AMCA पर भारी चीन का 6th जेनरेशन फाइटर जेट, हम जो सोच रहे पड़ोसी ने वह कर दिखाया, कहीं पाकिस्‍तान न निकल जाए आगे

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AMCA पर भारी चीन का 6th जेन फाइटर जेट, हम जो सोच रहे पड़ोसी ने वह कर दिखाया

Last Updated:March 15, 2026, 06:33 IST

Next Generation Fighter Jet: अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध ने एयर-वॉरफेयर के महत्‍व को एक बार फिर से फोकस में ला दिया है. नेक्‍स्‍ट जेनरेशन वेपन सिस्‍टम के डेवलपमेंट से जुड़े प्रोजेक्‍ट ने अब और रफ्तार पकड़ ली है. अमेरिका और चीन जैसे देश 6th जेन एयरक्राफ्ट बनाने में जुटे हैं. चीन तो नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट का ट्रायल भी कर रहा है. वहीं, अमेरिका ने F-47 नाम से छठवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने में जुटा है. भारत ने भी 5th और 6th जेन जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसके अमल में आने में कम से कम 10 साल का वक्‍त लगने का अनुमान है.

AMCA पर भारी चीन का 6th जेन फाइटर जेट, हम जो सोच रहे पड़ोसी ने वह कर दिखायाZoom

एडवांस फाइटर जेट के मामले में भारत पड़ोसी देश चीन से लगातार प‍िछड़ता जा रहा है. बीजिंग ने 6th जेनरेशन के लड़ाकू विमान का पीक्षण कर रहा है. (फाइल फोटो/Reuters)

Next Generation Fighter Jet: 21वीं सदी में युद्ध का तौर-तरीका पूरी तरह से बदल चुका है. स्‍टील्‍थ फाइटर जेट के साथ ही ड्रोन और अल्‍ट्रा माडर्न वॉरशिप पर फोकस बढ़ गया है. ईरान वॉर ने एक बात स्‍पष्‍ट कर दिया है कि जिसके पास स्‍ट्रॉन्‍ग एयरफोर्स और नेवी है, दुनिया में उसी की धाक है. अमेरिका, चीन, रूस जैसे देश इसमें दुनिया के अन्‍य देशों से कहीं आगे है. भारतीय नौसेना और वायुसेना की गिनती भी ताकतवर फ्लीट के तौर पर होती है. पिछले एक दशक में डिफेंस सेक्‍टर में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है. स्‍वदेशी टेक्‍नोलॉजी की मदद से कटिंग एज मिसाइल सिस्‍टम, ड्रोन, एयर डिफेंस का पूरा बेड़ा तैयार किया जा रहा है. अग्नि-5, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, आकाश, रुद्रम प्रोजेक्‍ट आदि कुछ उदाहरण हैं. फाइटर जेट के सेगमेंट में भी भारत आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम उठा रहा है. नेक्‍स्‍ट जेनरेशन एयरक्राफ्ट डेवलप करने के लिए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. इसके तहत पांचवीं और छठवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने का लक्ष्‍य रखा गया है. इन सबके बीच सबसे अहम सवाल यह है कि फाइटर जेट के मामले में चीन की तुलना में भारत कहां खड़ा है. बीजिंग पहले ही 5th जेन जेट बना चुका है. रिपोर्ट्स के अनुसार अब चीन 6th जेनरेशन फाइटर जेट का ट्रायल कर रहा है. कुछ महीनों में यह चीनी एयरफोर्स के बेड़े में शामिल हो सकता है. दूसरी तरफ, इंडियन एयरफोर्स के पास अभी तक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट भी नहीं है. चीन के आक्रामक कदम को देखते हुए भारत रूस या फिर अमेरिका से 5th जेनरेशन फाइटर जेट खरीदने की योजना बना रहा है, ताकि चीन के साथ पैदा हुए गैप को फौरी तौर पर भरा जा सके.

एशिया में एयर पावर बैलेंस को लेकर रणनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है. वर्ष 2026 की शुरुआत में चीन द्वारा छठी पीढ़ी (सिक्स्थ-जेनरेशन) के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों के सक्रिय उड़ान परीक्षण शुरू करने की खबरों ने भारत के रक्षा प्रतिष्ठान को गंभीर रूप से सतर्क कर दिया है. भारत जहां अभी अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है, वहीं चीन कथित तौर पर छठी पीढ़ी के कई प्रोटोटाइप जेट का परीक्षण कर रहा है. इस तेज प्रगति ने भारतीय वायु सेना और रक्षा मंत्रालय के भीतर इस बात पर चर्चा को तेज कर दिया है कि क्या भारत को अब ज्‍वाइंट 6th जेनरेशन फाइटर जेट प्रोजेक्‍ट में शामिल होना चाहिए. रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास के लिए दो बड़े एयरोस्पेस सेंटर्स के माध्यम से समानांतर कार्यक्रम शुरू किए हैं. पहला कार्यक्रम चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसे अनौपचारिक रूप से J-36 का नाम दिया गया है. यह एक बड़े आकार का टेल-लेस स्टील्थ विमान है, जिसे लंबी दूरी के अभियानों और अत्याधुनिक सेंसर इंटीग्रेशन के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी पहली फ्लाइट टेस्टिंग के दौरान इसे एक दो सीटर वेरिएंट वाले Chengdu J-20 लड़ाकू विमान ने चेज प्लेन के रूप में एस्कॉर्ट किया, जिससे इस परीक्षण कार्यक्रम के महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है.

