DNA: '7 डॉलर' से बचेगी खलीफा की सल्तनत? ईरान में हाहाकार के बीच खामेनेई ने चली आखिरी चाल

1 day ago

Iran Protests: एक तरफ ईरान अपने मित्र देशों के साथ शक्ति प्रदर्शन के जरिए अमेरिका को चुनौती दे रहा है, दूसरी तरफ वो घर में विद्रोह से निपटने की तैयारी भी कर रहा है. ईरान में अब तक के सबसे बड़े विद्रोह से परेशान खलीफा की हुकूमत लोगों को चुप कराने के लिए साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल कर रही है.

लोगों को दिया जा रहा लालच

साम यानी समझौते की कोशिश विफल हो गई, भेद यानी फूट डालना भी काम नहीं आया. दंड देने के बावजूद लोग बगावत से पीछे नहीं हट रहे हैं. ऐसे में अब ईरान के लोगों को दाम यानी धन का लालच दिया जा रहा है. ईरान के लोगों के लिए खामेनेई का ऑफर क्या है. क्या इस ऑफर से लोगों का विद्रोह शांत हो जाएगा. क्या विद्रोह दबाने की खलीफा की ये आखिरी कोशिश है. इन सवालों को डिकोड करने से पहल आपको ईरान में चल रहे विद्रोह प्रदर्शन का ताजा अपडेट जानना चाहिए.

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ईरान में मंगलवार को लगातार 10वें दिन भी प्रदर्शन जारी रहा. प्रदर्शन का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब ईरान के 31 में से 26 राज्यों में इस्लामिक सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बगावत में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई है जिनमें 4 बच्चे भी शामिल हैं. प्रदर्शन को काबू में करने के लिए ईरान के सुरक्षा बलों ने 1,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. लेकिन इसके बावजूद लोगों का सड़कों पर उतरना जारी है.

IRGC के कई कैंपों पर हमला

लोगों में नाराजगी इस कदर है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC के जवान भी उनके गुस्से से नहीं बचे हैं. IRGC के कई कैंप पर लोगों ने हमला किया है. लोग एक तरफ सड़कों पर खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं. दूसरी तरफ ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी की वापसी की मांग कर रहे हैं.

खामेनेई इन प्रदर्शनकारियों को दंगाई बताकर इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दे चुके हैं. यही वजह है कि पिछले 2 दिनों में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है.

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— Zee News (@ZeeNews) January 6, 2026

लोगों पर की गई फायरिंग

ईरान के इलम शहर में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा बल के जवान अस्पताल में घुस गए. जो लोग वहां इलाज कर रहे थे, उन्हें पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने पूरी ताकत लगा दी. हालांकि इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने जवानों का विरोध किया. झड़प के दौरान जवानों ने फायरिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े.

अब आपको खलीफा के उस प्लान के बारे में भी जानना चाहिए, जिसके सहारे वो विरोध प्रदर्शन शांत करने की कोशिश में लगे हैं. विरोध में कोई कमी नहीं आने के बीच ईरान सरकार ने फैसला लिया है कि हर नागरिक को 10 लाख तोमान दिया जाएगा.

यानी ईरान के हर नागरिक को 1 करोड़ रियाल दिया जाएगा

ईरान के करीब 8 करोड़ लोगों को अगले 4 महीने तक ये रकम मिलेगी.

ईरान की सरकार की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि हर साल आयात पर सब्सिडी के लिए जो 10 अरब डॉलर खर्च किए जाते थे, वो पैसा सीधे लोगों के खाते में जाएगा.

हालांकि अमेरिकी डॉलर में कहें तो ये रकम सिर्फ 7 डॉलर है और भारतीय मुद्रा में केवल 630 रुपये.

जिन प्रदर्शनकारियों को खामेनेई दंगाई कह रहे थे, जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे. अब उनके प्रदर्शन से परेशान होकर वो आर्थिक पैकेज का एलान कर रहे हैं. 36 साल पुरानी सत्ता जाने का डर इस कदर हावी है कि उन्हें अपना खजाना खोलना पड़ा. अब पैसे के दम पर वो सड़कों पर उतरे लोगों को शांत करना चाहते हैं.

