Inspiring Success Story: अंधेरे से लड़कर रवि राज ने फैलाया प्रकाश, UPSC में सफलता की कहानी बनी प्रेरणा

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Last Updated:March 15, 2026, 08:05 IST

Inspiring UPSC success story: जब बिल्कुल अंधकार होता है तभी इंसान सितारे देख पाता है... बिहार के एक गांव से निकलकर रवि राज ने वह कर दिखाया जो लाखों युवाओं का सपना होता है. दृष्टि बाधित होने के बावजूद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया. उनकी यात्रा केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य और विश्वास का उदाहरण है.

अंधेरे से लड़कर रवि राज ने फैलाया प्रकाश, UPSC में सफलता की कहानी बनी प्रेरणाZoom

नवादा के दृष्टिबाधित रवि राज ने यूपीएससी 2025 में 20वीं रैंक हासिल की.

नवादा. बिहार के नवादा जिले के छोटे से महुली गांव में जन्मे रवि राज की जिंदगी शुरू से ही चुनौतियों भरी रही. जन्म के बाद कुछ साल सामान्य गुजरे. खेलना, सीखना और पढ़ना सब चलता रहा. लेकिन, पांच साल की उम्र में रवि राज अपनी आंखों की रोशनी में परिवर्तन अनुभव करने लगा. जिस रवि राज का बचपन सामान्य बच्चों की तरह ही शुरू हुआ था. गांव में दोस्तों के साथ समय बिताना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. वही रवि राज आंखों की समस्या से परेशान रहने लगा. स्कूल के शुरुआती वर्षों में ही शिक्षकों ने ध्यान दिया कि उन्हें ब्लैकबोर्ड पर लिखी बातें नोटबुक में लिखने में कठिनाई होती है. इसके बाद जब जांच हुई तो पता चला कि उनकी आंखों की नसें कमजोर हो रही हैं और समय के साथ उनकी दृष्टि लगातार कम होती चली गई.

धीरे धीरे खत्म होती गई आंखों की रोशनी

समय के साथ रवि की आंखों की रोशनी और कम होती गई. छठी कक्षा के आसपास किताबें पढ़ना मुश्किल हो गया. नौवीं कक्षा तक आते आते लिखना भी लगभग बंद हो गया. बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते वे अकेले कहीं आना जाना भी छोड़ चुके थे. इस बदलाव ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया. उनका पसंदीदा खेल क्रिकेट भी उनसे दूर हो गया. लेकिन इसी दौर में उनकी मां विभा सिन्हा उनके लिए आंख और हाथ बन गईं. वे रोज कई घंटों तक किताबें पढ़कर सुनातीं और रवि के बोले हुए जवाब कॉपी में लिखतीं. इसी सहयोग ने उनके सपनों को जिंदा रखा.

मां बनी प्रेरणा और जीवन की सबसे बड़ी ताकत

रवि राज की तैयारी का तरीका अनोखा था. उनकी मां किताबें पढ़तीं और रवि सुनकर विषय समझते. जब लिखने की जरूरत होती तो वह बोलते और उनकी मां लिखतीं. कई बार घर का काम करते हुए भी वह यूट्यूब लेक्चर चलाकर रवि को पढ़ने में मदद करती थीं. उनके पिता किसान हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने रवि के सपने को कभी कमजोर नहीं होने दिया. यही कारण था कि रवि हमेशा कहते हैं कि उनकी सफलता के असली वास्तुकार उनके माता पिता हैं. रवि अपनी मां के लिए कहते हैं-
खोया मैं जिस भी राह वो मंजिल पर जा खुली;
की रुसवाइयां मैंने पर मोहब्बत मुझे मिली,
बद्दुआओं ने जब जब काटा है मेरा रास्ता,
उससे ही पहले मेरी मां की दुआएं निकलीं!

मां विभा सिन्हा बनी आंखें, बेटे रवि राज बने मिसाल. UPSC में हासिल 20वीं रैंक हासिल कर बनाया इतिहास.

असफलताओं से नहीं टूटा हौसला

UPSC की राह रवि के लिए आसान नहीं थी. कई बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा. शुरुआती प्रयासों में कभी मुख्य परीक्षा में असफलता मिली तो कभी प्रारंभिक परीक्षा में. इस दौरान स्वास्थ्य समस्याओं और परीक्षा में लेखक यानी स्क्राइब से जुड़ी परेशानियों ने भी उन्हें निराश किया. एक समय ऐसा भी आया जब वे गहरे अवसाद में चले गए और मानसिक स्वास्थ्य को संभालने के लिए उन्हें दवा और थेरेपी का सहारा लेना पड़ा, बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी.

BPSC से मिली पहली बड़ी सफलता

लगातार संघर्ष के बाद रवि राज ने 69वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और राजस्व अधिकारी के पद के लिए चुने गए. इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को नई ताकत दी. इसके बाद UPSC में भी उनका सफर आगे बढ़ा. पहले उन्हें 182वीं रैंक मिली और भारतीय राजस्व सेवा में चयन हुआ. लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी और अगले प्रयास में सीधे 20वीं रैंक हासिल कर ली.

UPSC परीक्षा में 20वीं रैंक लाने वाले रवि राज की कहानी सिखाती है Perseverance dedication hard work का मंत्र.

एक सोच जिसने बदल दी जिंदगी

रवि राज अक्सर कहते हैं कि उनकी सफलता का मंत्र एक ही है- To have no option is the best option. उनके अनुसार जब आपके पास केवल एक ही लक्ष्य होता है तो पूरी ऊर्जा उसी दिशा में लगती है. perseverance, dedication और hard work ने ही उन्हें मंजिल तक पहुंचाया.

युवाओं के लिए प्रेरणा बने रवि राज

रवि राज की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं है. यह उस विश्वास की कहानी है जो कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद को जिंदा रखता है. आज रवि राज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उनका मानना है कि जीवन में दृष्टि से ज्यादा जरूरी दृष्टिकोण होता है. अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी बाधा सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती.
रवि राज की यात्रा यही संदेश देती है कि-
राह संघर्ष की जो चलता है,
वो ही संसार को बदलता है.
जिसने रातों से है जंग जीती,
सुबह सूर्य बनकर वही चमकता है!

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Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट...और पढ़ें

First Published :

March 15, 2026, 08:05 IST

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