'शादी से पहले किसी पर भरोसा न करें': प्री-मैरिटल सेक्स पर सुप्रीम कोर्ट की युवाओं को ह‍िदायत

1 hour ago

होमताजा खबरदेश

'शादी से पहले किसी पर भरोसा न करें': प्री-मैरिटल सेक्स पर SC की ह‍िदायत

Last Updated:February 16, 2026, 19:24 IST

प्री मैर‍िटल सेक्‍स पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्‍पणी की है. अदालत ने युवाओं को आगाह करते हुए कहा क‍ि शादी से पहले क‍िसी पर भरोसा न करें, जहां तक शारीर‍िक संबंध बनाने का मामला हो.

 प्री-मैरिटल सेक्स पर SC की ह‍िदायतZoom

(फाइल फोटो)

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान युवाओं को शादी से पहले फ‍िज‍िकल र‍िलेशन (Pre-marital Sex) को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शादी से पहले एक लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए पूरी तरह अजनबी होते हैं, इसलिए उन्हें शारीरिक संबंध बनाने में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए. शादी से पहले क‍िसी पर भी भरोसा करने से बचना चाह‍िए.

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भूइयां की पीठ ने एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की. उस व्यक्ति पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप है. महिला का आरोप है कि उसकी मुलाकात आरोपी से 2022 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी. आरोपी ने दिल्ली और फिर दुबई में शादी का झूठा वादा करके उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए. महिला ने यह भी दावा किया कि आरोपी ने उसकी सहमति के बिना अश्लील वीडियो रिकॉर्ड किए और उन्हें वायरल करने की धमकी दी. महिला को बाद में पता चला कि उस व्यक्ति ने जनवरी 2024 में पंजाब में किसी दूसरी महिला से शादी कर ली है.

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान जब पीठ को पता चला कि महिला आरोपी के साथ दुबई भी गई थी, तो उन्होंने महिला पर सवाल भी उठाए. न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, शायद हम पुराने ख्यालात के हो सकते हैं, लेकिन शादी से पहले एक लड़का और लड़की अजनबी होते हैं. उन्हें शारीरिक संबंधों में शामिल होने से पहले बहुत सावधान रहना चाहिए.

अदालत ने जोर देकर कहा, शादी से पहले किसी को भी किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिए. पीठ ने नोट किया कि यह मामला सहमति से बने संबंधों (Consensual Relationship) का प्रतीत होता है. अदालत ने कहा कि अगर महिला अपने उसूलों को लेकर इतनी सख्त थी, तो उसे शादी से पहले साथ (दुबई) नहीं जाना चाहिए था.

अदालत की इस टिप्पणी के क्या हैं मायने?

अदालत अक्सर ऐसे मामलों में ‘सहमति’ को प्राथमिकता देती है जहां दोनों पक्ष वयस्क हों और लंबे समय तक संबंध में रहे हों. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि हर बार शादी का वादा टूटना दुष्कर्म नहीं होता, खासकर यदि संबंध शुरू से ही आपसी सहमति पर आधारित हों. अदालत ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक समाज में भी युवाओं को अपने निजी फैसलों की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए. ‘अजनबी’ शब्द का इस्तेमाल कर कोर्ट ने आगाह किया कि कानूनी सुरक्षा से ज्यादा व्यक्तिगत विवेक जरूरी है. पीठ ने कहा कि ऐसे मामले, जो आपसी सहमति के लगते हैं, उनमें लंबी सुनवाई और सजा के बजाय समझौता बेहतर विकल्प है. कोर्ट ने आरोपी के वकील को मुआवजे की संभावना तलाशने और मामले को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का सुझाव दिया है.

About the Author

Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें

Location :

Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

February 16, 2026, 19:24 IST

Read Full Article at Source