PHOTOS: ओमान की खाड़ी में भारत ने जिस स्‍टील्‍थ वॉरशिप को उतारा, वह INS सूरत कितना ताकतवर, ब्रह्मोस-आकाश से लैस

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ओमान की खाड़ी में भारत ने जिस स्‍टील्‍थ वॉरशिप को उतारा, वह कितना पावरफुल

Last Updated:March 06, 2026, 11:47 IST

INS Surat Stealth Guided Missile Destroyer: अमेरिका-इजरायल ने जबसे संयुक्‍त रूप से ईरान पर हमला बोला है, वेस्‍ट एशिया के साथ ही पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ गई हैं. ऑयल और गैस शिपिंग कॉरिडोर के लिए बेहद जरूरी होर्मुज स्‍ट्रेट पर व्‍यापक प्रभाव पड़ा है. रिपोर्ट्स की मानें तो इस जलडमरूमध्‍य से शिपिंग 90 फीसद तक प्रभावित हुआ है. इससे भारत समेत एशिया के विभिन्‍न देशों में तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है. भीषण तनाव और एरियल स्‍ट्राइक के बीच भारत ने होर्मुज स्‍ट्रेट के मुहाने पर अपना स्‍टील्‍थ डिस्‍ट्रॉयर INS सूरत तैनात कर दिया है. INS सूरत किसी भी हालात से निपटने में सक्षम वॉरशिप है. ओमान की खाड़ी में इसकी तैनाती से तरह-तरह के ख्‍याल उठने लगे हैं.

INS Surat Stealth Guided Missile Destroyer: भारत ने ओमान की खाड़ी में स्‍टील्‍थ गाइडेड मिसाइल डिस्‍ट्रॉयर INS सूरत को तैनात किया है. यह डिप्‍लॉयमेंट ऐसे वक्‍त में हुई है, जब हिन्‍द महासागर (Indian Ocean) में अमेरिकी सबमरीन ने ईरान के डेना युद्धपोत को टॉरपीडो यानी अटैक कर उसे ध्‍वस्‍त कर दिया है. इससे तनाव और भी बढ़ गया है. तमाम परिस्थितयों को देखते हुए यह ख्‍याल आना लाजिमी है कि इंडियन नेवी ने आखिरकार INS सूरत को ओमान की खाड़ी में क्‍यों तैनात किया है? इसका मौजूदा तनाव से किसी तरह का संबंध है? इसका क्‍या उद्देश्‍य है? (फाइल फोटो/PTI)

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपनी नौसैनिक मौजूदगी मजबूत कर दी है. भारतीय नौसेना ने अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS सूरत को ओमान की खाड़ी में तैनात किया है. यह तैनाती क्षेत्र में बढ़ते जोखिमों के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर भारतीय नागरिकों की निकासी के लिए की गई है. दरअसल, हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के नौसैनिक ठिकानों, सैन्य अड्डों और परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों की खबरों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है. इस संघर्ष का असर अब केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं और प्रमुख समुद्री मार्गों पर भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है. ऐसे में कई देशों ने क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है. भारत भी इस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है. (फाइल फोटो/PTI)

भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत INS सूरत (D69) जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था. यह स्वदेशी प्रोजेक्ट-15B के तहत बना एक गाइडेड मिसाइल स्टील्थ डिस्ट्रॉयर है और इसे भारत के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत का पहला ऐसा युद्धपोत है, जिसे इंटीग्रेटेड AI-ड्रिवन सिस्टम के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे निगरानी, वॉर मैनेजमेंट और रखरखाव की क्षमता काफी बढ़ जाती है. INS सूरत में लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है. इसमें सुपरसोनिक ब्रह्मोस, बराक-8, आकाश मिसाइल, पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और हैवीवेट टॉरपीडो ट्यूब लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार लगे हैं. ये हथियार इसे समुद्र, हवा और पानी के नीचे से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम बनाते हैं. (फाइल फोटो/PTI)

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INS सूरत विशाखापत्तनम क्लास का चौथा और अंतिम जहाज है. इसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने बनाया है. जहाज में कम्बाइंड गैस एंड गैस (COGAG) प्रोपल्‍सन सिस्‍टम यानी प्रणोदन प्रणाली लगी है, जिससे यह 30 नॉट्स यानी करीब 56 किमी प्रति घंटा से अधिक की गति हासिल कर सकता है. INS सूरत की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी लगभग 8000 नॉटिकल मील (14816 किलोमीटर) तक है और यह समुद्र में लगातार 45 दिनों तक तैनात रह सकता है. अत्याधुनिक तकनीक, स्टील्थ डिजाइन और शक्तिशाली हथियारों के कारण इसे दुनिया के सबसे उन्नत स्वदेशी विध्वंसक जहाजों में माना जाता है. (फाइल फोटो/PTI)

INS सूरत भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में से एक है. विशाखापत्तनम क्लास का यह चौथा डिस्ट्रॉयर लगभग 7,400 टन वजनी और 163 मीटर लंबा है. यह युद्धपोत चार गैस टर्बाइन इंजनों की मदद से रफ्तार पकड़ता है. इसकी स्टील्थ तकनीक इसे दुश्मन के रडार से बचने में मदद करती है, जिसके कारण इसे इनविजिबल हंटर भी कहा जाता है. इस युद्धपोत में अत्याधुनिक हथियार और निगरानी प्रणाली लगी हुई हैं. इसमें दो वर्टिकल लॉन्च सिस्टम हैं, जिनसे 32 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी जा सकती हैं. इसके अलावा इसमें 16 ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें भी लगी हैं, जो दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. सबमरीन से निपटने के लिए इसमें एडवांस्‍ड टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर भी लगाए गए हैं. INS सूरत को भारत का पहला एआई कैपेबल युद्धपोत भी माना जाता है, जिसमें नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन सिस्टम लगा है. (फोटो: नेवी के फेसबुक अकाउंट से साभार)

भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारत के लगभग 50 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है, जबकि एलपीजी की लगभग 80 से 85 प्रतिशत आपूर्ति भी इसी मार्ग से होती है. इसके अलावा अदन की खाड़ी से होकर भारत का लगभग 90 प्रतिशत समुद्री व्यापार गुजरता है. यदि इन मार्गों में किसी तरह की बाधा आती है तो जहाजों को अफ्रीका के चारों ओर लंबा रास्ता लेना पड़ सकता है, जिससे ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की लागत काफी बढ़ सकती है. भारतीय नौसेना का रिकॉर्ड भी ऐसे संकटों के दौरान राहत और निकासी अभियानों में काफी मजबूत रहा है. वर्ष 2015 में यमन में गृहयुद्ध के दौरान चलाए गए ऑपरेशन राहत के तहत 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया था. साल 2023 में सूडान संकट के दौरान ऑपरेशन कावेरी के तहत भारतीय नागरिकों को सुरक्षित देश वापस लाया गया था. वहीं, 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु के जरिए खाड़ी देशों, मालदीव और श्रीलंका से लगभग 4,000 भारतीयों को जहाजों के माध्यम से वापस लाया गया था. (फोटो: नेवी के फेसबुक अकाउंट से साभार)

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First Published :

March 06, 2026, 11:47 IST

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