US Gaza Peace Board Member Countries Fees: आपने एक कहावत तो सुनी होगी कि पड़ोसी की चीजों पर जबरन मालिक बनना. अमेरिका आजकल कुछ ऐसा ही कर रहा है. वह न केवल दूसरे की चीजों को जबरन अपना बता रहा है बल्कि उससे पैसा कमाने का जुगाड़ भी कर लिया है. हम यहां पर बात गाजा की कर रहे हैं. जो इजरायल-हमास के बीच कई महीनों तक चली जंग में खंडहर हो चुका है. अब इसी गाजा में कथित शांति स्थापित करने और दोबारा से विकास कार्य शुरू करने के लिए यूएस ने गाज़ा शांति बोर्ड (Gaza Peace Board) बनाने जा रहा है.
'गाजा पीस बोर्ड में शामिल होना है तो पैसा दो'
यह बोर्ड कैसा होगा और इसकी कार्य प्रणाली क्या होगी. इस संबंध में एक मसौदा चार्टर बनाकर 60 देशों को भेजा गया है. इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस बोर्ड में विभिन्न देशों को सदस्य देश के रूप में शामिल करेंगे. उनकी सदस्यता 3 साल के लिए होगी. अगर वे देश 3 साल से ज्यादा समय के लिए सदस्य बने रहना चाहते हैं तो उन्हें यूएस को 1 अरब अमेरिकी डॉलर चुकाना होगा. भारतीय रुपयों में बात करें तो यह रकम 8 हजार करोड़ रुपये बनती है.
ट्रंप प्रशासन ने कई देशों को भेजा पत्र
ड्राफ्ट में कहा गया है कि अगर संबंधित देश ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी सदस्यता का नवीनीकरण बोर्ड के अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करेगा. मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो देश चार्टर लागू होने के पहले साल में अमेरिका को 1 अरब डॉलर नकद का भुगतान कर देंगे, उन पर तीन वर्ष की सीमा लागू नहीं होगी. ऐसे देशों को लंबे समय तक बोर्ड का सदस्य बने रहने की अनुमति दी जाएगी.
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस प्रस्तावित पीस बोर्ड का मकसद गाजा में शांति स्थापना और पुनर्निर्माण के लिए इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म तैयार करना हैह. हालांकि, इस वित्तीय शर्त को लेकर कई देशों में असंतोष देखा जा रहा है. कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, कई सारे देश खासकर इस्लामिक कंट्रीज इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहते हैं.
क्या मध्यम आय वाले देश दे पाएंगे 1 बिलियन डॉलर?
हालांकि मध्यम आय वाले देश होने की वजह से इतनी बड़ी राशि दे पाना उनके लिए संभव नहीं है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इस प्रस्तावित बोर्ड पर अमीर देशों का दबदबा हो सकता है. एक्सपर्टों का कहना है कि इस योजना से गाजा पुनर्निमाण के लिए फंड की जरूरत तो पूरी हो सकती है. लेकिन सवाल ये भी है कि क्या शांति प्रक्रिया को आर्थिक योगदान से जोड़ा जाना उचित है.
फिलहाल यह चार्टर अंतिम रूप में नहीं है और विभिन्न देशों से इस पर प्रतिक्रिया मांगी गई है. आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर कूटनीतिक स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है. तब पता चल पाएगा कि यह बोर्ड आखिर क्या रूप लेने जा रहा है.
(एजेंसी रॉयटर्स)

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