Last Updated:January 20, 2026, 13:16 IST
Magh Mela 2026, who is Swami Avimukteshwaranand: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों फिर चर्चा में हैं. प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन उन्हें संगम स्नान से रोक दिए जाने पर बड़ा विवाद हो गया. पुलिस और उनके शिष्यों के बीच झड़प हुई. इस घटना के बाद शंकराचार्य ने सरकार पर साधु-संतों का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाए, लेकिन ये पहली बार नहीं है जब शंकराचार्य विवादों में आए हैं.वे इसके पहले भी कई बार अपनी मुखरता और बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं. आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी. वह मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं, पढ़ाई कहां की, कब संत बने और कब-कब विवादों में रहे?

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों फिर से सुर्खियों में हैं. प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन उन्हें संगम स्नान से रोकने पर बवाल हो गया. पुलिस और उनके शिष्यों के बीच झड़प हुई. जिसके बाद से उन्होंने अनशन शुरू कर दिया.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मूल नाम उमाशंकर उपाध्याय है. उनका जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था.वे एक ब्राह्मण परिवार से हैं. बचपन में प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ही हुई. बाद में वे गुजरात चले गए. वहां धर्म और राजनीति में समान रुचि रखने वाले स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी राम चैतन्य के संपर्क में आए.

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand:ब्रह्मचारी राम चैतन्य के कहने पर उन्होंने संस्कृत की पढ़ाई शुरू की.उमाशंकर उपाध्याय ने वाराणसी के मशहूर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण की. पढ़ाई के दौरान वे छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे.1994 में उन्होंने छात्रसंघ का चुनाव जीता था. उन्होंने संस्कृत व्याकरण, वेद, पुराण, उपनिषद, आयुर्वेद, वेदांत और अन्य धार्मिक ग्रंथों की गहन पढ़ाई की.
Add News18 as
Preferred Source on Google

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand:पढ़ाई पूरी करने के बाद 1990 के दशक में उन्होंने संन्यास लिया. स्वामी करपात्री जी के बीमार होने पर वे उनकी सेवा में लगे और उनके निधन तक साथ रहे. इसी दौरान वे ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के संपर्क में आए. संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें 15 अप्रैल 2003 को दंड सन्यास की दीक्षा दी गई. इसके बाद उनका नाम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रखा गया.

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand:उनके गुरु जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. सितंबर 2022 में उनके निधन के बाद उनके दोनों पीठों के नए शंकराचार्य की घोषणा हुई. ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बने, जबकि शारदा पीठ द्वारका का शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती बने.<br />शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत में स्नातक (BA) और स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

इसके अलावा उन्होंने वेदांत, पुराण और ज्योतिष शास्त्र में भी विशेषज्ञता प्राप्त की. वे एक विद्वान के रूप में जाने जाते थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद 1990 के दशक में उन्होंने संन्यास ले लिया. 1996 में वे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य बने. ज्योतिषपीठ जोशीमठ (उत्तराखंड) में स्थित है जो आदि शंकराचार्य की चार प्रमुख पीठों में से एक है. संत बनने के बाद वे धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हो गए. वे ज्ञानवापी मस्जिद मामले और राम मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक मुद्दों पर अक्सर बोलते रहे हैं.

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand:काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मंदिर तोड़ने का विरोध (2021):अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के दौरान दर्जनों पुराने मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया. उन्होंने इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताया और कहा कि विकास के नाम पर मंदिरों को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए.

जून 2022: ज्ञानवापी कॉम्प्लेक्स में पूजा का ऐलान और भूख हड़ताल:उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद कॉम्प्लेक्स में पूजा करने का ऐलान किया, लेकिन पुलिस ने रोक दिया. इसके विरोध में उन्होंने 108 घंटे की भूख हड़ताल की जो मीडिया में खूब चर्चा में रही. 11 सितंबर 2022 को उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उन्होंने वह ज्योतिष्पीठ के नए शंकराचार्य बने. इसको लेकर भी काफी बवाल मचा.जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया.

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand: जनवरी 2023: जोशीमठ में भूमि धंसाव पर PIL: उन्होंने जोशीमठ में भूमि धंसाव पर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की और जलवायु परिवर्तन के खतरे पर बात की.ये दिखाता है कि वो धार्मिक मुद्दों के अलावा पर्यावरण पर भी बोलते हैं.इसी तरह वह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में न्योता मिलने पर भी नहीं शामिल हुए और उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के अधूरे होने की आलोचना की.

Swami Avimukteshwaranand: जुलाई 2024:महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को धोखा दिए जाने पर बोले कि धोखा सबसे बड़ा पाप है.उन्होंने कहा कि ठाकरे फिर CM बनें तो लोगों का दर्द कम होगा. PM मोदी को दुश्मन न बताते हुए कहा कि गलती पर सुधार जरूरी है.स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने उन्हें फेक बाबा कहा और कांग्रेस का समर्थन होने का आरोप लगाया. प्रियंका गांधी के 2022 के लेटर का जिक्र किया, जिसमें उन्हें शंकराचार्य कहा गया था. अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे खारिज किया.अविमुक्तेश्वरानंद ने केदारनाथ मंदिर से 228 किलो सोना गायब होने का आरोप लगाया और इसे गोल्ड स्कैम कहा.

Swami Avimukteshwaranand, Adi Shankaracharya: जुलाई 2025: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अगर योगी CM बने रहे तो स्टाम्पेड जैसी घटनाएं दोबारा होंगी. ये राजनीतिक बयान काफी विवादास्पद रहा.मालेगांव ब्लास्ट पर 'भगवा टेरर' शब्द की आलोचना की उन्होंने 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी आरोपी बरी होने पर बोले कि आतंकवाद को रंग से न जोड़ें. भगवा टेररिस्ट की पूजा करोगे क्या? कहकर कहा कि टेररिस्ट बस टेररिस्ट होता है.महाराष्ट्र सरकार ने स्टेट गेस्ट स्टेटस रद्द किया. उनके एंटी-बीजेपी बयानों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनका स्टेट गेस्ट स्टेटस रद्द कर दिया. गोविंदानंद ने उन पर FIR की मांग की.

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज के माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर बड़ा विवाद हुआ. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान के लिए पहुंचे. वे अपने करीब 200 शिष्यों के साथ रथ और पालकी पर सवार होकर संगम तट की ओर बढ़े, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. पुलिस ने कहा कि पैदल चलकर स्नान करें. शिष्यों ने इस पर विरोध किया,जिससे झड़प हो गई. पुलिस ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति के जत्था आया था और बैरिकेड तोड़े गए.

Magh Mela 2026, Swami Avimukteshwaranand:शंकराचार्य ने दावा किया कि पुलिस ने बुजुर्ग संतों और बच्चों को भी धक्का दिया और मारपीट की. अब माघ मेला में मौनी अमावस्या पर प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें संगम पर स्नान करने से रोका गया. कहा कि ये उनकी हत्या की साजिश थी, पुलिस ने ब्रह्मचारियों और महिलाओं को पीटा. घाटों की सफाई पर भी सवाल उठाया. पुलिस से झड़प हुई, क्योंकि वो रथ से उतरने से मना कर रहे थे.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

1 hour ago
