CTET 2026: सीटीईटी के नए पैटर्न के आगे पस्त हुए गुरुजी, सवालों के जाल में भूल गए मास्टरी

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Last Updated:February 09, 2026, 07:52 IST

CTET 2026: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद अपनी नौकरी बचाने उतरे अनुभवी शिक्षकों को सीटीईटी के बदले पैटर्न ने चौंका दिया. कई परीक्षा केंद्रों से आई रिपोर्ट के अनुसार, एनालिटिकल प्रश्नों ने गुरुओं के भी पसीने छुड़ा दिए. बच्चों को समझाते-समझाते उन्हें खुद समझ में आ गया कि अब रटने से नहीं, समझने से ही बनेगी बात.

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CTET 2026 Exam Pattern: सीटीईटी परीक्षा पैटर्न में बदलाव से गुरुजी खुद परेशान हो गए

नई दिल्ली (CTET 2026). सालों से क्लासरूम के ब्लैकबोर्ड पर राज करने वाले शिक्षकों के लिए सीटीईटी परीक्षा इस बार केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गई. इस हलचल के पीछे सुप्रीम कोर्ट का वह सख्त रुख है, जिसमें स्पष्ट किया गया कि बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए कोई भी व्यक्ति कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के योग्य नहीं माना जाएगा. अदालत ने साफ कर दिया कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और केवल बीएड या डीईएलएड की डिग्री होना काफी नहीं है.

इसी कानूनी डंडे का असर था कि इस बार सीटीईटी परीक्षा केंद्रों पर वे चेहरे भी नजर आए जो दशकों से दूसरों का इम्तिहान ले रहे थे. सालों के अनुभव और सफेद होते बालों के साथ जब ये शिक्षक परीक्षा हॉल में अभ्यर्थी बनकर बैठे तो नजारा बदला हुआ था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उन शिक्षकों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी थी जो निजी स्कूलों में ऊंचे वेतन या रसूख के दम पर टिके थे. अब नियम साफ है: अगर बच्चों को पढ़ाना है तो पहले खुद को राष्ट्रीय मानक पर खरा उतारना होगा.

सीटीईटी पेपर देख उड़े मास्टरजी के होश

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सीटीईटी परीक्षा हॉल के अंदर बदले हुए ‘लॉजिकल पैटर्न’ ने जब इन अनुभवी दिग्गजों को घेरा तो समझ आया कि कोर्ट का यह फैसला केवल एक आदेश नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था के ‘सॉफ्टवेयर’ को अपडेट करने की बड़ी मुहिम है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बदली शिक्षकों की दुनिया

शिक्षकों को CTET की इस कठिन डगर पर चलने के लिए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले ने मजबूर किया, जिसमें कोर्ट ने अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पात्रता मानदंडों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि योग्य शिक्षकों के अभाव में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. इसी आदेश के बाद स्कूलों के लिए अनिवार्य हो गया कि वे केवल उन्हीं शिक्षकों को नियुक्त करें या सेवा में बनाए रखें, जिन्होंने CTET या राज्य स्तरीय TET पास किया हो.

अनुभव vs आधुनिक परीक्षा का चक्रव्यूह

सीटीईटी परीक्षा केंद्रों पर जो शिक्षक पहुंचे, उनमें से कई ऐसे थे जिन्होंने सालों पहले अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी. उन्हें लगा था कि किताबी ज्ञान और सालों का अनुभव उन्हें पार लगा देगा, लेकिन सीबीएसई के ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ आधारित सवालों ने सारा गणित बिगाड़ दिया. पेडागोजी (शिक्षण शास्त्र) के खंड में जब ‘सिचुएशन बेस्ड’ सवाल आए तो किताबी सिद्धांतों को रटने वाले शिक्षक पसीने-पसीने हो गए.

प्राइवेट स्कूलों के ‘टाइगर्स’ की बढ़ गईं धड़कनें

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सबसे ज्यादा असर उन शिक्षकों पर पड़ा, जो बड़े प्राइवेट स्कूलों में सालों से जमे थे. अब स्कूलों पर दबाव है कि वे केवल ‘सर्टिफाइड’ शिक्षकों का डेटा ही सरकारी पोर्टल पर अपलोड करें. सीटीईटी परीक्षा केंद्र से बाहर निकले एक शिक्षक ने चुटकी लेते हुए कहा, बच्चों को फेल करना आसान था, पर खुद पास होने के लिए अब दिन-रात एक करना होगा.

अब यह तय हो चुका है कि ‘गुरु’ बनने के लिए केवल ज्ञान काफी नहीं, बल्कि बदलते हुए वैश्विक मानकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के साथ कदम से कदम मिलाना जरूरी है.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें

First Published :

February 09, 2026, 07:52 IST

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