Last Updated:February 27, 2026, 23:40 IST
सेबी ने निवेशकों को फर्जी एसटीटी नोटिस से सावधान रहने को कहा है. ठग नकली लेटरहेड और लोगो का इस्तेमाल कर वसूली की कोशिश कर रहे हैं. ‘अकाउंट हैंडलिंग’ और गारंटीड मुनाफे के नाम पर भी जाल बिछाया जा रहा है. निवेश से पहले हर जानकारी की आधिकारिक जांच करना बेहद जरूरी है.

मुंबई. मुंबई से आई एक अहम चेतावनी में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेशकों को सतर्क रहने को कहा है. बाजार नियामक ने बताया कि इन दिनों फर्जी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) नोटिस और ‘अकाउंट हैंडलिंग’ सेवाओं के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ठग लोग सेबी के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर निवेशकों को झांसा दे रहे हैं. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक चोट पहुंचा सकती है.
फर्जी एसटीटी नोटिस से फैलाया जा रहा है डर
सेबी के मुताबिक, कई लोगों को नकली नोटिस भेजे जा रहे हैं जिनमें बकाया एसटीटी चुकाने की मांग की जाती है. इन नोटिसों में सेबी अधिनियम, 1992 का हवाला देकर कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी जाती है. हैरानी की बात यह है कि ये नोटिस सेबी के नकली लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर के साथ भेजे जा रहे हैं. जबकि सच्चाई यह है कि एसटीटी हर शेयर सौदे के समय ब्रोकर द्वारा स्वतः काट लिया जाता है, जैसा कि वित्त अधिनियम 2004 में प्रावधान है. सेबी ने साफ कहा है कि वह एसटीटी को लेकर किसी भी तरह का डिमांड नोटिस जारी नहीं करता.
‘एक्सपर्ट मैनेजर’ बनकर फंसा रहे ठग
नियामक ने उन तथाकथित ‘पीएमएस सेवा प्रदाताओं’ और ‘एक्सपर्ट फंड मैनेजरों’ से भी सावधान रहने को कहा है, जो बिना जोखिम मोटा मुनाफा दिलाने का दावा करते हैं. ये लोग दूसरों के ट्रेड दिखाकर बड़े रिटर्न का लालच देते हैं और फिर अकाउंट एक्सेस मांग लेते हैं. कई मामलों में नकली मोबाइल ऐप और फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. सेबी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे केवल पंजीकृत मध्यस्थों के साथ ही लेन-देन करें और किसी भी संस्था का रजिस्ट्रेशन स्टेटस आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर जांच लें.
‘सेबी चेक’ से करें पहचान की पुष्टि
निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी ने ‘सेबी चेक’ नाम से नई सुविधा शुरू की है. इसके जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर या बैंक विवरण दर्ज कर यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित यूपीआई आईडी या बैंक खाता असली है या नहीं. सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी आधिकारिक ईमेल आईडी केवल @sebi.gov.in से समाप्त होती है और सभी प्रवर्तन आदेश वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करते समय लालच और डर-दोनों से दूरी रखना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
February 27, 2026, 23:40 IST

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