Last Updated:March 13, 2026, 12:12 IST
Deccan Pen Stores Hyderabad History: हैदराबाद की 98 साल पुरानी दुकान 'डेक्कन पेन स्टोर्स' को दुनिया 'पेन का अस्पताल' कहती है. 1928 में शुरू हुई इस दुकान में 90 साल पुराने पेन की मरम्मत की जाती है. यहाँ के कारीगर खुद पार्ट्स बनाकर पुरानी कलमों को नया जीवन देते हैं, जो आज भी हस्तलिपि की परंपरा को जीवित रखे हुए है.
Deccan Pen Stores Hyderabad History: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में जहाँ एक ओर टेक सिटी और डिजिटल क्रांति का शोर है. वहीं आबिड्स रोड की एक शांत गली में ‘डेक्कन पेन स्टोर्स’ नाम की एक ऐसी दुकान है. जो हस्तलिपि की लुप्त होती कला को बचाने के लिए आखिरी किले की तरह खड़ी है. साल 1928 में साबिह अख्तर सिद्दीकी द्वारा शुरू की गई यह दुकान आज अपनी स्थापना के 98वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. इसे स्थानीय लोग और पेन प्रेमी प्यार से ‘पेन का अस्पताल’ कहते हैं. क्योंकि यहाँ केवल पेन बेचे नहीं जाते. बल्कि दशकों पुरानी कलमों की ‘सर्जरी’ कर उन्हें फिर से लिखने लायक बनाया जाता है.
इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहाँ का सर्विस सेंटर है. जहाँ 50 से लेकर 90 साल पुराने फाउंटेन पेन की मरम्मत की जाती है. वर्तमान में साबिह अख्तर की तीसरी और चौथी पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है. दुकान के मालिक एच.ए. सिद्दीकी बताते हैं कि जब बाजार में किसी पुराने मॉडल के पेन के पार्ट्स (पुर्जे) मिलना बंद हो जाते हैं. तो उनके कुशल कारीगर अपनी लेथ मशीन पर खुद निब और बॉडी तैयार करते हैं. यहाँ का हर कारीगर किसी सर्जन की तरह सूक्ष्म औजारों से पेन को खोलता है. जमी हुई स्याही की नसों को साफ करता है और टूटी हुई बॉडी को फिर से नया जैसा बना देता है.
भावनाओं और यादों का इलाज
डेक्कन पेन स्टोर्स में केवल ग्राहक ही नहीं आते. बल्कि अक्सर लोग भावुक होकर अपनी विरासत लेकर पहुँचते हैं. कई बार लोग रोते हुए आते हैं क्योंकि वह पेन उनके दादा या पिता की आखिरी निशानी होता है. जो खराब हो चुका होता है. एच.ए. सिद्दीकी कहते हैं कि मरम्मत में कभी-कभी एक हफ्ता तो कभी महीनों का समय लगता है. लेकिन जब पुरानी कलम फिर से कागज पर फर्राटा भरने लगती है. तो ग्राहक की आँखों में चमक और संतुष्टि का भाव अनमोल होता है. यहाँ 5 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के पेन मौजूद हैं. जो हर वर्ग के पेन प्रेमियों की पसंद हैं.
रिसाइकल और रिवाइव करने की संस्कृति
आज के ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ (Use and Throw) वाले दौर में यह दुकान रिसाइकिलिंग का बेहतरीन उदाहरण पेश करती है. जहाँ लोग पुराने पेन खराब होने पर कचरे में फेंक देते हैं. वहीं यहाँ के कारीगर उन्हें रिवाइव कर पर्यावरण और कला दोनों को बचा रहे हैं. इस अस्पताल के ग्राहकों में स्कूल के छात्रों से लेकर हाई कोर्ट के जज और बड़े राजनेता तक शामिल हैं. यह दुकान साबित करती है कि भले ही आज दुनिया कीबोर्ड और टचस्क्रीन पर सिमट गई हो. लेकिन हाथ से लिखी गई इबारत और एक अच्छी कलम की कीमत कभी कम नहीं हो सकती.
About the Author
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content...और पढ़ें
Location :
Hyderabad,Hyderabad,Telangana
First Published :
March 13, 2026, 12:12 IST

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