चीन का 6th जेनरेशन जेट प्रोजेक्‍ट

चीन का दूसरा छठी पीढ़ी का विमान कार्यक्रम शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन से जुड़ा हुआ है. इसे J-50 के नाम से जाना जाता है. बताया जाता है कि यह विमान क्रैंक्ड-एरो विंग कॉन्फिगरेशन से लैस है और इसकी डिजाइन फिलॉसफी ज्यादा चुस्ती, नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता और एडवांस सेंसर फ्यूजन पर आधारित है. रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, जनवरी 2026 तक केवल चेंगदू कार्यक्रम के तहत ही चार उड़ान प्रोटोटाइप तैयार हो चुके हैं. प्रत्येक नए प्रोटोटाइप में इंजन एग्जॉस्ट नोजल डिजाइन, स्‍टील्‍थ शेपिंग और सेंसर इंटीग्रेशन में सुधार देखा गया है. भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह अभी अपने एडवांस्‍ड स्टील्थ फाइटर जेट प्रोग्राम Advanced Medium Combat Aircraft पर काम कर रहा है. इसे अक्सर 5.5 जेनरेशन का लड़ाकू विमान माना जाता है और इसके 2030 के दशक के मध्य तक भारतीय वायु सेना में शामिल होने की उम्मीद है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तब तक चीन संभवतः अपने छठी पीढ़ी के विमानों को ऑपरेशन के करीब ले जा चुका होगा. इस तरह चीन फाइटर जेट के मामले में भारत से एक कदम आगे हो जाएगा.

भारत AMCA प्रोजेक्‍ट के तहत पांचवीं और छठवीं पीढ़ी का फाइटर जेट डेवलप करने में जुटा है. (फाइल फोटो/Reuters)

चीन-पाकिस्‍तान नेक्‍सस चिंता का सबब

नई दिल्ली की चिंता का एक और बड़ा कारण चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग है. कई रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई है कि भविष्य में बीजिंग अपने एडवांस स्टील्थ फाइटर प्लेटफॉर्म इस्लामाबाद को निर्यात कर सकता है. यदि ऐसा हुआ तो दक्षिण एशिया में एयर पावर बैलेंस पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और भारत को अपनी दीर्घकालिक रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है.इसी संदर्भ में भारत के सामने छठी पीढ़ी के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने का विकल्प भी चर्चा में है. कुछ वर्ष पहले ब्रिटेन ने भारत को अपने टेम्पेस्ट कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी थी, जो बाद में जापान और इटली के साथ मिलकर Global Combat Air Programme में बदल गया. लेकिन जापान के शामिल होने के बाद इस परियोजना में भारत के लिए प्रमुख भागीदार बनने की संभावना काफी कम हो गई. इसके बाद भारत ने यूरोप की दूसरी छठी पीढ़ी की परियोजना Future Combat Air System में संभावित भागीदारी की संभावना तलाशनी शुरू की. यह कार्यक्रम फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के नेतृत्व में चल रहा है. हालांकि, इन देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं, जिससे भारत के लिए इसमें रणनीतिक साझेदार के रूप में शामिल होने की एक सीमित संभावना बनती दिखाई दे रही है.

यूरोपीय देश भी छठवीं पीढ़ी का फाइटर जेट डेवलप करने में जुटे हैं. (फाइल फोटो/Reuters)

भारत के लिए मौका

विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत इस कार्यक्रम में शामिल होता है और 150 से 200 विमानों का ऑर्डर देता है, तो इससे परियोजना की वित्तीय स्थिरता भी मजबूत हो सकती है. कुछ विशेषज्ञों ने तो यह भी सुझाव दिया है कि फ्रांस भविष्य में कार्यक्रम की संरचना में बदलाव कर भारत को एक प्रमुख भागीदार के रूप में शामिल करने पर विचार कर सकता है. ऐसी स्थिति में फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation की भूमिका अहम हो सकती है, जिसके साथ भारत के पहले से मजबूत रक्षा संबंध हैं. भारत पहले ही Dassault Rafale लड़ाकू विमानों का संचालन कर रहा है और दोनों देशों के बीच डिफेंस टेक्‍नोलॉजी सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसी अनुभव के आधार पर भारत को उन्नत स्टील्थ, इंजन और सेंसर तकनीकों तक अपेक्षाकृत तेज पहुंच मिल सकती है.

टू-लेवल स्‍ट्रैटजी

रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत के लिए दो-स्तरीय रणनीति सबसे व्यावहारिक हो सकती है. इसके तहत भारत घरेलू स्तर पर एएमसीए कार्यक्रम को जारी रखते हुए समानांतर रूप से किसी अंतरराष्ट्रीय छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान परियोजना में भागीदारी करे. इस मॉडल में एएमसीए लगभग 2035 तक सेवा में आ सकता है, जबकि संयुक्त रूप से विकसित छठी पीढ़ी का विमान 2040 के आसपास परिचालन में आ सकता है. चीन के छठी पीढ़ी के फाइटर परीक्षणों ने इस तरह नई दिल्ली में रणनीतिक सोच को तेज कर दिया है. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यदि भारत ने समय रहते अगली पीढ़ी की एयर वॉरफेयर टेक्‍नोलॉजी में निवेश नहीं किया, तो आने वाले वर्षों में चीन और अमेरिका जैसे देशों के मुकाबले तकनीकी अंतर काफी बढ़ सकता है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

March 15, 2026, 06:33 IST

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