Last Updated:February 13, 2026, 13:55 IST
AI Summit India 2026 Education: अगले हफ्ते होने वाले एआई समिट को लेकर देशभर में उत्साह है. उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने कहा कि एआई रटने वाली शिक्षा व्यवस्था को खत्म कर छात्रों में सवाल पूछने की आदत बढ़ाएगा. जानें कैसे शिक्षा मंत्रालय 1000 संस्थानों के साथ मिलकर देश का भविष्य बदल रहा है.

नई दिल्ली (AI Summit India 2026 Education). अगले हफ्ते भारत में एक बहुत बड़ा ‘AI समिट’ होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरे देश में तैयारियां जोरों पर हैं. शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह समिट भारत के भविष्य और पढ़ाई-लिखाई के तरीके को बदलने के लिए बहुत जरूरी है. इस कार्यक्रम की शुरुआत के तौर पर 12 फरवरी को देश के करीब 1000 कॉलेजों और स्कूलों में खास प्रोग्राम किए गए, जिससे छात्र और शिक्षक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अच्छी तरह समझ सकें.
उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने कहा है कि अब तकनीक हर क्लासरूम का हिस्सा बनेगी. इस पहल का मुख्य मकसद है कि छात्र सिर्फ किताबों में लिखा रटने के बजाय चीजों को समझना शुरू करें. भारत सरकार ‘भारत बोधन समिट’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार ला रही है. विनीत जोशी के मुताबिक, AI के आने से छात्र बिना किसी डर के सवाल पूछ सकेंगे. यह एआई समिट न केवल शिक्षा के लिए बल्कि रिसर्च, स्टार्टअप और नए आइडियाज के लिए भी नई राह दिखाने वाला साबित होगा.
AI समिट: शिक्षा में क्रांति की तैयारी
भारत अगले हफ्ते आयोजित होने वाले ऐतिहासिक AI समिट के लिए पूरी तरह तैयार है. उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने इस समिट को भारतीय शिक्षा तंत्र के लिए बड़ा मोड़ बताया है. उनका कहना है कि आज के दौर में तकनीक के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है और AI वह ताकत है, जो हमारे शिक्षा तंत्र को पूरी तरह बदल सकती है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए 12 फरवरी को देशभर के 1000 संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम किए गए, जिससे एआई पर चर्चा शुरू हो सके.
रटने की आदत पर लगेगी लगाम
विनीत जोशी ने एक पुरानी समस्या की तरफ इशारा करते हुए कहा कि लंबे समय से भारतीय छात्र रटने की पद्धति (मैकाले सिस्टम) के शिकार रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार इस बात पर जोर दिया है कि बच्चों को रटने की आदत छोड़कर सवाल पूछने की आदत डालनी चाहिए. अक्सर क्लासरूम में बच्चे टीचर से सवाल पूछने में डरते हैं कि कहीं उनका सवाल गलत न हो. लेकिन AI के साथ ऐसा नहीं है. छात्र किसी भी समय, बिना किसी झिझक के अपना सवाल पूछ सकते हैं और एआई उन्हें तुरंत सही जवाब दे देगा.
सिर्फ पढ़ाई नहीं, रिसर्च में भी मिलेगा साथ
एआई का रोल सिर्फ होमवर्क या क्लास तक सीमित नहीं रहेगा. उच्च शिक्षा सचिव के मुताबिक, रिसर्च (शोध), इनोवेशन और स्टार्टअप की दुनिया में भी एआई बड़ा बदलाव लाएगा. जब इंडस्ट्री और कॉलेज मिलकर एआई का इस्तेमाल करेंगे तो छात्रों को प्रैक्टिकल जानकारी ज्यादा मिलेगी. इससे न केवल उनकी समझ बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में नौकरी पाने और खुद का काम शुरू करने में भी बड़ी मदद मिलेगी.
चुनौतियां और शिक्षकों की भूमिका
एआई के जितने फायदे हैं, उतनी ही चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ा डर यह है कि छात्र कहीं खुद सोचना बंद न कर दें और पूरी तरह मशीन पर निर्भर न हो जाएं. विनीत जोशी ने साफ किया कि हमें बच्चों को एआई का ‘संतुलित’ इस्तेमाल सिखाना होगा. इसके लिए सबसे पहले शिक्षकों को ट्रेनिंग देना जरूरी है. अगर टीचर खुद एआई के बारे में जानेंगे, तभी वे बच्चों को इसके सही और गलत इस्तेमाल के बीच का फर्क समझा पाएंगे.
NEP 2020 और विकसित भारत का सपना
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में पहले ही बता दिया गया था कि भविष्य में शिक्षा और तकनीक का गहरा रिश्ता होगा. भारत अगर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहता है तो उसे अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी ‘ज्ञान’ को तकनीक से जोड़ना होगा. उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का मानना है कि एआई के जरिए भारत ‘विकसित भारत’ बनने के अपने लक्ष्य को बहुत तेजी से पूरा कर सकता है. यह समिट उसी दिशा में एक मजबूत कदम है.
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First Published :
February 13, 2026, 13:55 IST

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