S-400 मिसाइल डील से भारत ने कैसे दोस्त रूस को साधा; खौफजदा क्यों होगा पाकिस्तान?

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S-400 मिसाइल डील से भारत ने कैसे दोस्त रूस को साधा; पाकिस्तान खौफजदा क्यों?

Last Updated:February 13, 2026, 11:45 IST

India-Russia S-400 Missile Defence Deal: भारत ने रूस से बड़ी संख्या में वह मिसाइल लेने जा रहा है, जिससे पाकिस्तान खौफ खाता है. जी हां, भारत ने रूस से 288 एस-400 मिसाइलों की ₹10,000 करोड़ की डील मंजूर की है. यह वही एस-400 मिसाइल है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी हमलों को रोका. इतना ही नहीं, इआन मिसाइलों ने पाकिस्तानी मिसाइलों को मिट्टी में मिला दिया था. यह डील ऐसे वक्त में हुई है, जब रूसी तेल पर भारत और अमेरिका के अलग-अलग दावे हैं.

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India-Russia Defence Deal: भारत S-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए रूस से 288 मिसाइल खरीदेगा. (फाइल फोटो)

S-400 Missiles: भारत अब प्रेशर पॉलिटिक्स के खेल में नहीं फंसता. भारत वही फैसले लेता है जो उसके हक और हित में होता है. चाहे अमेरिका संग ट्रेड डील हो या यूरोपीय यूनियन संग डील. भारत ने हमेशा अपने हितों को सर्वोपरि रखा है. यही कारण है कि रिश्तों में तनातनी हुई, मगर देशहित से समझौता नहीं किया. अमेरिका संग ट्रेड डील इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. अमेरिका दावा कर रहा है कि भारत उससे ही तेल खरीदेगा. रूस से नहीं खरीदेगा. मगर भारत ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. रूस के मन में भी भारत के स्टैंड को लेकर कोई शंका नहीं है. यही कारण है कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, यह केवल अमेरिका कह रहा है. इस बीच भारत तेल के खेल में नहीं फंसने का फॉर्मूला ढूंढ लिया है.

दरअसल, भारत अपने पुराने दोस्त रूस को किसी भी कीमत पर नाखुश नहीं करना चाहता. यही कारण है कि ऐसे वक्त में भारत रूस के साथ बहुत बड़ी डिफेंस डील करने जा रहा है. यह डील करीब 10 हजार करोड़ रुपए की है. भारत की डीएसी यानी रक्षा खरीद परिषद ने रूस से 288 एस-400 मिसाइल की ₹10,000 करोड़ की डील को हरी झंडी दी है. यह वही एस-400 मिसाइल है, जिसने ऑपरेश सिंदूर में पाकिस्तान के इरादों को चकनाचूर कर दिया था.

क्यों अहम है यह डील?

जी हां, एस-400 सिस्टम की मिसाइलों ने मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी हवाई हमलों को धूल चटा दी थी. इससे इस्लामाबाद की नींद उड़ गई थी. चीन को भी बड़ा झटका लगा था. कारण कि पाकिस्तान ने चीनी मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था. अब आप कह सकते हैं कि यह तो होना ही था. मगर डिप्लोमेसी में टाइमिंग का महत्व होता है. जब ट्रेड डील को लेकर रूस और भारत के रिश्तों पर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे वक्त में ही भारत का रूस से एस-400 खरीदना अपने आप में मैसेज है.

क्या है एस-400 मिसाइल डील

सबसे पहले जानते हैं एस-400 डील वाली डील को. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, डीएसी यानी डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 288 एस-400 मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी. इसमें 120 शॉर्ट-रेंज और 168 लॉन्ग-रेंज मिसाइलें शामिल हैं. इसकी लागत ₹10,000 करोड़ है और फास्ट ट्रैक प्रोसीजर से जल्दी डिलीवरी होगी. ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 ने कमाल कर दिया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन मिसाइलों का यूज हुआ था. इसमें ये कुछ खर्च हो गए थे. इसकी पूर्ति के लिए ही भारत ने यह कदम उठाया है. इस एस-400 मिसाइल ने पाकिस्तानी फाइटर जेट्स, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और आर्म्ड ड्रोन्स को रोका था. भारत को अब तक तीन एस-400 सिस्टम मिले हैं, दो और जून व नवंबर 2026 में आएंगे. इंडियन एयर फोर्स पांच और एस-400 सिस्टम्स चाहती है. अब 288 एस-400 मिसाइलों की डील हुई है.

भारत देख चुका है एस-400 की ताकत

इस तरह से यह डील रूस को साधने वाली है. वैसे भी भारत रूसी मिसाइलों की ताकत देख चुका है. इसे आज नहीं तो कल खरीदा जाना ही था. कारण कि भारत के पास सिस्टम तो हैं मगर ऑपरशन सिंदूर में मिसाइल खर्च हुए थे. इसलिए अभी के मौजूदा वक्त में टाइमिंग और डिप्लोमेसी के लिहाज से यह डील अपने आप में बेहद अहम है. चाहे कोई भी डील हो भारत ने साफ कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पहले. ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 ने कई पाकिस्तानी विमान गिराए, जिससे इस्लामाबाद की हवा टाइट हो गई. इस तरह से चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ अब मुंह ताकते रह जाएगा. कारण कि चीन भी रूस का दोस्त है, मगर भारत की यह खरीद साउथ एशिया में बैलेंस बनाएगी. पाकिस्तान के चीनी जेएफ-17 जेट्स भी एस-400 के सामने फेल साबित हुए थे.

क्या है तेल का खेल?

बहरहाल, अमेरिका-भारत ट्रेड डील में रूसी तेल पर अभी तक स्पष्टता नहीं है. व्हाइट हाउस का दावा है कि भारत रूस से तेल आयात बंद करने का वादा कर रहा है. जबकि भारत की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं है. सूत्रों का कहना है कि अब भी ट्रेड डील पर नेगोशिएसंस के दौर जारी हैं. तेल पर भी भारत का स्टैंड क्लियर रहा है कि जहां से सस्ता तेल मिलेगा, वहीं से लेगा. इससे रूस को संदेश गया कि पुरानी दोस्ती अब भी कायम है. इस तरह से देखा जाए तो भारत ने स्मार्ट मूव खेला है.

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Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें

First Published :

February 13, 2026, 11:45 IST

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