Last Updated:January 30, 2026, 06:43 IST
UGC New Rule | UGC Equity Regulations 2026 | CJI Surykant News | Supreme Court UGC Rule | सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है. यूजीसी की नई गाइडलाइन्स के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने इसे अस्पष्ट बताया और इस पर रोक लगा दी.
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी. UGC New Rule | UGC Equity Regulations 2026 | CJI Surykant News | यूजीसी के नए नियमों पर रोक लग गई. सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की नई गाइडलाइंस पर रोक लगा दी. यूजीसी के 2026 वाले नियम के बदले अब पुराने वाले यानी 2012 के नियम ही लागू रहेंगे. यूजीसी के मुताबिक, नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए थे, मगर सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्पष्ट नहीं माना. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने यूजीसी के नए नियमों को ‘बहुत ज्यादा व्यापक’ और ‘अस्पष्ट’ बताया और फिलहाल रोक लगा दी. यूजीसी नियमों सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच ने अमेरिका का जिक्र किया और वहां के पुराने स्कूल सिस्टम की दुहाई दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत को ऐसे हालात से बचना चाहिए, जहां स्कूल अलग-अलग समुदायों के लिए बंट जाएं, जैसे अमेरिका में कभी श्वेत और अश्वेत लोगों के लिए अलग स्कूल होते थे.
सबसे पहले समझते हैं कि यूजीसी के नए नियम क्या हैं और कोर्ट में क्या हुआ? दरअसल, यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए थे. इसे ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ नाम दिया गया. इनमें उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए ‘इक्विटी कमिटी’ बनाने का प्रावधान था. लेकिन नियमों में भेदभाव की परिभाषा सिर्फ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित थी. सामान्य वर्ग के छात्रों को इसमें सुरक्षा नहीं दी गई थी. इसलिए इस पर विवाद हुआ. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं गईं. कई याचिकाओं में कहा गया कि ये नियम भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं और सामान्य वर्ग के लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि ऐसे नियम समाज को बांट सकते हैं और शिक्षा में एकता की बजाय अलगाव पैदा कर सकते हैं.
बेंच ने अमेरिका का नाम लिया
सुनवाई के दौरान सीजेआई की बेंच ने कहा, ‘हमारे देश में 75 साल बाद भी क्या हम एक ऐसे समाज की ओर जा रहे हैं जहां वर्गहीनता की बजाय पीछे की ओर लौट रहे हैं?’, अदालत ने अमेरिका के इतिहास का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि वहां कभी श्वेत और अश्वेत के बच्चे अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे. बेंच ने आगे कहा, ‘भारत की एकता शैक्षणिक संस्थानों में दिखनी चाहिए. उम्मीद है कि हम अमेरिका की तरह अलग-अलग स्कूलों में न पहुंच जाएं, जहां अश्वेत और श्वेत अलग-अलग स्कूलों में जाते थे.’
दरअसल, अमेरिका में पहले स्कूली सिस्टम जिम क्रो कानूनों पर आधारित था. जहां ‘अलग लेकिन बराबर’ का दावा किया जाता था, मगर असल में असमानता थी. वहां श्वेत और अश्वेत को अलग-अलग स्कूल में पढ़ाया जाता था.
अमेरिका का जिक्र क्यों?
सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि यूजीसी के नए नियमों से शिक्षा में भेदभाव बढ़ सकता है, जो समाज को बांट देगा. अमेरिका का उदाहरण देकर कोर्ट ने बताया कि ऐसी नीतियां कैसे गलत रास्ते पर ले जा सकती हैं. अमेरिका में 1954 में ब्राउन वर्सेस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के फैसले ने स्कूल अलगाव को गैरकानूनी घोषित किया था, लेकिन पहले ये सिस्टम नस्लवाद को बढ़ावा देता था. भारत में सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहता कि जाति या वर्ग के नाम पर ऐसा कुछ हो.
प्रदर्शनकारियों को राहत
नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. सवर्ण छात्र संगठनों ने इन्हें भेदभावपूर्ण बताया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार को झटका लगा है, जबकि प्रदर्शनकारियों को राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुराने 2012 के UGC नियम फिलहाल लागू रहेंगे और मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी.
अमेरिका में श्वेत और अश्वेत अलग-अलग स्कूलों के बारे में जानिए
अमेरिका में 19वीं और 20वीं सदी में जिम क्रो कानूनों के तहत श्वेत (गोरे) और अश्वेत (काले) लोग अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे. 1896 के प्लेसी वर्सेस फर्ग्यूसन फैसले ने ‘अलग लेकिन बराबर’ को वैध माना, लेकिन असल में अश्वेत स्कूलों में सुविधाएं कम थीं. 1954 में ब्राउन वर्सेस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के सुप्रीम कोर्ट फैसले ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया, और कानूनी अलगाव बंद हो गया. अब कानूनी रूप से अलग स्कूल नहीं हैं, लेकिन वास्तविक अलगाव अभी भी है. आवासीय पैटर्न, आर्थिक असमानता और जिला अलगाव से कई स्कूलों में नस्लीय अलगाव बढ़ रहा है. 2024 के स्टैनफर्ड अध्ययन के मुताबिक, 1988 से काले-श्वेत अलगाव 64% बढ़ा है.
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January 30, 2026, 06:43 IST

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