62 लाख नाम कटे, 60600 पर लटकी तलवार, बांग्लादेश से लगे जिलों पर EC की पैनी नजर, ममता दीदी की फूलीं सांसे

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बंगाल में 60600 पर लटकी तलवार, इन जिलों पर EC की पैनी नजर, ममता की फूलीं सांसे

Last Updated:March 01, 2026, 19:26 IST

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के मतदाता सूची संशोधन (SIR) अभियान ने बड़ा सियासी भूचाल ला दिया है. राज्य में 60 लाख से ज्यादा वोटरों का सत्यापन अभी भी अटका हुआ है. इनको 'अंडर एडजुडिकेशन' श्रेणी में रखा गया है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मुस्लिम बहुल और बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों मुर्शिदाबाद और मालदा का है. यहां सबसे ज्यादा मतदाताओं के दस्तावेजों पर शक की सुई है. एसआईआर के बाद कुल मतदाताओं की संख्या में 8.30 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

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बंगाल में 60 लाख से अधिक वोटरों पर लटकी तलवार. (एआई इमेज)

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘वोटर लिस्ट’ को लेकर एक नया और बेहद दिलचस्प ‘खेला’ शुरू हो गया है. चुनाव आयोग द्वारा राज्य में चलाए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी विशेष मतदाता सूची संशोधन अभियान के बाद जो अंतिम आंकड़े सामने आए हैं, उसने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की रातों की नींद उड़ा दी है. राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट से लाखों नाम गायब हैं और 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (सत्यापन और न्यायिक समीक्षा के अधीन) की लटकती तलवार के नीचे रखे गए हैं.

इस पूरी कवायद में जो सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात है, वह यह है कि जिन वोटरों के दस्तावेजों का सत्यापन अभी लंबित है, उनमें सबसे बड़ी संख्या मुस्लिम बहुल जिलों की है. ये वो जिले हैं जिनकी सीमाएं सीधे तौर पर बांग्लादेश से सटी हुई हैं. अधिकारियों के मुताबिक, पूरे राज्य में 60.06 लाख मतदाता ‘अंडर एडजुडिकेशन’ मार्क किए गए हैं. इनमें से अकेले मुर्शिदाबाद जिले में सबसे ज्यादा 11.01 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच पेंडिंग है. दूसरे नंबर पर मालदा जिला है, जहां 8.28 लाख मतदाताओं की पहचान अभी भी अधर में लटकी है.

और किन जिलों पर लटकी तलवार

इन दोनों जिलों के अलावा, जिन अन्य जिलों में ऐसे मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है, उनमें उत्तर दिनाजपुर (4.80 लाख), पूर्व बर्दवान (3.65 लाख), हावड़ा (2.89 लाख), नादिया (2.67 लाख) और बीरभूम (2.02 लाख) शामिल हैं. दक्षिण बंगाल के उत्तर 24 परगना में 5.91 लाख और दक्षिण 24 परगना में 5.22 लाख मतदाताओं के नाम भी इसी पेंडिंग लिस्ट में हैं. दिलचस्प बात यह है कि कलिम्पोंग और झाड़ग्राम जैसे जिलों में ऐसे ‘संदिग्ध’ मतदाताओं की संख्या सबसे कम है.

8.30 फीसदी सिकुड़ी वोटर लिस्ट

एआईआर अभियान शुरू होने से पहले पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 थी. जब ड्राफ्ट रोल (प्रारूप सूची) जारी हुआ, तो यह आंकड़ा गिरकर 7 करोड़ 8 लाख 16 हजार 630 रह गया. यानी ड्राफ्ट स्टेज पर ही करीब 58 लाख नाम उड़ा दिए गए. अब जो शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई है, उसमें मतदाताओं की कुल संख्या सिमटकर महज 7 करोड़ 4 लाख 59 हजार 284 रह गई है. कुल मिलाकर राज्य की वोटर लिस्ट 8.30 प्रतिशत सिकुड़ गई है और लगभग 62 लाख नाम हमेशा के लिए हटा दिए गए हैं.

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल के लिए यही अंतिम मतदाता सूची है. लेकिन लॉजिकल विसंगतियों (Logical discrepancies) वाले लगभग 61 लाख मामलों की न्यायिक अधिकारियों द्वारा बारीकी से समीक्षा की जा रही है. एक अधिकारी ने बताया कि ‘जिन वोटरों को अंडर एडजुडिकेशन रखा गया है, उनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कोई भी योग्य व्यक्ति न छूट जाए.’ समीक्षा के बाद अगर दस्तावेज सही पाए गए तो इन्हें सप्लीमेंट्री लिस्ट (पूरक सूची) के जरिए जोड़ा जाएगा, अन्यथा ये नाम हमेशा के लिए डिलीट कर दिए जाएंगे.

ममता दीदी का फूटा गुस्सा

वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर चली इस कैंची ने बंगाल में एक नए राजनीतिक युद्ध को जन्म दे दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पूरी प्रक्रिया से खासी नाराज हैं. उनका मानना है कि इस संशोधन की आड़ में जानबूझकर एक खास वर्ग के वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है. ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आशंका जताई है कि राज्य से एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम गुपचुप तरीके से हटा दिए गए हैं.

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Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें

Location :

Kolkata,West Bengal

First Published :

March 01, 2026, 19:26 IST

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