DNA: ईरान पर संकट बड़ा है, लेकिन आस-पास के दूसरे मुस्लिम देश भी क्यों डरे हैं?

1 hour ago

ईरान पर संकट बड़ा है, लेकिन विकट परिस्थिति आस-पास के दूसरे मुस्लिम देशों के लिए भी है. ईरान के साथ-साथ 8 मुस्लिम देशों में अमेरिकी हमले का बेहिसाब डर है. ये डर इसलिए है क्योंकि अमेरिका और ईरान. दोनों अड़े हुए हैं. ट्रंप लगातार दबाव बना रहे हैं लेकिन खलीफा झुकने के लिए तैयार नहीं हैं. दोनों के शब्दों में धमकी की तीव्रता में रत्तीभर भी कमी नहीं आई है.

अमेरिका पहले से ही समंदर में महाविनाशक जंगी बेड़ा खड़ा कर चुका है. और अब उसने अपने विध्वसंक बमवर्षक विमान उड़ाए हैं. दूसरी तरफ खलीफा की सेना समंदर में बारूद बिछा रही है. ईरान और अमेरिका की तैयारियों के बीच आज की बड़ी खबर ये है कि खलीफा पर हमले में अमेरिका के साथ 7 देश शामिल होने जा रहे हैं.

आज हम आपको बताएंगे कि वे 7 देश कौन-कौन हैं..जो ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने वाले हैं. इन देशों की ताकत क्या है? ये ईरान की मुश्किलें कैसे बढ़ाने वाले हैं? लेकिन उससे पहले आपको ईरान के लिए अमेरिका की नई धमकी सुननी चाहिए.

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धमकी देने वाले..ट्रंप के करीबी अधिकारी और अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ हैं. ट्रंप के बगल में बैठकर उनके रक्षा मंत्री अगर अमेरिकी सैन्य क्षमता की व्याख्या कर रहे हैं तो इसे तेहरान बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेगा. क्योंकि एक तरफ अमेरिकी रक्षा मंत्री धमकी दे रहे हैं और दूसरी तरफ ईरान की तरफ अमेरिका के महाविनाशक बॉम्बर उड़ रहे हैं.

पिछले 24 घंटे में एक-दो नहीं बल्कि चार बी-52 बमबर्षक विमानों ने उड़ान भरी है. ये विमान अमेरिका से हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के लिए उड़े. जाहिर तौर पर इसे खलीफा के खिलाफ ट्रंप की आक्रामकता के तौर पर देखा जा रहा है.

मित्रो विशेषज्ञ बी-52 बॉम्बर की उड़ान को हमले की तैयारी के तौर पर इसलिए भी देख रहे हैं क्योंकि मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना के अतिरिक्त युद्धपोत तैनात हैं. इस वक्त एक दो नहीं बल्कि 8 विध्वंसक बेड़ा ईरान के ईर्द-गिर्द खड़े हैं.

यूएसएस माइकल मर्फी , यूएसएस स्प्रुआंस युद्धपोत और यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में खड़े हैं. ये तीनों, यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत की सुरक्षा में है.
 यूएसएस डेल्बर्ट डी. ब्लैक युद्धपोत लाल सागर में खड़े हैं.
यूएसएस मिट्शर और यूएसएस मैकफॉल जंगी बेड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तैनात है.
यूएसएस बल्केली और यूएसएस रूजवेल्ट पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात है.

इन तैनाती का उद्देश्य स्पष्ट है. मित्रो ईरान की मुश्किलें सिर्फ  बी-52 जैसे बॉम्बर या फिर युद्धपोत की तैनाती नहीं बढ़ा रही है, बल्कि अमेरिका के साथियों ने भी खलीफा के खिलाफ चक्रव्यूह बनाना शुरू कर दिया है. जो यूरोपीय देश ट्रंप के खिलाफ दिख रहे हैं, वे भी ईरान को पर हमले के समय अमेरिका का साथ देने का संकेत दे रहे हैं. अमेरिका मीडिया का दावा है कि एक-दो नहीं बल्कि 7 देशों के साथ मिलकर ट्रंप ईरान पर हमला करने वाले हैं.

