Dharohar: फतेह रहबर तोप की गर्जना से कांप उठी थी औरंगजेब की सेना, पर्यटकों के बीच प्रचलित है ये कथाएं

15 hours ago

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इतिहास की अनोखी धरोहर है यह तोप, गर्जना से कांप उठी थी औरंगजेब की सेना

Last Updated:March 09, 2026, 07:02 IST

Dharohar: हैदराबाद के गोलकुंडा किले में रखी फतेह रहबर तोप इतिहास की एक अनोखी धरोहर मानी जाती है. बताया जाता है कि 1687 में औरंगजेब की सेना ने जब किले की घेराबंदी की थी, तब इस तोप से दागे गए गोलों ने मुगल सेना में अफरा-तफरी मचा दी थी. लगभग 16.59 टन वजनी और 486 सेंटीमीटर लंबी इस विशाल तोप को मुहम्मद अली अरब ने कांस्य से तैयार किया था. आज भी पर्यटकों के बीच इससे जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं, हालांकि यह ऐतिहासिक धरोहर अब उपेक्षा का शिकार होती नजर आ रही है.

हैदराबाद. तेलंगाना के ऐतिहासिक गोलकुंडा किले की प्राचीर पर रखी फतेह रहबर तोप केवल धातु का एक विशाल ढांचा नहीं, बल्कि उस अजेय साहस और तकनीकी कौशल की प्रतीक है जिसने सदियों पहले मुगल साम्राज्य को चुनौती दी थी. 1687 में जब मुगल सम्राट औरंगजेब की विशाल सेना ने गोलकुंडा किले को घेर लिया था, तब इसी तोप की गर्जना ने युद्ध का रुख बदलने की कोशिश की थी. यह तोप आज भी किले की सबसे चर्चित धरोहरों में गिनी जाती है और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी हुई है. इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि औरंगजेब ने गोलकुंडा को जीतने के लिए करीब आठ महीने तक किले की घेराबंदी की थी.

मुगल सेना संख्या और संसाधनों में बेहद मजबूत थी, लेकिन किले के भीतर मौजूद सैनिकों और उनकी युद्ध तकनीक ने उन्हें लंबे समय तक रोके रखा. स्थानीय लोककथाओं और इतिहास के जानकार जाहिद सरकार के अनुसार किले के सबसे ऊंचे बुर्ज पर तैनात फतेह रहबर तोप उस समय किले की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी. इस तोप से दागे गए गोले मुगल सेना के शिविरों में भारी तबाही मचाते थे. कहा जाता है कि इसकी भीषण गर्जना इतनी डरावनी थी कि मुगल सेना के हाथी तक घबरा जाते थे और पीछे भागने लगते थे. इससे घेराबंदी कर रही सेना में कई बार अफरा-तफरी मच जाती थी.

उन्नत धातू तकनीक से बना था विशालकाय तोप

करीब 16.59 टन वजनी और 486 सेंटीमीटर लंबी यह विशाल तोप उस दौर की उन्नत धातु विज्ञान तकनीक का बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है. इसे मुहम्मद अली अरब नामक इंजीनियर ने कांस्य धातु से तैयार किया था. इसकी बनावट और संरचना इतनी मजबूत थी कि यह कई किलोमीटर दूर तक दुश्मन को निशाना बनाने में सक्षम थी. इतिहासकारों के अनुसार इसी कारण औरंगजेब जैसी शक्तिशाली सेना भी लंबे समय तक गोलकुंडा किले को युद्ध के मैदान में जीत नहीं सकी. आखिरकार उसे एक गद्दार की मदद लेनी पड़ी, जिसने किले का दरवाजा खोल दिया और मुगल सेना को अंदर आने का रास्ता मिल गया.

सरकारी उपेक्षा का शिकार हो रहा है धरोहर

आज भी हैदराबाद के समीप गोलकुंडा किले में आने वाले पर्यटकों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि फतेह रहबर तोप में एक रूहानी ताकत है जो किले की रक्षा करती है. हालांकि यह भी सच है कि इतनी ऐतिहासिक धरोहर होने के बावजूद यह तोप अब सरकारी उपेक्षा और पर्यटकों की लापरवाही का शिकार होती नजर आती है. इतिहासकारों का मानना है कि इस तोप को बेहतर संरक्षण और देखभाल की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उस दौर की अद्भुत तकनीक और साहसिक इतिहास को करीब से समझ सकें. गोलकुंडा की यह तोप आज भी हमें याद दिलाती है कि यह किला केवल पत्थरों से नहीं, बल्कि उस जज्बे और तकनीक से बना था जिसने कभी दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं को भी चुनौती दी थी.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट...और पढ़ें

Location :

Hyderabad,Telangana

First Published :

March 09, 2026, 07:02 IST

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