लेकिन ये सरकारी पैसा ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. कहने को तो ईरान की सरकार 1 करोड़ रियाल दे रही है लेकिन ईरान की मुद्रा का भाव इस कदर गिर गया है कि इससे बहुत कम सामान खरीदे जा सकते हैं. इतने पैसे से सिर्फ 100 अंडे या 1 किलो मांस ही खरीदा जा सकता है. 

ईरान सरकार दे रही महज 7 डॉलर

एक अनुमान के मुताबिक ईरान के लोगों को गुज़र-बसर के लिए हर महीने कम से कम 200 डॉलर की ज़रूरत पड़ती है. जबकि सरकार सिर्फ़ 7 डॉलर दे रही है. यानी ये रक़म लोगों की आर्थिक मुश्किलों को कम करने के लिहाज़ से बहुत कम है.

लेकिन इसके बावजूद खामेनेई को उम्मीद है कि पैसा बांटने से लोगों का गुस्सा कुछ हद तक शांत होगा. ईरान छोड़ने की तैयारी कर चुके ख़लीफ़ा अपने इस प्लान को एक मौक़ा देना चाहते हैं.

अब तक ईरान की सरकार अपने खिलाफ उठी मांगों को कुचलने के लिए जानी जाती थी. सड़कों पर उतरने वाले लोगों की वो कोई परवाह नहीं करती थी.

प्रदर्शनकारियों को रोकने में खामेनेई ने लगाई जान

लेकिन इस बार प्रदर्शनकारियों को दंगाई और इस्लाम विरोधी बताने के बावजूद खामेनेई उन्हें शांत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं. आर्थिक पैकेज के एलान से पहले ईरान की सरकार ने सेंट्रल बैंक के गवर्नर को भी हटाया था. साथ ही करेंसी एक्सचेंज पॉलिसी में भी सुधार किया है.

लेकिन महंगाई को लेकर शुरू हुआ ईरान के लोगों का ये प्रदर्शन अब आर्थिक से ज़्यादा राजनीतिक हो चुका है. प्रदर्शनकारियों को लग रहा है कि अभी नहीं तो कभी नहीं. उन्हें खामेनेई की सरकार की कमज़ोरी साफ दिख रही है. यही वजह है कि प्रदर्शन कम होने के बदले तेज़ हो रहा है.

नेतन्याहू बोले- हम ईरान के लोगों के साथ

खामेनेई अपने घर में फैल रही बगावत की आग को डॉलर के जरिए बुझाना चाहते हैं. लेकिन अमेरिका और इजरायल..इस आग को और भड़कते हुए देखना चाहते हैं.

ट्रंप के साथ-साथ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी साफ कर दिया है कि वो ईरान के लोगों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं.

ईरान में जारी प्रदर्शन को लेकर नेतन्याहू का ये पहला बयान है. उन्होंने साफ कर दिया है कि ईरान के लोगों के साथ इज़रायल मज़बूती से खड़ा है. नेतन्याहू का बयान सुनते ही ईरान की तरफ से तुरंत जवाब आ गया.  

ईरान ने किया पलटवार

ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री के साथ-साथ कुछ अमेरिकी अधिकारियों की कार्रवाई या बयान..हिंसा, आतंकवाद और हत्याओं को बढ़ावा देना है.

इज़रायल वो देश है जिसके साथ पिछले साल जून में ईरान की 12 दिन तक लड़ाई हुई थी. ईरान में लोगों के विद्रोह के बीच अगर इजरायल ने कोई कदम उठाया तो खामेनेई की मुश्किलें बढ़नी तय है. वो तीन तरफ़ से घिर चुके हैं. एक तरफ़ देश में विद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा, दूसरी तरफ़ इज़रायल विद्रोहियों के साथ एकजुटता जता रहा है. वहीं अमेरिका ने भी चेतावनी दे रखी है कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर ज़ुल्म किए तो वो दखल देगा.

इन सबके बीच मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. ये पिछले साल जून में अमेरिकी हमले से पहले की तरह है.

ऐसे में तीन मोर्चों पर घिरे खामेनेई के लिए इस बार अपनी सत्ता बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. यही वजह है कि इस बार वो लोगों को पैसा देकर चुप कराना चाहते हैं. और रूस-चीन जैसे ताकतवर देशों के साथ सैन्य गुट बनाकर..अमेरिका का मुकाबला करना चाहते हैं.

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