UGC New Rule: CJI सूर्यकांत के मन में उठे ये 5 सवाल, तब आया फैसला; जानिए यूजीसी रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट का पूरा ऑर्डर

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Last Updated:January 30, 2026, 10:28 IST

SUPREME COURT ORDER Copy on UGC New Rule: सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026' पर रोक लगा दी. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाला बागची की बेंच ने कहा कि ये नियम अस्पष्ट (vague) हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है. नियमों से समाज में विभाजन हो सकता है और ये बहुत व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि 75 साल बाद भी क्या हम जातिविहीन समाज की ओर बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं? इसलिए नियमों को फिलहाल रोक दिया गया है और पुराने 2012 के नियम लागू रहेंगे. मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी. सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने प्रथम दृष्टया कई गंभीर सवाल उठाए, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है.

CJI के मन में उठे 5 सवाल, तब आया फैसला? जानिए UGC रेगुलेशन पर SC का पूरा ऑर्डरसुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए भेदभाव नियमों पर फिलहाल लगाई रोक, 2012 के नियम जारी रहेंगे

UGC New Rule Supreme Court Order: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 13 जनवरी को एक गाइडलाइन जारी की थी. इस नए नयिम का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’. यूजीसी के इसी नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाला बागची की बेंच ने यूजीसी के इन नियमों को अस्पष्ट बताया और कहा कि इनके दुरुपयोग की आशंका है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों से समाज में विभाजन हो सकता है और ये बहुत व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि 75 साल बाद भी क्या हम जातिविहीन समाज की ओर बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं? इसके बाद यूजीसी के नियमों को फिलहाल रोक दिया गया.

दरअस, सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के खिलाफ कई याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई. याचिका में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को चुनौती दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी. कोर्ट ने साफ कर दिया कि अभी पुराने यानी 2012 के नियम लागू रहेंगे. अब मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस बीच सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मन में कई सवाल उठे. यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कई गंभीर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि हमारी पहली नज़र में यह राय है कि विचार के लिए कानून के निम्नलिखित महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं और इनके लिए विस्तृत जांच की आवश्यकता होगी-

चलिए यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हैं.

(i) क्या विवादित रेगुलेशन में क्लॉज 3(c) को शामिल करना, जो ‘जाति-आधारित भेदभाव’ को परिभाषित करता है, 2026 के UGC रेगुलेशन के उद्देश्य और लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक उचित और तर्कसंगत संबंध रखता है? खासकर इस तथ्य को देखते हुए कि जाति-आधारित भेदभाव से निपटने के लिए कोई अलग या विशेष प्रक्रियात्मक तंत्र निर्धारित नहीं किया गया है, जैसा कि विवादित रेगुलेशन के क्लॉज़ 3(e) के तहत प्रदान की गई ‘भेदभाव’  की विस्तृत और समावेशी परिभाषा के विपरीत है.

(ii) क्या विवादित रेगुलेशन के तहत ‘जाति-आधारित भेदभाव’ की शुरुआत और संचालन का अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के भीतर सबसे पिछड़े वर्गों के मौजूदा संवैधानिक और वैधानिक उप-वर्गीकरण पर कोई असर पड़ेगा, और क्या विवादित रेगुलेशन ऐसे अत्यंत पिछड़े वर्गों को भेदभाव और संरचनात्मक नुकसान के खिलाफ पर्याप्त और प्रभावी सुरक्षा और सुरक्षा उपाय-बचाव प्रदान करते हैं?

(iii) क्या विवादित रेगुलेशन के क्लॉज 7(d) में ‘अलगाव’ शब्द को शामिल करना, हॉस्टल, क्लासरूम, मेंटरशिप ग्रुप, या इसी तरह की शैक्षणिक या आवासीय व्यवस्थाओं के आवंटन के संदर्भ में, भले ही पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण मानदंडों पर हो, एक अलग लेकिन समान’ वर्गीकरण के बराबर होगा, जिससे अनुच्छेद 14, 15 के तहत समानता और भाईचारे की संवैधानिक गारंटी के साथ-साथ भारत के संविधान की प्रस्तावना का उल्लंघन होगा?

(iv) क्या विवादित रेगुलेशन के ढांचे में भेदभाव के एक विशिष्ट रूप के रूप में ‘रैगिंग’ शब्द को छोड़ देना, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) रेगुलेशन 2012 में इसके अस्तित्व के बावजूद, एक प्रतिगामी और बहिष्करणकारी विधायी चूक है? अगर ऐसा है, तो क्या ऐसी
चूक भेदभाव के पीड़ितों के साथ असमान व्यवहार करने वाली है, जिससे न्याय तक पहुंच में असंतुलन पैदा होता है और इस तरह यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है?

(v) कोई भी अन्य सहायक प्रश्न जो इन कार्यवाही के दौरान पक्षों द्वारा उठाया जा सकता है या प्रस्तावित किया जा सकता है और जिसमें इस न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो.

सुनवाई के दौरान ये ही वो पांच सवाल थे जो सुप्रीम कोर्ट के मन में उठे थे, जिसके आधार पर अदालत ने नियमों पर रोक लगाई. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बिना इनकी गहराई से जांच के नियम लागू होने से समाज में गहरा विभाजन हो सकता है और शिक्षा संस्थानों में एकता खतरे में पड़ सकती है. अब केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया गया है कि वे जवाब दें.

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Shankar Pandit

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First Published :

January 30, 2026, 08:17 IST

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