UPSC Story: 'ग्रहों ने छीन लिया नंबर 1 का ताज', यूपीएससी में आई 10वीं रैंक, फिर भी पिता नाराज

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Last Updated:March 13, 2026, 12:28 IST

Ujjwal Priyank UPSC Story: यूपीएससी परीक्षा में 10वीं रैंक लाने वाले उज्ज्वल प्रियांक की सफलता के बीच हैरान करने वाली खबर आई है. उज्ज्वल के पिता इस रैंक से खुश नहीं हैं और उन्होंने इसके लिए ग्रह-नक्षत्रों को जिम्मेदार ठहराया है. जानिए क्यों पिता को थी पहली रैंक की उम्मीद और क्या है पूरा ज्योतिषीय तर्क.

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Ujjwal Priyank UPSC Story: उज्ज्वल प्रियांक बचपन से पढ़ाई में बहुत होशियार रहे हैं

नई दिल्ली (Ujjwal Priyank UPSC Story). यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता गौरव का क्षण है. जब किसी का बेटा पूरे देश में 10वीं रैंक हासिल करे तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहता. लेकिन बिहार के वैशाली (बिदुपुर) के उज्ज्वल प्रियांक के मामले में कहानी थोड़ी अलग और हैरान करने वाली है. उज्ज्वल ने अपनी मेहनत से टॉप 10 में जगह बनाई, लेकिन उनके पिता पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. जहां पड़ोसी और रिश्तेदार मिठाइयां बांट रहे हैं, वहीं उज्ज्वल के पिता की नाराजगी चर्चा का विषय बनी हुई है.

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, उज्ज्वल प्रियांक के पिता की नाराजगी के पीछे कोई पारिवारिक अनबन नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों का खेल है. उनका मानना है कि बेटे की योग्यता और कुंडली के सितारों के हिसाब से उसे यूपीएससी सीएसई 2025 में पहली रैंक मिलनी चाहिए थी. उनके अनुसार, ग्रहों की खास दशा ने उज्ज्वल को टॉप पर पहुंचने से रोक दिया और उसे 10वें स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया. यह मामला उन लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया है जो मेहनत और किस्मत के बीच का बैलेंस समझने की कोशिश करते हैं.

मेहनत पर भारी पड़े ग्रह-नक्षत्र?

उज्ज्वल प्रियांक ने यूपीएससी की कठिन डगर को पार कर अपनी काबिलियत साबित की है. मिडिल क्लास परिवार से आने वाले उज्ज्वल के लिए 10वीं रैंक हासिल करना किसी सपने से कम नहीं था. हालांकि, उनके पिता (जो ज्योतिष विद्या में गहरा विश्वास रखते हैं) इसे अधूरी सफलता मान रहे हैं. उनका तर्क है कि अगर नक्षत्र थोड़े और अनुकूल होते तो उज्ज्वल आज देश का टॉपर होता. यह सुनकर हर कोई हैरान है कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में भी लोग मेरिट से ज्यादा कुंडली को महत्व दे रहे हैं.

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

यह खबर वायरल होते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई. कुछ लोग पिता के विश्वास को उनकी निजी आस्था बता रहे हैं तो वहीं अधिकांश लोग इसे अजीबोगरीब मान रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि जहां हजारों युवा एक रैंक के लिए तरसते हैं, वहां 10वीं रैंक को कम आंकना उज्ज्वल की मेहनत का अपमान है. हालांकि, उज्ज्वल प्रियांक ने इस पर बहुत ही संयमित प्रतिक्रिया दी है और अपने पिता की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपनी सफलता का आनंद ले रहे हैं.

यूपीएससी की तैयारी और संघर्ष

उज्ज्वल प्रियांक की यूपीएससी यात्रा आसान नहीं थी. उन्होंने कई घंटों की पढ़ाई और सटीक रणनीति के साथ यह मुकाम हासिल किया है. उनके दोस्तों का कहना है कि उज्ज्वल हमेशा से ही मेधावी छात्र रहे हैं. 10वीं रैंक आने का मतलब है कि वे अब आईएएस (IAS) बनकर देश की सेवा करेंगे. पिता की नाराजगी के बावजूद, घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. लोग कह रहे हैं कि भले ही पिता को पहली रैंक चाहिए थी, लेकिन उज्ज्वल ने 10वीं रैंक लाकर भी इतिहास रच दिया है.

शुरू से टॉपर रहे हैं उज्ज्वल

उज्ज्वल प्रियांक ने शुरुआती पढ़ाई पटना के जान निकेतन स्कूल से की. साल 2016 में सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में 10 CGPA और संत माइकल स्कूल, पटना से 2018 में ISC परीक्षा में 96% अंक हासिल किए. उज्ज्वल ने जयपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया. वह यूपीएससी परीक्षा के तीसरे प्रयास में सफल हुए हैं. उज्ज्वल के पिता संजीव कुमार इंजीनियर होने के साथ ही कुशल किसान भी हैं. उनका कहना है कि उज्ज्वल हर परीक्षा में टॉपर रहा है, यूपीएससी में भी रैंक 1 होनी चाहिए थी.

क्या कहता है ज्योतिषीय तर्क?

उज्ज्वल प्रियांक के पिता संजीव कुमार पेशे से इंजीनियर हैं. उन्होंने मीडिया से बातचीत में ग्रहों की स्थिति का विस्तार से जिक्र किया. उन्होंने बताया कि किस तरह कुछ विशेष ग्रहों की चाल ने आखिरी समय में परिणाम को प्रभावित किया. यह पहली बार है जब यूपीएससी जैसे तार्किक परीक्षा के परिणाम को किसी ने सार्वजनिक रूप से ज्योतिष की कसौटी पर परखा है. हालांकि, शिक्षाविदों का मानना है कि सफलता केवल रणनीति और मेहनत का परिणाम होती है.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें

First Published :

March 13, 2026, 12:28 IST

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