Last Updated:March 03, 2026, 16:39 IST
अमेरिका-ईरान तनाव ने दुनिया में तेल सप्लाई की धड़कन बढ़ा दी है. होरमुज जलडमरूमध्य में 700 से ज्यादा टैंकर फंसे होने की खबर है. शिपिंग लगभग ठप होने से तेल ढुलाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इस संकट का असर एशियाई बाजारों और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है.

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते अमेरिकी-ईरान तनाव का सीधा असर अब वैश्विक तेल सप्लाई पर दिखने लगा है. फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण शिपिंग गतिविधियां लगभग थम गई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस रणनीतिक मार्ग के दोनों ओर 700 से ज्यादा टैंकर खड़े हैं. बीमा लागत में तेज उछाल और हमले के खतरे ने जहाज संचालकों को आवाजाही रोकने पर मजबूर कर दिया है. यह मार्ग दुनिया की कुल दैनिक तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा संभालता है, यानी लगभग 2 करोड़ बैरल तेल रोजाना यहीं से गुजरता है. खाड़ी के देशों से निकलकर यही रास्ता ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर के जरिये वैश्विक बाजारों तक ऊर्जा पहुंचाता है.
तेल ढुलाई में 86% गिरावट, बाजार में हड़कंप
डेटा विश्लेषण के अनुसार 27 फरवरी को 15 टैंकरों के जरिये 2.1 करोड़ बैरल तेल की ढुलाई हुई थी. शनिवार तक यह संख्या बढ़कर 18 जहाजों और 2.16 करोड़ बैरल तक पहुंची. लेकिन 1 मार्च को केवल तीन टैंकर 28 लाख बैरल तेल लेकर इस मार्ग से गुजर पाए. यह औसत दैनिक प्रवाह से करीब 86 फीसदी की गिरावट है. 2 मार्च तक 706 गैर-ईरानी टैंकर अलग-अलग हिस्सों में रुके हुए बताए गए. इनमें कच्चे तेल, डर्टी पेट्रोलियम उत्पाद और क्लीन फ्यूल ढोने वाले जहाज शामिल हैं. इस बीच समुद्री सुरक्षा स्तर को ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है. हालांकि औपचारिक तौर पर रास्ता बंद घोषित नहीं हुआ है, लेकिन जमीनी हालात शिपिंग उद्योग के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं.
एशियाई रिफाइनरियां दबाव में, भारत ने घटाई गैस आपूर्ति
होरमुज के जरिए चीन, भारत, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों को बड़ी मात्रा में तेल मिलता है. मौजूदा संकट के चलते एशियाई रिफाइनरियां 20 फीसदी से 30 फीसदी तक उत्पादन घटाने पर विचार कर रही हैं. जहाजों के फंसे रहने से कच्चे तेल की समय पर आपूर्ति मुश्किल हो रही है. भारत में भी असर दिखने लगा है. उद्योगों को दी जाने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई में कटौती की गई है, क्योंकि पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. आम तौर पर रिफाइनरियां दो से तीन हफ्ते का स्टॉक रखती हैं, लेकिन अगर तनाव लंबा खिंचता है तो ऊर्जा कीमतों में और उछाल संभव है.
होरमुज जाम केवल समुद्री संकट नहीं
होरमुज जलडमरूमध्य में यह जाम केवल समुद्री संकट नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चेतावनी बन गया है. यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो तेल और गैस की कीमतों में नई तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक पर पड़ेगा. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिरोध कुछ हफ्तों तक भी जारी रहता है, तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर गहरा असर पड़ेगा. लंबी दूरी से तेल मंगाना महंगा और समय लेने वाला होगा, जिससे फ्रेट चार्ज और बीमा प्रीमियम और बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, हवाई किराए और औद्योगिक लागत पर पड़ सकता है. ऐसे में दुनिया की नजर अब कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी है, क्योंकि होरमुज में सामान्य स्थिति बहाल होना ही बाजार की स्थिरता की सबसे बड़ी कुंजी है.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in ...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
March 03, 2026, 16:39 IST

1 hour ago
