CJI Suryakant on NCERT Book Row: सुप्रीम कोर्ट के तल्ख तेवर से हिला शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी के किन-किन अधिकारियों पर गिर सकती है गाज!

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सीजेआई सूर्यकांत के कड़े तेवर के बाद किन-किन अधिकारियों पर गिर सकती है गाज!

Last Updated:February 26, 2026, 16:16 IST

CJI Suryakant on NCERT Book Row: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एनसीईआरटी के गलियारों में हड़कंप मच गया है. सीजेआई सूर्यकांत के 'कैलकुलेटिव मूव' वाली टिप्पणी के बाद अब शिक्षा मंत्रालय बड़े एक्शन की तैयारी में है. जानिए 8वीं की किताबों में चैप्टर जोड़ने और हटाने का क्या है जटिल नियम और किन अधिकारियों की कुर्सी पर अब खतरा मंडरा रहा है. क्या अगली सुनवाई से पहले शिक्षा मंत्रालय बड़ा एक्शन लेगा?

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11 मार्च से पहले एनसीईआरीट विवाद पर क्या कुछ बड़ा होने वाला है?

नई दिल्ली. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने एनसीईआरटी (NCERT) के खिलाफ जो सख्त टिप्पणी की है, उसने शिक्षा मंत्रालय के भीतर खलबली मचा दी है. सीजेआई ने इस मामले को ‘न्यायपालिका को नीचा दिखाने का सोचा-समझा प्रयास’ करार दिया है. इस तल्ख टिप्पणी के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि एनसीईआरटी के शीर्ष नेतृत्व और उन समितियों पर गाज गिर सकती है, जो पाठ्यपुस्तकों के संपादन और प्रकाशन के लिए जिम्मेदार हैं.

किन अधिकारियों पर गिर सकती है गाज?

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय उन अधिकारियों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने विवादित सामग्री को हरी झंडी दी थी. इसमें मुख्य रूप से इन पदों पर बैठे लोग रडार पर हैं.

एनसीईआरटी के निदेशक (Director): संस्थान के प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रमुख होने के नाते अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की होती है. पाठ्यचर्या विभाग के प्रमुख (Head of Curriculum Development): किताबों के कंटेंट और सिलेबस में बदलाव का खाका इन्हीं की देखरेख में तैयार होता है. संबंधित विषय प्रमुख (Subject Heads): 8वीं कक्षा की जिस किताब पर विवाद हुआ है, उस विषय के विभागाध्यक्ष और समन्वयकों से जवाब तलब किया जा सकता है. प्रकाशन विभाग के प्रभारी: विवादित प्रतियों के बाजार में पहुंचने और कोर्ट के आदेश के बावजूद वितरण न रोकने के लिए इन्हें जिम्मेदार माना जा सकता है.

शिक्षा मंत्रालय जल्द ही एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर सकता है, जो यह देखेगी कि क्या वाकई यह कोई ‘कैलकुलेटिव मूव’ था या प्रक्रियात्मक चूक.

कैसे बदलती है 8वीं की किताब?

एनसीईआरटी में किसी भी क्लास की किताब में चैप्टर जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया बहुत लंबी और बहुस्तरीय होती है. यह कोई एक व्यक्ति तय नहीं करता. इसका पूरा ढांचा नीचे दिए गए चरणों में समझा जा सकता है.

1. नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF): सबसे पहले केंद्र सरकार एक नेशनल स्टीयरिंग कमेटी बनाती है जो NCF तैयार करती है. यही वह दस्तावेज है जो बताता है कि बच्चों को क्या और कैसे पढ़ाना है. 2. पाठ्यक्रम विकास समिति (Syllabus Development Committee): NCF के आधार पर यह कमेटी तय करती है कि किस कक्षा के लिए कौन-कौन से विषय और चैप्टर होंगे. इसमें देशभर के जाने-माने शिक्षाविद और प्रोफेसर शामिल होते हैं. 3. पाठ्यपुस्तक विकास दल (Textbook Development Teams – TDT): हर विषय के लिए अलग-अलग TDT बनाई जाती है. इसमें स्कूल शिक्षक, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और विषय विशेषज्ञ होते हैं. यही टीम चैप्टर लिखती है या पुराने चैप्टर हटाती है. 4. आंतरिक और बाह्य समीक्षा (Review Process): चैप्टर लिखे जाने के बाद इसकी कई स्तरों पर समीक्षा होती है. पहले एनसीईआरटी के आंतरिक विशेषज्ञ इसे देखते हैं, फिर बाहर के विशेषज्ञों (External Reviewers) को भेजा जाता है ताकि निष्पक्षता बनी रहे. 5. संपादन और प्रूफरीडिंग: अंत में प्रकाशन विभाग भाषा, चित्र और तकनीकी गलतियों की जांच करता है.

चैप्टर हटाने या डालने के क्या हैं नियम?

तर्कसंगतता (Rationalization): हाल के वर्षों में ‘पाठ्यचर्या भार’ को कम करने के नाम पर कई बदलाव किए गए. नियम कहता है कि अगर कोई जानकारी पुरानी हो गई है, अप्रासंगिक है या दूसरे विषय में भी वही बात पढ़ाई जा रही है, तो उसे हटाया जा सकता है.

कितना संवेदनशील मामला है?

कोई भी ऐसी सामग्री नहीं डाली जा सकती जो संवैधानिक मूल्यों, न्यायपालिका की गरिमा या किसी समुदाय की भावनाओं के खिलाफ हो.

जानें कैसे मिलती है मंजूरी?

किसी भी बड़े बदलाव के लिए एनसीईआरटी की कार्यकारी समिति (Executive Committee) और कभी-कभी शिक्षा मंत्रालय की मंजूरी आवश्यक होती है.

कुलमिलाकर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की तल्ख टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. अब गेंद शिक्षा मंत्रालय के पाले में है कि वह इस ‘कैलकुलेटिव मूव’ के पीछे के चेहरों को बेनकाब करे. 11 मार्च को एनसीईआरीटी मामले पर अगली सुनवाई होनी है. लेकिन उससे पहले सरकार बड़ा एक्शन ले तो हैरानी नहीं होगी.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें

First Published :

February 26, 2026, 16:16 IST

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