40 हजार की लगात 2,50000 की कमाई, एक आइडिया औक किसान की बन गई जिंदगी, बड़ा तालाब बना गांव की समृद्धि का आधार

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Last Updated:February 22, 2026, 10:05 IST

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला के कुचाई प्रखंड अंतर्गत जिलिंगदा गांव का 'बड़ा तालाब' केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि गांव की धड़कन है. करीब 200 घरों की जिंदगी इससे जुड़ी है. मालिक महेश मिंज के अनुसार, यह आस्था और आजीविका का आधार है. हर पूजा-अनुष्ठान में यहीं का पवित्र जल लिया जाता है. वह इसमें रुई, कतला और छोटा झींगा मछली पालन करते हैं.

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तालाब के मालिक महेश मिंज

जमशेदपुर. झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड अंतर्गत जिलिंगदा गांव में एक ऐसा तालाब है, जिसे लोग “बड़ा तालाब” कहते हैं. यह सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि पूरे गांव की धड़कन है. करीब 200 घरों की जिंदगी इस तालाब से जुड़ी हुई है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पीढ़ियों से यह तालाब लोगों की प्यास बुझा रहा है और आज भी उतनी ही मजबूती से खड़ा है.

तालाब के मालिक महेश मिंज बताते हैं कि यह जलाशय गांव के लिए आस्था और आजीविका दोनों का आधार है. पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए इसी तालाब का जल लिया जाता है. गांव में जब भी कोई धार्मिक अनुष्ठान होता है, तो सबसे पहले बड़ा तालाब से जल भरकर लाया जाता है. यही कारण है कि लोग इसे पवित्र मानते हैं.

सिंचाई की जरूरतों को पूरा कर रहा तलाब
सुविधाओं की बात करें तो तालाब में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्नान घाट बनाए गए हैं. चारों ओर सीमेंट के मजबूत पथ बने हैं, जिससे लोग और पशु आसानी से पानी तक पहुंच सकें. जानवरों के लिए भी अलग से उतरने की व्यवस्था है, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो. यह व्यवस्था गांव की सामूहिक सोच और समझदारी को दर्शाती है.

खेती के लिए भी यह तालाब वरदान साबित हो रहा है. इसमें पानी निकासी के दो अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं, जिनसे खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है. गर्मी के दिनों में जब दूसरे स्रोत सूखने लगते हैं, तब भी यह तालाब गांव की सिंचाई जरूरतों को पूरा करता है. खास बात यह है कि यह तालाब कभी पूरी तरह सूखता नहीं. बारिश होते ही कुछ ही दिनों में यह लबालब भर जाता है.

40 हजार की लगात से लाखों की कमाई
महेश मिंज ने इस तालाब को आय का साधन भी बना लिया है. वह इसमें रुई, कतला और छोटा झींगा मछली पालन करते हैं. मात्र 40 हजार रुपये की लागत से वह करीब ढाई लाख रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं. इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी मछली पालन के लिए प्रेरणा मिली है.

जिलिंगदा का बड़ा तालाब आज एक मिसाल बन चुका है. यह दिखाता है कि अगर संसाधनों का सही उपयोग किया जाए तो एक साधारण तालाब भी पूरे गांव की किस्मत बदल सकता है. यही वजह है कि गांव के लोग इसे सिर्फ तालाब नहीं, बल्कि अपनी किस्मत और समृद्धि का प्रतीक मानते हैं.

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Mohd Majid

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Location :

Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand

First Published :

February 22, 2026, 10:05 IST

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