Last Updated:March 09, 2026, 14:04 IST
S Jaishankar Clarifies Government Stand In Parliament: इजरायल-अमेरिका और ईरान के संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है. भारत का रुख तटस्थ है. विदेश मंत्री जयशंकर ने संसद में इस मसले पर सरकार के रुख से देश को अवगत करा दिया. लेकिन, विपक्ष खासकर कांग्रेस का स्टैंड ढुलमुल दिखता है. वह ईरान की तरफ झुकाव चाहती है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या कांग्रेस भारत को जंग में धकेलना चाहती है?

S Jaishankar Clarifies Government Stand In Parliament: पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक राजनीति को हिला दिया है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष ने न केवल हजारों जानें लीं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी तबाह कर दिया. भारत हमेशा से तटस्थता और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता आया है. इस बार भी वह किसी एक पक्ष के साथ नहीं खड़ा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में दिए अपने बयान में इस स्टैंड को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया. लेकिन देश के अंदर विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, मोदी सरकार पर ईरान के पक्ष में खड़े होने का दबाव डाल रही है. कांग्रेस इजरायल के साथ भारत के मजबूत रिश्तों की भी मुखालफत करती रही है. सवाल उठता है- आखिर कांग्रेस भारत को इस जंग में क्यों धकेलना चाहती है?
सबसे पहले जयशंकर के बयान को समझें. उन्होंने संसद को अवगत कराया कि संघर्ष में इजरायल-अमेरिका और ईरान के अलावा कई खाड़ी देश शामिल हो चुके हैं. ईरान के शीर्ष नेता हताहत हुए, बुनियादी ढांचा तबाह हुआ. भारत ने शुरुआत से ही संयम, संवाद और कूटनीति की अपील की. 28 फरवरी को जारी बयान में सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में भारतीय समुदाय की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर प्रभाव की समीक्षा की गई. जयशंकर ने बताया कि खाड़ी में एक करोड़ भारतीय रहते हैं, ईरान में हजारों छात्र और कर्मचारी. क्षेत्र से 200 अरब डॉलर का सालाना व्यापार होता है. दुखद रूप से, जहाजों पर हमलों में दो भारतीय नाविक मारे गए, एक लापता है. भारत की प्रतिक्रिया सक्रिय रही. जून 2025 के 12-दिवसीय युद्ध से ही सतर्कता बरती गई. जनवरी 2026 से ईरान यात्रा पर सलाह जारी की गई, दूतावासों ने हेल्पलाइन चलाई. संघर्ष के बाद 67,000 भारतीय स्वदेश लौटे. प्रधानमंत्री ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, इजरायल आदि नेताओं से बात की. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से भी संवाद किया. यहां तक कि ईरानी जहाज IRIS LAVAN को कोच्चि में शरण दी गई.
भारत की संतुलित विदेश नीति
जयशंकर ने अपने भाषण में तीन सिद्धांत बताए: शांति के लिए संवाद, भारतीय समुदाय की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा. यह बयान भारत की संतुलित विदेश नीति का प्रमाण है, न किसी पक्ष का समर्थन, न विरोध, बल्कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि. अब कांग्रेस की भूमिका पर नजर डालें. कांग्रेस सरकार पर ईरान के पक्ष में खड़े होने का दबाव बना रही है. यह दबाव राजनीतिक रणनीति से उपजा लगता है. कांग्रेस का ऐतिहासिक स्टैंड अरब देशों और ईरान के साथ मजबूत संबंधों का रहा है, खासकर नेहरू-इंदिरा युग में.
इजरायल के साथ मोदी सरकार के करीबी रिश्ते हैं. उसके साथ रक्षा सौदे, तकनीकी सहयोग को कांग्रेस एक तरह से मुस्लिम-विरोधी बताती है. घरेलू राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिए कांग्रेस ईरान (शिया-बहुल) के पक्ष में दिखना चाहती है. पश्चिम एशिया की जंग को कांग्रेस भारत की आंतरिक राजनीति से जोड़ रही है, जहां मोदी को इस्लामोफोबिक ठहराने की कोशिश है.
कांग्रेस का स्टैंड भारत को जंग में धकेलने वाला
लेकिन क्या यह राष्ट्रीय हित में है? कांग्रेस का यह स्टैंड भारत को अनावश्यक रूप से जंग में धकेल सकता है, जो ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों को खतरे में डाल देगा. विपक्ष का दबाव लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. जयशंकर का बयान इसी बात का प्रमाण है कि भारत की नीति व्यावहारिक है. इसमें इजरायल से रक्षा सहयोग, ईरान से ऊर्जा, खाड़ी से व्यापार शामिल है. कांग्रेस का ईरान-समर्थन दबाव शायद चुनावी लाभ के लिए है, लेकिन यह भारत की तटस्थता को कमजोर कर सकता है.
वैश्विक स्तर पर, अमेरिका-इजरायल गठबंधन मजबूत है, जबकि ईरान अलग-थलग. भारत को किसी पक्ष में खड़े होने से क्या फायदा? जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत शांति चाहता है, क्योंकि हमारा हित स्थिरता में है. कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि जंग में पक्ष लेना राष्ट्रीय हितों की बलि है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
March 09, 2026, 14:00 IST

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