अब हम आपको बताना चाहेंगे, वे 7 देश कौन-कौन हैं, जो ईरान पर हमले के वक्त कैसे अमेरिका का साथ देंगे.

सबसे पहले हम उस इजरायल का जिक्र करेंगे जिसका पावर इंडेक्स में ग्लोबल रैंकिंग 15 है लेकिन ये ईरान का सबसे बड़ा दुश्मन है. पिछले साल भी ईरान पर सीधा हमला किया था. ईरान की एयर डिफेंस  मिसाइल फैसिलिटी को भारी नुकसान पहुंचा चुका है. अमेरिका के साथ मिलकर इजरायल ईरान के लिए सबसे घातक बन जाएगा.

दूसरा नाम फ्रांस का है जिसका पावर इंडेक्स में ग्लोबल रैकिंग 6 है. मिडिल-ईस्ट में पहले से ही इसकी मौजूदगी है और ये अमेरिका के साथ मिलकर ईरान की नौसेना और एयरफोर्स को तबाह कर सकती है.

तीसरा नाम ब्रिटेन का है जिसका पावर इंडेक्स में ग्लोबल रैंकिंग 8 है. अमेरिका का ये सबसे करीबी सहयोगी देश मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ खुफिया और नैसैनिक सपोर्ट दे सकता है. ब्रिटेन अपना एक टाइफून जेट कतर में तैनात भी कर चुका है.
मित्रो इजरायल, फ्रांस, ब्रिटेन..सिर्फ ये तीन देश अगर अमेरिका के साथ आ गए तो ईरान के लिए बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी.

इसके अलावा इटली भी है, जिसका पावर इंडेक्स में ग्लोबल रैंक 10 है और ये ईरान के खिलाफ अमेरिका को लॉजिस्टिक्स और एयर सपोर्ट देगा.

जर्मनी भी अमेरिका का साथ देगा, जिसका पावर इंडेक्स में ग्लोबल रैंक 14 है, ये भी अमेरिका को ईरान के खिलाफ लॉजिस्टिक्स और खुफिया इनपुट दे सकता है.

इसके अलावा जॉर्डन. जो पावर इंडेक्स में तो 60वें नंबर पर आता है लेकिन ये ईरान के लिए बहुत बड़ी क्षेत्रीय स्तर की मुसीबत बनेगा. पिछले साल जब इजरायल का ईरान के साथ युद्ध हुआ था तब जॉर्डन ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमलों को इंटरसेप्ट करने में मदद की थी.

सातवां देश सीरिया है जिसका पावर इंडेक्स में तो 130वां रैंक है, लेकिन ये मुस्लिम देश परसेप्शन के लिए लिहाज से ईरान के लिए घातक साबित होगा.

इससे स्पष्ट है कि युद्ध की स्थिति में अमेरिका के साथ ये 7 देश ईरान के लिए स्ट्रैटेजिक आपदा साबित होंगे. हालांकि इसका अंदाज़ा ईरान को भी है. ईरान जानता है कि ट्रंप का चरित्र क्या है? उनकी मंशा क्या है? लेकिन ईरान ट्रंप और उनके साथियों के सामने झुकने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है. ईरान की सेना ने ट्रंप को जो जवाब दिया है उसने मुस्लिम देशों में खौफ बढ़ा दिया है. सबसे पहले आपको सुनाते हैं कि ईरान की सेना के प्रवक्ता ने क्या चेतावनी दी है?

आचार्य चाणक्य ने कहा कि 'शत्रु को सीधे परास्त न कर सको, तो उसके आश्रय और को निर्बल करो'. और ईरान के पास यही एकमात्र रास्ता बचा है.

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