BNP leadership and India: बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मुखिया तारिक रहमान को बधाई दी है. वहीं पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने भी तारिक रहमान को बधाई देते हुए दावा किया बीएनपी सरकार का पाकिस्तान के साथ दोस्ताना रवैया रहेगा. इस्लामाबाद के इस दावे का आधार ये बताया जा रहा है कि तारिक रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का रुख पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक रहा था.
कौन है तारिक रहमान?
बांग्लादेश के पहले सैन्य शासक और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर, 1965 को हुआ था. वहीं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh ist Party) की स्थापना 1 सितंबर 1978 को तत्कालीन बांग्लादेशी राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने की थी. जबकि बांग्लादेश का जन्म भारत की सेना की मदद के बाद 16 दिसंबर 1971 को हुआ था. अवामी लीग और बीएनपी के बीच शुरुआत से ही 36 का आंकड़ा रहा है.
बीएनपी-अवामी लीग और भारत से रिश्ता
पूर्वी पाकिस्तान के अनगिनत बंगाली मुसलमानों के कत्ल के बाद पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए और पूर्वी पाकिस्तान आजाद होकर बांग्लादेश बन गया. शेख मुजीबुर्रहमान की अगुवाई में अवामी लीग की सरकार बनी. शेख हसीना की सरकार के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे नहीं रहे थे. अवामी लीग सरकार में 1971 के युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के खिलाफ साजिश करने के आरोप में कई पाकिस्तान और जमात समर्थकों को मौत की सजा दी गई थी.
शेख हसीना की पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे नहीं रहे थे. शेख हसीना की अगुवाई वाली अवामी सरकार भारत को अपना दोस्त मानती थी तो बीएनपी, पाकिस्तान को. अवामी लीग की सरकार में 1971 के युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के खिलाफ साजिश करने के आरोप में कई पाकिस्तान और जमात ए इस्लामी बांग्लादेश समर्थकों को मौत की सजा दी गई थी. आगे समय चक्र का पहिया घूमा तो अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पाकिस्तान-बांग्लादेश के रिश्तों में गर्माहट तेजी से बढ़ी. 13 फरवरी, 2026 को जब बीएनपी ने प्रचंड बहुमत हासिल करते ही नई दिल्ली और ढाका के बीच कई संभावनाओं ने जन्म लिया.
राजनीतिक बदलाव के बीच आपसी रिश्तों की अहमियत
हालांकि बीएनपी की पिछली सरकार, नई दिल्ली के साथ 'सब कुछ सही या कुछ भी सही नहीं' वाले एजेंडे पर चलती थी. बीएनपी, 'बांग्लादेश फर्स्ट' अप्रोच के तहत हमेशा से यह मानती है कि वह भारत पर निर्भर रहने के बजाय बराबरी पर आधारित रिश्ता चाहती है.
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के करीब डेढ़ साल के भारत विरोधी और हिंदुओं के कत्ल-ओ-गारत से भरे कार्यकाल में नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में काफी कड़वाहट आई है.
2 फरवरी को हुए चुनावों के बाद नतीजों के रुझानों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार बनने की संभावनाओं के बीच नई दिल्ली अलर्ट मोड पर थी. बांग्लादेश में यूनुस की कट्टरपंथी अंतरिम सरकार की विदाई यानी बीएनपी के सत्ता में आने जैसे राजनीतिक बदलाव के बीच भारत ने 'एक्ट एट ईस्ट' और 'नेबर्स फर्स्ट' पॉलिसी पर जोर देते हुए बांग्लादेश में शांति और लोकतंत्र की बहाली के लिए फौरन बांग्लादेश के साथ रिश्ते सुधारने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई. पीएम मोदी ने प्रचंड बहुमत से चुनाव जीतने वाली बीएनपी के नेता तारिक रहमान को बधाई दी.
X पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, 'मैं बांग्लादेश में पार्लियामेंट्री चुनावों में बीएनपी को अहम जीत दिलाने के लिए पार्टी चीफ तारिक रहमान को दिल से बधाई देता हूं. ये जीत 'बांग्लादेश के लोगों का आपके नेतृत्व पर भरोसा' दिखाती है. भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा.'
चुनाव नतीजों पर पूर्व विदेश सचिव का बयान
पूर्व विदेश सचिव और राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने नतीजों पर कहा, 'बांग्लादेश में जनता ने एक ऐसी पार्टी को वोट दिया है जो राजनीतिक हितों का प्रतिनिधित्व करती है. यह एक मुक्तिवादी पार्टी है. जो 1971 की भावना में विश्वास रखती है, जबकि जमात-ए-इस्लामी इसके विपरीत थी, जिसने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संघर्ष का विरोध किया था. बीएनपी के प्रमुख तारिक रहमान ने भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने, अपने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बांग्लादेश के सबसे निकट और सबसे बड़े पड़ोसी के साथ सहयोग को दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी बनाने के अपने इरादे के बारे में कुछ सकारात्मक बयान दिए हैं. ये अच्छी खबर है.'
बीएनपी ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ!
पीएम मोदी का संदेश मिलते ही बीएनपी ने सकारात्मक रुख दिखाया. बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के मेंबर और चीफ इलेक्शन कोऑर्डिनेटर नजरुल इस्लाम खान ने ज़ी न्यूज़ के सहयोगी चैनल WION से बाचतीच में कहा, 'हम अपनी पार्टी की तरफ से पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हैं, हमें भरोसा है कि तारिक रहमान की अगुवाई में दोनों देशों के लोगों के आपसी रिश्ते भी पहले जैसे मजबूत होंगे. जनादेश स्वीकार करना चाहिए'.
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक तारिक रहमान की नई लीडरशिप भारत के साथ रिश्ते ठीक करने की कोशिश कर सकती है. रहमान के करीबी सलाहकार, महदी अमीन का मानना है- 'बेशक, कुछ मुद्दे हैं, लेकिन हर मुद्दा लोगों के बीच बेहतर संपर्क बनाने का एक मौका हो सकता है. हम आपसी भरोसे, आपसी हित पर आधारित दो-तरफा रिश्तों की तारीफ करेंगे. ऐसा आपसी रिश्ता जहां दोनों देशों की बराबरी, निष्पक्षता और न्याय के साथ अपनी अवाम की खिदमत कर सकें'.
बांग्लादेश के चुनावी अखाड़े में कट्टरपंथी जमात ने छोटे-छोटे 10 दलों से गठबंधन करके चुनाव लड़ा. इसके बावजूद जमात के चीफ अपनी सीट नहीं जीत पाए. गौरतलब है कि वोटिंग से चंद रात पहले कामकाजी महिलाओं की तुलना वेश्याओं से करके महिलाओं के निशाने पर आए जमात सुप्रीमो शफीकुर रहमान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था.
वहीं भारत विरोधी विचारधारा रखने वाले कट्टर नेता सरजिस आलम को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है. नेशनल सीटिजन पार्टी के उत्तरी क्षेत्र प्रमुख सरजिस आलम को पंचागढ़-1 से करारी हार का मुंह देखना पड़ा. ये सीट भी बीएनपी के खाते में गई है.
बांग्लादेश के कट्टरपंथी 'जमातियों' का चुनाव हारना यह दिखाता है कि बांग्लादेश की जनता भारत से अच्छे रिश्तों की दरकार रखती है. हालांकि नतीजों में भारत के लिए एक सेटबैक यह भी है कि भारतीय सीमा से सटे कुछ इलाकों में कट्टरपंथी जमात ए इस्लामी की जीत एक नए खतरे की घंटी भी है.

1 hour ago
