन जैसे हवाई लक्ष्यों को काफी दूर से ही नष्ट कर सकता है, जिससे दुश्मन के हमले को सीमा तक पहुंचने से पहले ही रोकना संभव हो जाता है.लंबी दूरी और ऊंचाई पर मार करने की क्षमता: THAAD की इंटरसेप्टर मिसाइल 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को भेद सकती है और लगभग 150 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर इंटरसेप्शन करने में सक्षम है. इसकी रफ्तार मैक-8 (तकरीबन 10000 किलोमीटर प्रति घंटा) से भी ज्यादा होती है, जिससे यह तेजी से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम बनती है.
हाइपरस्पीड टारगेट को भी इंटरसेप्ट करने में सक्षम: यह सिस्टम बेहद तेज गति से आने वाले टारगेट को भी निशाना बना सकता है. S-400 मैक-14 (17000 KPH की स्‍पीड) तक की गति से आने वाले लक्ष्यों को इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखता है. इसी वजह से यह बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरनाक हथियारों के खिलाफ भी प्रभावी रक्षा प्रदान करता है.एडवांस AN/TPY-2 X-Band रडार: इस प्रणाली में अत्याधुनिक AN/TPY-2 X-Band रडार का इस्तेमाल किया जाता है, जो लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने और उनकी ट्रैकिंग करने में सक्षम है. यह रडार लक्ष्य की दिशा, गति और संभावित प्रहार क्षेत्र का सटीक आकलन कर इंटरसेप्टर मिसाइल को मार्गदर्शन देता है.
एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता: S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट क्षमता है. यह सिस्टम एक साथ 80 से 300 तक लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और कई टारगेट पर एक साथ मिसाइल दाग सकता है. इससे बड़े पैमाने पर होने वाले हवाई हमलों को भी रोका जा सकता है.एक बैटरी में कई लॉन्चर और मिसाइलें: THAAD की एक मानक बैटरी में छह ट्रक माउंटेड लॉन्चर होते हैं. प्रत्येक लॉन्चर में आमतौर पर आठ इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं, यानी एक बैटरी में कुल 48 मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं. इसके अलावा इसमें टैक्टिकल ऑपरेशन सेंटर (TOC) और लगभग 95 सैनिकों की टीम संचालन के लिए तैनात रहती है.
अत्यधिक मोबाइल और मल्‍टीरोल सिस्‍टम: S-400 पूरी तरह मोबाइल प्लेटफॉर्म पर आधारित है और 8×8 पहियों वाले भारी वाहनों पर तैनात होता है. इसे मार्चिंग मोड से सिर्फ 5 से 10 मिनट में तैनात किया जा सकता है. यह लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे अलग-अलग प्रकार के हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है.हाई मोबिलिटी और अन्य रक्षा प्रणालियों से समन्वय: THAAD को अत्यधिक मोबाइल बनाया गया है और इसे ट्रक या सैन्य विमान के जरिए तेजी से कहीं भी तैनात किया जा सकता है. यह प्रणाली अन्य मिसाइल रक्षा नेटवर्क जैसे पैट्रियट, एजिस और C2BMC कमांड सिस्टम के साथ भी एकीकृत होकर बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा कवच तैयार करती है.

फाइटर जेट, मिसाइल, ड्रोन का काल

भारतीय वायुसेना S-400 सिस्टम को दुनिया के सबसे उन्नत वायु रक्षा प्लेटफॉर्म में से एक मानती है. S-400 एक लंबी दूरी की मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जो लगभग 400 किलोमीटर तक के दायरे में दुश्मन के विमान, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन को निशाना बना सकती है. यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखती है, जिससे यह आधुनिक युद्ध में अत्यंत प्रभावी साबित होती है. सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष हुए सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस प्रणाली की प्रभावशीलता देखने को मिली. उस दौरान भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने कथित तौर पर पाकिस्तान के कुछ लड़ाकू विमानों, एक निगरानी विमान तथा कई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी पर ही निष्क्रिय कर दिया था. इस वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में मिली सफलता ने वायुसेना को इस सिस्टम का दायरा बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है. दूसरी ओर पाकिस्तान ने अपने वायु रक्षा नेटवर्क में चीन निर्मित HQ-9 air defence system को शामिल किया है. भारतीय सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि हालिया सैन्य टकराव में यह प्रणाली भारतीय हमलों के सामने अपेक्षाकृत कमजोर साबित हुई. इस तुलना ने S-400 की क्षमता को और अधिक रेखांकित किया है.

बैटल फील्‍ड में रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम अमेरिकी THAAD और इजरायली आयरन डोम से कहीं ज्‍यादा इफेक्टिव साबित हुआ है. (फाइल फोटो/Reuters)

मौजूदा हालात में बड़ी जरूरत

वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य भी भारत को अपनी वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों ने यह दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, स्वार्म अटैक और लंबी दूरी की मिसाइलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. कम लागत वाले ड्रोन और लुटेरिंग म्यूनिशन को रोकना कई देशों के लिए चुनौती बन गया है. ऐसे में S-400 जैसी मल्‍टीलेयर डिफेंस सिस्‍टम इन खतरों से निपटने में उपयोगी साबित हो सकती है. भारत के लिए चुनौती केवल पश्चिमी सीमा तक सीमित नहीं है. चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बढ़ती सैन्य तैनाती और पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं में बढ़ोतरी के कारण भारत को दो-मोर्चे के संभावित खतरे का सामना करना पड़ रहा है. यदि देश के विभिन्न हिस्सों में 10 S-400 स्क्वाड्रन तैनात हो जाते हैं तो इनके जरिए ‘ओवरलैपिंग किल जोन’ बनाना संभव होगा, जिससे प्रमुख एयरबेस, बड़े शहरों और सामरिक प्रतिष्ठानों को बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी.

लॉन्‍ग टर्म प्‍लानिंग

भारत की दीर्घकालिक रणनीति बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की है. S-400 इस नेटवर्क की सबसे ऊपरी और लंबी दूरी की परत के रूप में काम करेगा. इसके साथ भारत के स्वदेशी सिस्टम जैसे Akash-NG, MRSAM और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का Project Kusha भी शामिल होंगे. इन सभी प्रणालियों को इंटीग्रेटेड नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि हाइपरसोनिक हथियारों से लेकर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन तक हर प्रकार के खतरे से निपटा जा सके. हालांकि, यदि रूस से अतिरिक्त S-400 की आपूर्ति में देरी होती है, तो भारत स्वदेशी विकल्पों पर भी अधिक जोर दे सकता है. डीआरडीओ का प्रोजेक्ट कुश इसी दिशा में विकसित किया जा रहा है, जिसके परीक्षण जल्द शुरू होने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के पास 10 S-400 स्क्वाड्रन हो जाते हैं तो उसकी वायु रक्षा क्षमता रूस और चीन जैसे देशों के स्तर के करीब पहुंच जाएगी. यह कदम केवल सैन्य शक्ति बढ़ाने का नहीं बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और संभावित दो-मोर्चा खतरे के खिलाफ मजबूत प्रतिरोध क्षमता तैयार करने का संकेत भी माना जा रहा है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

March 07, 2026, 06:32 IST

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